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Chapter 5

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Practical Geography (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 4अध्याय 4 / 8Chapter 5

Chapter 5अध्ययन नोट्स

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5.1 स्थलाकृतिक मानचित्रों का परिचय

व्याख्या

5.1 स्थलाकृतिक मानचित्रों का परिचय

स्थलाकृतिक मानचित्र वे मानचित्र होते हैं जिनमें पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक एवं मानव निर्मित विशेषताओं का विस्तार से चित्रण किया जाता है। इन मानचित्रों में स्थलाकृति, जल निकाय, वनस्पति, बस्तियाँ, सड़कें, रेलवे लाइनें, ऊँचाई, ढाल, आदि को दर्शाया जाता है। स्थलाकृतिक मानचित्रों का प्रयोग भूगोल, भूगर्भशास्त्र, नगर नियोजन, सैन्य संचालन, कृषि, वानिकी, जल संसाधन प्रबंधन आदि में किया जाता है। इन मानचित्रों में सामान्यतः बड़े पैमाने (1:25,000, 1:50,000) का उपयोग होता है जिससे अधिक विवरण दिखाया जा सके। स्थलाकृतिक मानचित्रों में रंगों, रेखाओं, चिन्हों एवं संख्याओं का विशेष महत्व है। इन मानचित्रों में समोच्च रेखाओं (contour lines) के माध्यम से स्थल की ऊँचाई एवं ढाल को दर्शाया जाता है। प्रत्येक समोच्च रेखा एक समान ऊँचाई को दर्शाती है। स्थलाकृतिक मानचित्रों का अध्ययन करने के लिए मानचित्र की कुंजी (legend), पैमाना, दिशा, और संकेतिक चिन्हों की जानकारी आवश्यक है।

  • स्थलाकृतिक मानचित्र पृथ्वी की सतह की विशेषताओं का विस्तृत चित्रण करते हैं।
  • इन मानचित्रों में प्राकृतिक एवं मानव निर्मित दोनों प्रकार की विशेषताएँ दर्शाई जाती हैं।
  • समोच्च रेखाएँ ऊँचाई और ढाल को दर्शाने के लिए प्रयोग होती हैं।
  • पैमाना, दिशा, और संकेतिक चिन्हों की समझ आवश्यक है।
  • इनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है जैसे कृषि, सैन्य, नगर नियोजन।
  • मानचित्र की कुंजी (legend) का अध्ययन अनिवार्य है।
  • 📌 स्थलाकृतिक मानचित्र: पृथ्वी की सतह की विशेषताओं को विस्तार से दर्शाने वाला मानचित्र।
  • 📌 समोच्च रेखा: समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखा।
  • 📌 पैमाना: मानचित्र पर दूरी और वास्तविक दूरी के अनुपात का सूचक।

5.2 स्थलाकृतिक मानचित्रों के प्रकार

अवधारणा

5.2 स्थलाकृतिक मानचित्रों के प्रकार

स्थलाकृतिक मानचित्रों के विभिन्न प्रकार होते हैं, जो उनके पैमाने, उद्देश्य और क्षेत्र के अनुसार विभाजित किए जाते हैं। मुख्यतः दो प्रकार के स्थलाकृतिक मानचित्र होते हैं: (1) बड़े पैमाने के मानचित्र (Large Scale Maps) और (2) छोटे पैमाने के मानचित्र (Small Scale Maps)। बड़े पैमाने के मानचित्रों में क्षेत्र का अधिक विवरण दिखाया जाता है, जैसे 1:25,000 या 1:50,000 पैमाना। छोटे पैमाने के मानचित्रों में विस्तृत क्षेत्र को कम विवरण के साथ दिखाया जाता है, जैसे 1:2,50,000 या 1:10,00,000 पैमाना। इसके अतिरिक्त, विशेष उद्देश्य के स्थलाकृतिक मानचित्र भी बनाए जाते हैं, जैसे सैन्य मानचित्र, कृषि मानचित्र, नगर नियोजन मानचित्र आदि। भारत में सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित मानचित्रों का विशेष महत्व है। इन मानचित्रों में संकेतिक चिन्ह, रंग, और संख्याओं का मानकीकरण किया गया है।

  • स्थलाकृतिक मानचित्रों के दो मुख्य प्रकार: बड़े पैमाने और छोटे पैमाने के मानचित्र।
  • बड़े पैमाने के मानचित्र अधिक विवरण दिखाते हैं।
  • छोटे पैमाने के मानचित्र विस्तृत क्षेत्र को कम विवरण के साथ दर्शाते हैं।
  • विशेष उद्देश्य के मानचित्र भी बनाए जाते हैं।
  • भारत में सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा मानचित्रों का प्रकाशन किया जाता है।
  • मानचित्रों में चिन्हों और रंगों का मानकीकरण किया गया है।
  • 📌 बड़े पैमाने का मानचित्र: जिसमें अधिक विवरण और सीमित क्षेत्र दिखाया जाता है।
  • 📌 छोटे पैमाने का मानचित्र: जिसमें कम विवरण और विस्तृत क्षेत्र दिखाया जाता है।
  • 📌 सर्वे ऑफ इंडिया: भारत की प्रमुख मानचित्र निर्माण संस्था।

5.3 स्थलाकृतिक मानचित्रों के संकेतिक चिन्ह

परिभाषा

5.3 स्थलाकृतिक मानचित्रों के संकेतिक चिन्ह

स्थलाकृतिक मानचित्रों में विभिन्न प्राकृतिक और मानव निर्मित विशेषताओं को दर्शाने के लिए संकेतिक चिन्हों (conventional symbols) का प्रयोग किया जाता है। ये चिन्ह मानकीकृत होते हैं और सभी मानचित्रों में एक समान होते हैं। इन चिन्हों के माध्यम से वृक्ष, न