Ch 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 17Chapter 3

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 प्रस्तावना

व्याख्या

3.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में भारत की जनसंख्या एवं मानव विकास के सूचकांक (HDI) के महत्व का परिचय दिया गया है। भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, जिसकी सामाजिक-आर्थिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है। जनसंख्या के आकार, उसकी वृद्धि दर, संरचना, वितरण एवं गुणवत्ता का देश के आर्थिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मानव विकास का सूचकांक यह दर्शाता है कि किसी देश के नागरिकों का जीवन स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा और आय स्तर किस स्थिति में है। इस अध्याय में हम भारत की जनसंख्या की प्रवृत्तियों, उसके कारणों, परिणामों तथा मानव विकास के सूचकांकों का विश्लेषण करेंगे। साथ ही, यह भी समझेंगे कि जनसंख्या की संरचना और मानव विकास के बीच किस प्रकार का संबंध है।

  • भारत की जनसंख्या विश्व में दूसरे स्थान पर है।
  • जनसंख्या वृद्धि दर आर्थिक विकास को प्रभावित करती है।
  • मानव विकास सूचकांक (HDI) जीवन स्तर, शिक्षा और स्वास्थ्य के आधार पर मापा जाता है।
  • जनसंख्या की गुणवत्ता, संरचना और वितरण का विकास पर प्रभाव पड़ता है।
  • HDI के माध्यम से देशों की तुलना की जाती है।
  • 📌 जनसंख्या: किसी क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों की कुल संख्या।
  • 📌 मानव विकास सूचकांक (HDI): जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर मानव विकास का माप।

3.2 भारत की जनसंख्या का आकार और वृद्धि दर

व्याख्या

3.2 भारत की जनसंख्या का आकार और वृद्धि दर

इस अनुभाग में भारत की जनसंख्या के आकार, उसकी ऐतिहासिक वृद्धि दर और उसके कारणों का विश्लेषण किया गया है। भारत की जनसंख्या में समय के साथ तीव्र वृद्धि हुई है। 1901 में भारत की जनसंख्या लगभग 23.8 करोड़ थी, जो 2011 में बढ़कर 121 करोड़ हो गई। जनसंख्या वृद्धि दर का अर्थ है, किसी निश्चित अवधि में जनसंख्या में प्रतिशत वृद्धि। भारत में 1951 के बाद से जनसंख्या वृद्धि दर में तीव्रता आई, जिसे जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) कहा जाता है। इसके मुख्य कारणों में मृत्यु दर में गिरावट, चिकित्सा सुविधाओं में सुधार, जीवन प्रत्याशा में वृद्धि आदि शामिल हैं।

  • 1901 से 2011 तक भारत की जनसंख्या में पाँच गुना वृद्धि हुई।
  • जनसंख्या वृद्धि दर 1951-1981 के बीच सबसे अधिक थी।
  • मृत्यु दर में गिरावट के कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई।
  • जनसंख्या विस्फोट के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ा।
  • जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाए गए।
  • 📌 जनसंख्या विस्फोट: अल्प समय में जनसंख्या की अत्यधिक वृद्धि।
  • 📌 मृत्यु दर: प्रति 1000 जनसंख्या पर मरने वालों की संख्या।

3.3 जनसंख्या का वितरण और घनत्व

व्याख्या

3.3 जनसंख्या का वितरण और घनत्व

इस अनुभाग में भारत में जनसंख्या के वितरण और घनत्व का विश्लेषण किया गया है। जनसंख्या वितरण का अर्थ है, देश के विभिन्न भागों में लोगों की उपस्थिति। भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है – कुछ राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि अ