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Poverty, Unemployment and Human Development

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Poverty, Unemployment and Human Developmentअध्ययन नोट्स

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राजस्थान में गरीबी: परिभाषा, प्रकार एवं मापदंड

परिभाषा

राजस्थान में गरीबी: परिभाषा, प्रकार एवं मापदंड

गरीबी (Poverty) का अर्थ है वह स्थिति जिसमें व्यक्ति की आय, आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं होती। राजस्थान में गरीबी का आकलन मुख्यतः आय आधारित मापदंडों, उपभोग व्यय तथा जीवन-स्तर के आधार पर किया जाता है। राज्य में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी व्याप्त है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र अधिक प्रभावित हैं। गरीबी के प्रकारों में सापेक्षिक (Relative) एवं निरपेक्ष (Absolute) गरीबी शामिल हैं। राजस्थान में गरीबी की गणना योजना आयोग (Planning Commission) द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा (Poverty Line) के अनुसार होती है। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • तेंदुलकर समिति द्वारा 2011-12 में राजस्थान की गरीबी दर 14.71% आंकी गई। • राष्ट्रीय औसत गरीबी दर 21.92% थी। • राज्य के 33 जिलों में गरीबी का वितरण असमान है। • तेंदुलकर समिति के मापदंड व वर्ष याद रखें। • राजस्थान के उच्च गरीबी दर वाले जिलों के नाम याद रखें।

  • 2011-12 के अनुसार राजस्थान में गरीबी दर 14.71% थी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 16.05% तथा शहरी क्षेत्रों में 10.69% रही।
  • गरीबी रेखा निर्धारण के लिए तेंदुलकर समिति (Tendulkar Committee) के मापदंड अपनाए गए।
  • राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर आदि जिलों में गरीबी दर सर्वाधिक है।
  • राष्ट्रीय औसत के मुकाबले राजस्थान की गरीबी दर कम है।
  • 📌 गरीबी रेखा (Poverty Line): न्यूनतम आय या व्यय सीमा, जिसके नीचे व्यक्ति गरीब माना जाता है।
  • 📌 सापेक्षिक गरीबी (Relative Poverty): समाज के अन्य लोगों की तुलना में कम आय होना।
  • 📌 निरपेक्ष गरीबी (Absolute Poverty): जीवनयापन के लिए आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति में असमर्थता।

राजस्थान में बेरोजगारी: स्वरूप, कारण एवं प्रकार

अवधारणा

राजस्थान में बेरोजगारी: स्वरूप, कारण एवं प्रकार

बेरोजगारी (Unemployment) वह स्थिति है जब कार्य करने की इच्छा एवं योग्यता रखने के बावजूद व्यक्ति को रोजगार नहीं मिलता। राजस्थान में बेरोजगारी की समस्या जटिल है, जिसमें शिक्षित, अल्पशिक्षित, ग्रामीण, शहरी, मौसमी एवं छिपी बेरोजगारी (Disguised Unemployment) शामिल हैं। राज्य में कृषि पर निर्भरता, उद्योगों की कमी, शिक्षा-रोजगार असंतुलन, तकनीकी कौशल की कमी आदि प्रमुख कारण हैं। ⭐ परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य: • 2021 में राजस्थान में बेरोजगारी दर 5.0% थी। • राज्य के 30 लाख युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत हैं। • महिलाओं में बेरोजगारी दर 7.2% है। • बेरोजगारी के प्रकार व संबंधित जिले याद रखें। • नवीनतम बेरोजगारी दर व वर्ष अवश्य याद करें।

  • प्लानिंग कमीशन के अनुसार 2017-18 में राजस्थान की बेरोजगारी दर 5.0% थी।
  • शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 2021 में 17.83 लाख थी।
  • राज्य में छिपी बेरोजगारी मुख्यतः कृषि क्षेत्र में है।
  • महिलाओं में बेरोजगारी दर पुरुषों की तुलना में अधिक है।
  • राजस्थान में 2023 तक 30 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवा थे।
  • 📌 छिपी बेरोजगारी (Disguised Unemployment): जब एक ही कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों।
  • 📌 मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment): मौसम विशेष में ही रोजगार मिलना।
  • 📌 शिक्षित बेरोजगारी (Educated Unemployment): योग्य होने के बावजूद रोजगार न मिलना।

मानव विकास सूचकांक (HDI) एवं राजस्थान की स्थिति

अवधारणा

मानव विकास सूचकांक (HDI) एवं राजस्थान की स्थिति

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण सूचकांक है, जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा स्तर एवं प्रति व्यक्ति आय के आधार पर मानव विकास का आकलन करता है। राजस्थान में मानव विकास का स्