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Chapter 8

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 7अध्याय 12 / 17Chapter 8

Chapter 8अध्ययन नोट्स

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8.1 कृषि साख : एक परिचय

व्याख्या

8.1 कृषि साख : एक परिचय

कृषि साख का तात्पर्य किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि की पूर्ति हेतु ऋण या उधार की व्यवस्था से है। भारत में कृषि एक पारंपरिक व्यवसाय है, जिसमें किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि यंत्र, मजदूरी, और विपणन के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। कृषि साख किसानों को इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। ऐतिहासिक रूप से, किसान साहूकारों, महाजनों, और रिश्तेदारों से ऋण लेते थे, जिससे वे अक्सर कर्ज के जाल में फँस जाते थे। स्वतंत्रता के बाद, सरकार ने संस्थागत साख की व्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिससे किसानों को उचित ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो सके। कृषि साख की आवश्यकता, स्रोत, और महत्व को समझना कृषि विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  • कृषि साख किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
  • भारत में कृषि साख की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि साहूकारों और महाजनों से जुड़ी रही है।
  • संस्थागत साख के विकास से किसानों को सस्ती और सुरक्षित ऋण सुविधा मिली।
  • कृषि साख कृषि उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है।
  • सरकार ने कृषि साख के लिए विभिन्न योजनाएँ और संस्थाएँ स्थापित की हैं।
  • 📌 कृषि साख: कृषि कार्यों के लिए किसानों को दिया गया ऋण।
  • 📌 संस्थागत साख: बैंकों, सहकारी समितियों आदि द्वारा दिया गया ऋण।

8.2 कृषि साख के प्रकार

अवधारणा

8.2 कृषि साख के प्रकार

कृषि साख को समयावधि, उद्देश्य और स्रोत के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। समयावधि के आधार पर कृषि साख को अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक साख में विभाजित किया जाता है। उद्देश्य के अनुसार उत्पादन साख, विपणन साख, उपभोग साख आदि होते हैं। स्रोत के आधार पर संस्थागत (बैंक, सहकारी समिति, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक) और गैर-संस्थागत (साहूकार, महाजन, रिश्तेदार) साख होते हैं। प्रत्येक प्रकार के साख की विशेषताएँ, आवश्यकता, और पुनर्भुगतान की शर्तें भिन्न होती हैं।

  • अल्पकालिक साख: 15 माह तक की अवधि के लिए, बीज, खाद, मजदूरी हेतु।
  • मध्यकालिक साख: 15 माह से 5 वर्ष तक, कृषि यंत्र, सिंचाई हेतु।
  • दीर्घकालिक साख: 5 वर्ष से अधिक, भूमि सुधार, ट्रैक्टर, कुआँ आदि हेतु।
  • उद्देश्य के अनुसार साख: उत्पादन, विपणन, उपभोग आदि।
  • स्रोत के आधार पर साख: संस्थागत और गैर-संस्थागत।
  • 📌 अल्पकालिक साख: 15 माह तक के लिए ऋण।
  • 📌 मध्यकालिक साख: 15 माह से 5 वर्ष तक का ऋण।
  • 📌 दीर्घकालिक साख: 5 वर्ष से अधिक अवधि का ऋण।

8.3 कृषि साख के स्रोत

व्याख्या

8.3 कृषि साख के स्रोत

कृषि साख के स्रोतों को दो भागों में बाँटा गया है: संस्थागत और गैर-संस्थागत। संस्थागत स्रोतों में सहकारी समितियाँ, वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, और नाबार्ड जैसी संस्थाएँ शामिल हैं। गैर-संस्थागत स्रोतों में साहूकार, महाजन, व्यापारी, रिश्तेदार