Ch 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Practical Geography (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 2अध्याय 2 / 8Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 प्रस्तावना

व्याख्या

3.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में बेलनाकार प्रक्षेप का परिचय दिया गया है। प्रक्षेपण का अर्थ है पृथ्वी की गोलाकार सतह को समतल कागज पर दर्शाना। चूँकि पृथ्वी त्रि-आयामी है और मानचित्र द्वि-आयामी होते हैं, अतः पृथ्वी की सतह को समतल पर दर्शाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रक्षेपों का उपयोग किया जाता है। बेलनाकार प्रक्षेप (Cylindrical Projection) उन प्रमुख प्रक्षेपों में से एक है, जिसमें पृथ्वी के भूमध्यरेखा के समीप के भागों को अधिक सटीकता से दर्शाया जा सकता है। इस प्रक्षेप में पृथ्वी के ग्लोब को एक बेलन के भीतर रखा जाता है और बेलन को भूमध्यरेखा के साथ स्पर्श कराया जाता है। फिर पृथ्वी की सतह की विशेषताओं को बेलन पर प्रक्षिप्त किया जाता है और बेलन को खोलकर समतल शीट पर फैला दिया जाता है। इस प्रक्रिया में भूमध्यरेखा के समीप विकृति कम होती है, जबकि ध्रुवों की ओर विकृति बढ़ती जाती है।

  • बेलनाकार प्रक्षेप पृथ्वी की सतह को बेलन के माध्यम से समतल पर दर्शाने की विधि है।
  • यह प्रक्षेप भूमध्यरेखा के समीप के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
  • ध्रुवों की ओर विकृति अधिक होती है।
  • मानचित्र निर्माण में बेलनाकार प्रक्षेप का विशेष महत्व है।
  • यह प्रक्षेप समुद्री एवं वायवीय नेविगेशन के लिए उपयोगी है।
  • 📌 प्रक्षेपण: पृथ्वी की गोल सतह को समतल पर दर्शाने की प्रक्रिया।
  • 📌 बेलनाकार प्रक्षेप: वह प्रक्षेप जिसमें बेलन के माध्यम से पृथ्वी की सतह को समतल पर दर्शाया जाता है।

3.2 बेलनाकार प्रक्षेप का सिद्धांत

अवधारणा

3.2 बेलनाकार प्रक्षेप का सिद्धांत

इस अनुभाग में बेलनाकार प्रक्षेप के मूल सिद्धांतों की व्याख्या की गई है। बेलनाकार प्रक्षेप में पृथ्वी के ग्लोब को एक काल्पनिक बेलन के भीतर रखा जाता है, जो भूमध्यरेखा के साथ स्पर्श करता है। पृथ्वी की सतह की विशेषताओं को बेलन पर प्रक्षिप्त किया जाता है, फिर बेलन को काटकर समतल शीट के रूप में फैलाया जाता है। इस प्रक्रिया में भूमध्यरेखा के समीप विकृति न्यूनतम होती है, जबकि ध्रुवों की ओर विकृति अधिकतम होती जाती है। बेलनाकार प्रक्षेप के तीन प्रमुख रूप होते हैं—समरूप (Conformal), समक्षेत्रफल (Equal-area), और समदूरी (Equidistant)। प्रत्येक रूप का अपना विशेष महत्व और उपयोग है।

  • बेलनाकार प्रक्षेप में बेलन भूमध्यरेखा के साथ स्पर्श करता है।
  • भूमध्यरेखा के समीप विकृति कम होती है।
  • ध्रुवों की ओर विकृति बढ़ती जाती है।
  • तीन प्रमुख प्रकार: समरूप, समक्षेत्रफल, समदूरी।
  • मानचित्र के विभिन्न उद्देश्यों के लिए अलग-अलग प्रकार के प्रक्षेप का चयन किया जाता है।
  • 📌 समरूप प्रक्षेप: जिसमें कोणीय संबंध संरक्षित रहते हैं।
  • 📌 समक्षेत्रफल प्रक्षेप: जिसमें क्षेत्रफल का अनुपात संरक्षित रहता है।
  • 📌 समदूरी प्रक्षेप: जिसमें दूरी का अनुपात संरक्षित रहता है।

3.3 समरूप बेलनाकार प्रक्षेप

व्याख्या

3.3 समरूप बेलनाकार प्रक्षेप

समरूप बेलनाकार प्रक्षेप (Conformal Cylindrical Projection) में कोणीय संबंधों को संरक्षित रखा जाता है, अर्थात् मानचित्र पर किसी भी दो रेखाओं के बीच का कोण पृथ्वी की सतह पर उनके वास्तविक कोण के बराबर होता है। इस प्रक्षेप का सबसे प्रसिद्ध रूप मर्केटर प्