Ch 9निःशुल्क

Chapter 9

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Practical Geography (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 7अध्याय 8 / 8

Chapter 9अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

9.1 परिचय

व्याख्या

9.1 परिचय

इस अनुभाग में भारतीय क्लाइनोमीटर के महत्व, विकास और उपयोग की पृष्ठभूमि का विस्तार से वर्णन किया गया है। क्लाइनोमीटर एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण उपकरण है, जिसका उपयोग ढाल, ऊँचाई तथा कोण मापन के लिए किया जाता है। भारतीय क्लाइनोमीटर, जिसे 'एबनी क्लाइनोमीटर' भी कहते हैं, सर्वेक्षण कार्यों में भारतीय भूगोलवेत्ताओं द्वारा विकसित किया गया था। यह उपकरण सरल, सस्ता और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप है। इसमें मुख्यतः एक स्केल, दृष्टि छिद्र, दर्पण, और एक लटकता हुआ प्लम्ब बॉब होता है। इसका उपयोग पहाड़ों, इमारतों, वृक्षों आदि की ऊँचाई मापने के लिए किया जाता है। इसके विकास का उद्देश्य सर्वेक्षण कार्य को सरल बनाना था।

  • क्लाइनोमीटर का विकास भारतीय सर्वेक्षकों द्वारा किया गया।
  • यह ढाल, ऊँचाई और कोण मापन के लिए प्रयोग होता है।
  • भारतीय क्लाइनोमीटर सस्ता, सरल और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप है।
  • इसमें स्केल, दृष्टि छिद्र, दर्पण, और प्लम्ब बॉब होते हैं।
  • इसका उपयोग भू-आकृतिक सर्वेक्षण में किया जाता है।
  • 📌 क्लाइनोमीटर: कोण मापन का उपकरण।
  • 📌 प्लम्ब बॉब: लटकता हुआ भार जो ऊर्ध्वाधर दिशा दर्शाता है।

9.2 भारतीय क्लाइनोमीटर के भाग

अवधारणा

9.2 भारतीय क्लाइनोमीटर के भाग

इस अनुभाग में भारतीय क्लाइनोमीटर के प्रमुख भागों का विस्तृत वर्णन है। क्लाइनोमीटर के मुख्य भाग हैं: (1) स्केल – जिस पर कोणों का मापन किया जाता है, (2) दृष्टि छिद्र – जिससे देख कर लक्ष्य वस्तु को केंद्रित किया जाता है, (3) दर्पण – जो प्रतिबिंब दिखाता है, (4) प्लम्ब बॉब – जो ऊर्ध्वाधर दिशा दर्शाता है, (5) फ्रेम – जिसमें ये सभी भाग लगे होते हैं। प्रत्येक भाग का विशिष्ट कार्य है। स्केल पर डिग्री में चिह्न होते हैं, दर्पण से प्रतिबिंब देखा जाता है, प्लम्ब बॉब से ऊर्ध्वाधरता सुनिश्चित होती है।

  • स्केल पर कोणों के चिह्न अंकित होते हैं।
  • दृष्टि छिद्र से लक्ष्य वस्तु देखी जाती है।
  • दर्पण से प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
  • प्लम्ब बॉब ऊर्ध्वाधर दिशा दर्शाता है।
  • फ्रेम सभी भागों को जोड़ता है।
  • 📌 स्केल: कोण मापन के लिए अंकित पट्टी।
  • 📌 दृष्टि छिद्र: देखने का छेद।
  • 📌 दर्पण: प्रकाश का प्रतिबिंब देने वाला भाग।

9.3 कार्य सिद्धांत

व्याख्या

9.3 कार्य सिद्धांत

इस अनुभाग में क्लाइनोमीटर के कार्य सिद्धांत का विस्तार से वर्णन है। क्लाइनोमीटर का कार्य मुख्यतः त्रिकोणमिति के सिद्धांत पर आधारित है। जब किसी ऊँचाई या ढाल का मापन करना होता है, तो उपकरण को इस प्रकार रखा जाता है कि दृष्टि छिद्र से लक्ष्य वस्तु देखी ज