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Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Macro Economics (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 15Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

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2.1 राष्ट्रीय आय की अवधारणा

अवधारणा

2.1 राष्ट्रीय आय की अवधारणा

राष्ट्रीय आय का अर्थ है किसी देश में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग। यह देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख संकेतक है। राष्ट्रीय आय की गणना केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के लिए की जाती है, जिससे दोहरी गणना की समस्या नहीं आती। इसमें कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र आदि सभी क्षेत्रों का योगदान शामिल होता है। राष्ट्रीय आय की अवधारणा को समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह देश की समग्र आर्थिक स्थिति, जीवन स्तर, विकास दर, तथा नीति निर्माण के लिए आधार प्रदान करती है।

  • राष्ट्रीय आय देश की आर्थिक प्रगति का संकेतक है।
  • यह एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का योग है।
  • केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया जाता है।
  • राष्ट्रीय आय से जीवन स्तर और विकास दर का आकलन किया जाता है।
  • नीति निर्माण में राष्ट्रीय आय के आँकड़े महत्वपूर्ण होते हैं।
  • 📌 राष्ट्रीय आय: एक निश्चित अवधि में देश में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य।
  • 📌 अंतिम वस्तुएँ: वे वस्तुएँ जिन्हें उपभोक्ता द्वारा अंतिम रूप से उपयोग किया जाता है।

2.2 राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक

व्याख्या

2.2 राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक

राष्ट्रीय आय के प्रमुख घटक वे तत्व हैं, जिनसे मिलकर राष्ट्रीय आय का निर्माण होता है। इसमें मुख्यतः उपभोग व्यय, निवेश व्यय, सरकारी व्यय, और शुद्ध निर्यात (निर्यात - आयात) शामिल होते हैं। उपभोग व्यय में घरेलू परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर किया गया खर्च आता है। निवेश व्यय में पूंजीगत वस्तुओं की खरीद, जैसे मशीनरी, भवन आदि शामिल हैं। सरकारी व्यय में सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं, आधारभूत संरचना आदि पर किया गया खर्च आता है। शुद्ध निर्यात में देश के निर्यात और आयात का अंतर शामिल किया जाता है। इन सभी घटकों को जोड़कर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) प्राप्त होता है, जो राष्ट्रीय आय का एक प्रमुख संकेतक है।

  • राष्ट्रीय आय के चार प्रमुख घटक होते हैं: उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय, शुद्ध निर्यात।
  • उपभोग व्यय घरेलू परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च होता है।
  • निवेश व्यय में पूंजीगत वस्तुओं की खरीद शामिल है।
  • सरकारी व्यय में सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च आता है।
  • शुद्ध निर्यात = निर्यात - आयात।
  • 📌 उपभोग व्यय: घरेलू परिवारों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च।
  • 📌 निवेश व्यय: पूंजीगत वस्तुओं की खरीद पर खर्च।
  • 📌 सरकारी व्यय: सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च।

2.3 राष्ट्रीय आय के मापन की विधियाँ

व्याख्या

2.3 राष्ट्रीय आय के मापन की विधियाँ

राष्ट्रीय आय के मापन के लिए मुख्यतः तीन विधियाँ अपनाई जाती हैं: उत्पाद विधि, आय विधि, और व्यय विधि। उत्पाद विधि में देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का योग किया जाता है। आय विधि में सभी उत्पादन कारकों (मजदूरी, ब्याज,