Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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4.1 शंक्वाकार प्रक्षेप का परिचय
व्याख्या4.1 शंक्वाकार प्रक्षेप का परिचय
इस अनुभाग में शंक्वाकार प्रक्षेप का परिचय दिया गया है। शंक्वाकार प्रक्षेप वह विधि है जिसमें पृथ्वी की सतह को एक शंकु (कोन) पर प्रक्षिप्त किया जाता है। यह प्रक्षेप विशेष रूप से मध्य अक्षांशों के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें विकृतियाँ कम होती हैं। शंक्वाकार प्रक्षेप का उपयोग मुख्यतः जलवायु, भौगोलिक और प्रशासनिक मानचित्रों में किया जाता है। इस विधि में शंकु को पृथ्वी के किसी विशेष अक्षांश पर रखा जाता है, जिससे वह उस अक्षांश के साथ संपर्क बनाता है। शंकु को खोलकर समतल सतह पर फैलाया जाता है, जिससे मानचित्र बनता है। शंक्वाकार प्रक्षेप के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे - साधारण शंक्वाकार, बहु-शंक्वाकार और समद्विकारी शंक्वाकार प्रक्षेप।
- शंक्वाकार प्रक्षेप में पृथ्वी की सतह को शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है।
- यह प्रक्षेप मध्य अक्षांशों के लिए अधिक उपयुक्त है।
- इसमें विकृतियाँ सीमित होती हैं।
- शंकु को किसी विशेष अक्षांश पर रखा जाता है।
- शंकु को खोलकर समतल सतह पर फैलाया जाता है।
- इस विधि का उपयोग जलवायु एवं प्रशासनिक मानचित्रों में होता है।
- 📌 शंक्वाकार प्रक्षेप: पृथ्वी की सतह को शंकु पर प्रक्षिप्त करने की विधि।
- 📌 विकृति: मानचित्र में आकार, क्षेत्र या दूरी की असमानता।
4.2 शंक्वाकार प्रक्षेप के प्रकार
अवधारणा4.2 शंक्वाकार प्रक्षेप के प्रकार
इस अनुभाग में शंक्वाकार प्रक्षेप के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया गया है। मुख्यतः तीन प्रकार के शंक्वाकार प्रक्षेप होते हैं: साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप, बहु-शंक्वाकार प्रक्षेप और समद्विकारी शंक्वाकार प्रक्षेप। साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप में शंकु केवल एक अक्षांश पर पृथ्वी को स्पर्श करता है, जिससे उस अक्षांश पर विकृति नहीं होती। बहु-शंक्वाकार प्रक्षेप में शंकु दो या अधिक अक्षांशों पर पृथ्वी को स्पर्श करता है, जिससे उन दोनों अक्षांशों के बीच विकृति कम होती है। समद्विकारी शंक्वाकार प्रक्षेप में क्षेत्रफल सही रहता है, अर्थात् मानचित्र पर दर्शाया गया क्षेत्र वास्तविक क्षेत्र के बराबर होता है।
- तीन प्रकार के शंक्वाकार प्रक्षेप होते हैं।
- साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप में एक अक्षांश स्पर्श होता है।
- बहु-शंक्वाकार प्रक्षेप में दो या अधिक अक्षांश स्पर्श होते हैं।
- समद्विकारी शंक्वाकार प्रक्षेप में क्षेत्रफल सही रहता है।
- प्रत्येक प्रकार की अपनी विशेषताएँ और उपयोग हैं।
- विकृति की मात्रा प्रकार के अनुसार बदलती है।
- 📌 साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप: शंकु एक अक्षांश पर स्पर्श करता है।
- 📌 बहु-शंक्वाकार प्रक्षेप: शंकु दो या अधिक अक्षांशों पर स्पर्श करता है।
- 📌 समद्विकारी शंक्वाकार प्रक्षेप: क्षेत्रफल सही दर्शाता है।
4.3 शंक्वाकार प्रक्षेप की गणितीय संरचना
सूत्र4.3 शंक्वाकार प्रक्षेप की गणितीय संरचना
इस अनुभाग में शंक्वाकार प्रक्षेप की गणितीय संरचना का वर्णन है। शंक्वाकार प्रक्षेप में पृथ्वी के बिंदुओं को शंकु की सतह पर प्रक्षिप्त करने के लिए गणितीय सूत्रों का प्रयोग किया जाता है। इसमें अक्षांश (latitude) और देशांतर (longitude) के मानों को शंकु क
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