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Chapter 7

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 7अध्याय 11 / 17Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

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7.1 राष्ट्रीय आय की अवधारणा

अवधारणा

7.1 राष्ट्रीय आय की अवधारणा

राष्ट्रीय आय एक देश की आर्थिक प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है। यह वह कुल मूल्य है जो एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में देश के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का होता है। राष्ट्रीय आय की अवधारणा का विकास आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इससे देश की समग्र आर्थिक स्थिति का आकलन किया जा सकता है। राष्ट्रीय आय की गणना विभिन्न विधियों से की जाती है, जिनमें उत्पादन विधि, आय विधि और व्यय विधि प्रमुख हैं। राष्ट्रीय आय की अवधारणा में कुछ प्रमुख बातें शामिल हैं: (1) केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़ा जाता है, जिससे दोहराव से बचा जा सके; (2) इसमें केवल घरेलू उत्पादन शामिल होता है; (3) इसमें केवल एक निश्चित अवधि का उत्पादन शामिल होता है। राष्ट्रीय आय की गणना के लिए कुछ शर्तें होती हैं, जैसे कि वस्तु या सेवा का बाजार मूल्य होना चाहिए, वह उत्पादन देश की सीमा के भीतर हुआ हो, और वह एक निश्चित अवधि में हुआ हो।

  • राष्ट्रीय आय देश की आर्थिक स्थिति का सूचक है।
  • केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य जोड़ा जाता है।
  • राष्ट्रीय आय की गणना के लिए तीन प्रमुख विधियाँ हैं।
  • राष्ट्रीय आय एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के लिए मापी जाती है।
  • राष्ट्रीय आय में केवल घरेलू उत्पादन शामिल होता है।
  • 📌 राष्ट्रीय आय: एक देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य।
  • 📌 अंतिम वस्तुएँ: वे वस्तुएँ जो उपभोग या पूंजी निर्माण के लिए तैयार होती हैं।

7.2 राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक

व्याख्या

7.2 राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक

राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक वे तत्व हैं जो देश की कुल आय में योगदान करते हैं। इनमें मुख्यतः मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ शामिल हैं। मजदूरी वह आय है जो श्रमिकों को उनके श्रम के बदले मिलती है। किराया वह आय है जो भूमि या संपत्ति के मालिकों को मिलती है। ब्याज वह आय है जो पूंजी के उपयोग के लिए मिलती है। लाभ वह आय है जो उद्यमियों को उनके जोखिम उठाने के लिए मिलती है। इन सभी घटकों का योग राष्ट्रीय आय बनाता है। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष कर और सब्सिडी को भी ध्यान में रखा जाता है। अप्रत्यक्ष करों को जोड़कर और सब्सिडी को घटाकर राष्ट्रीय आय की सही गणना की जाती है।

  • राष्ट्रीय आय के चार प्रमुख घटक हैं: मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ।
  • मजदूरी श्रमिकों को श्रम के बदले मिलती है।
  • किराया भूमि या संपत्ति के मालिकों को मिलता है।
  • ब्याज पूंजी के उपयोग के लिए मिलता है।
  • लाभ उद्यमियों को जोखिम उठाने के लिए मिलता है।
  • 📌 मजदूरी: श्रमिकों को श्रम के बदले मिलने वाली आय।
  • 📌 किराया: भूमि या संपत्ति के मालिकों को मिलने वाली आय।
  • 📌 ब्याज: पूंजी के उपयोग के लिए मिलने वाली आय।

7.3 राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ

व्याख्या

7.3 राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ

राष्ट्रीय आय की गणना के लिए मुख्यतः तीन विधियाँ अपनाई जाती हैं: उत्पादन विधि, आय विधि और व्यय विधि। उत्पादन विधि में देश के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का योग किया जाता है। आय विधि में देश के सभी निवासियों द्वारा अर