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Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Macro Economics (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 15Chapter 8

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 कीन्स का उपभोग फलन: प्रस्तावना

व्याख्या

6.1 कीन्स का उपभोग फलन: प्रस्तावना

इस अनुभाग में कीन्स के उपभोग फलन की अवधारणा का परिचय दिया गया है। कीन्स ने उपभोग फलन को राष्ट्रीय आय के साथ उपभोग व्यय के संबंध के रूप में परिभाषित किया। यह फलन बताता है कि किसी अर्थव्यवस्था में कुल उपभोग व्यय किस प्रकार आय के स्तर पर निर्भर करता है। कीन्स के अनुसार, उपभोग और आय के बीच सीधा संबंध होता है, लेकिन यह संबंध पूर्णतः आनुपातिक नहीं होता। जैसे-जैसे आय बढ़ती है, उपभोग भी बढ़ता है, परंतु उपभोग में वृद्धि आय की वृद्धि से कम होती है। कीन्स ने यह भी बताया कि उपभोग फलन अल्पकाल में स्थिर रहता है, जबकि दीर्घकाल में इसमें परिवर्तन संभव है। इस प्रस्तावना में उपभोग फलन के महत्व, इसकी व्याख्या और अर्थशास्त्र में इसकी भूमिका को स्पष्ट किया गया है।

  • कीन्स के अनुसार उपभोग और आय के बीच सीधा संबंध है।
  • उपभोग फलन राष्ट्रीय आय के साथ उपभोग व्यय के संबंध को दर्शाता है।
  • आय में वृद्धि होने पर उपभोग भी बढ़ता है, परंतु कम दर से।
  • उपभोग फलन अल्पकाल में स्थिर रहता है।
  • यह अर्थव्यवस्था के समष्टि स्तर पर मांग का निर्धारण करता है।
  • 📌 उपभोग फलन: आय और उपभोग के बीच गणितीय संबंध।
  • 📌 राष्ट्रीय आय: किसी देश में एक वर्ष में उत्पन्न कुल वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य।

6.2 उपभोग फलन का गणितीय स्वरूप

सूत्र

6.2 उपभोग फलन का गणितीय स्वरूप

इस अनुभाग में उपभोग फलन के गणितीय स्वरूप को विस्तार से समझाया गया है। कीन्स ने उपभोग फलन को निम्नलिखित रूप में प्रस्तुत किया: C = a + bY, जहाँ C उपभोग व्यय, a स्वायत्त उपभोग (वह उपभोग जो शून्य आय पर भी होता है), b सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC), और Y आय है। यह समीकरण दर्शाता है कि उपभोग दो भागों में बाँटा जा सकता है: एक वह भाग जो आय पर निर्भर नहीं करता (a), और दूसरा वह भाग जो आय के साथ बदलता है (bY)। यहाँ b का मान 0 और 1 के बीच होता है।

  • C = a + bY उपभोग फलन का सामान्य रूप है।
  • a = स्वायत्त उपभोग, b = सीमांत उपभोग प्रवृत्ति।
  • b का मान 0 < b < 1 होता है।
  • a वह उपभोग है जो बिना आय के भी होता है।
  • bY वह उपभोग है जो आय के साथ बदलता है।
  • 📌 स्वायत्त उपभोग (a): वह उपभोग जो आय शून्य होने पर भी किया जाता है।
  • 📌 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (b या MPC): आय में एक इकाई वृद्धि होने पर उपभोग में होने वाली वृद्धि।

6.3 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) और औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC)

अवधारणा

6.3 सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) और औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC)

इस अनुभाग में सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) और औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC) की अवधारणाओं को विस्तार से समझाया गया है। MPC वह अनुपात है, जिससे आय में एक इकाई वृद्धि होने पर उपभोग में कितनी वृद्धि होती है। इसे निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जाता है: MPC