Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला
व्याख्यामंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला
भारत में मंदिर स्थापत्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। मंदिरों का निर्माण देवी-देवताओं की पूजा के लिए किया जाता था और वे धार्मिक क्रियाओं के केंद्र थे। प्रारंभ में मंदिरों का स्वरूप सरल था, परन्तु कालांतर में वे सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के रूप में विकसित हुए। दसवीं शताब्दी तक मंदिरों की भूमिका भू-प्रशासन में भी महत्वपूर्ण हो गई थी। मंदिरों में अर्द्धमंडप, महामंडप, नाट्य मंडप जैसे विभिन्न मंडप जोड़े गए। मंदिरों को संबंधित देवताओं की मूर्तियों से सजाया जाता था और पुराणों की कथाएँ मंदिरों की मूर्तिकला का हिस्सा बनीं। पूजा गृह तीन प्रकार के होते हैं: संधर किस्म (प्रदक्षिणा पथ सहित), निरंधर किस्म (प्रदक्षिणा पथ बिना), और सर्वतोभद्र (सभी दिशाओं से प्रवेश)। भारत में मंदिरों के लिए विभिन्न नाम प्रचलित हैं जैसे देवालय, देवकुल, कोबिल, देवल आदि।
- मंदिरों का निर्माण पूजा और धार्मिक क्रियाओं के लिए हुआ।
- मंदिरों में विभिन्न मंडप जोड़े गए जैसे अर्द्धमंडप, महामंडप।
- पूजा गृह के तीन प्रकार होते हैं: संधर, निरंधर, सर्वतोभद्र।
- मंदिरों को देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजाया जाता था।
- दसवीं शताब्दी तक मंदिरों की सामाजिक और प्रशासनिक भूमिका बढ़ी।
- 📌 मंदिर: पूजा स्थल जहाँ देवी-देवताओं की पूजा की जाती है।
- 📌 मंडप: मंदिर का वह कक्ष जहाँ भक्तगण इकट्ठा होते हैं।
- 📌 गर्भगृह: मंदिर का वह भाग जहाँ मुख्य देवता की मूर्ति स्थापित होती है।
हिन्दू मंदिर का मूल रूप
व्याख्याहिन्दू मंदिर का मूल रूप
हिन्दू मंदिर मुख्यतः चार भागों से निर्मित होता है: गर्भगृह, मंडप, शिखर (विमान) और वाहन। गर्भगृह मंदिर का सबसे पवित्र भाग होता है जहाँ मुख्य देवता की मूर्ति स्थापित होती है। प्रारंभिक मंदिरों में गर्भगृह छोटा होता था, परन्तु समय के साथ इसका आकार बढ़ा। मंडप मंदिर का प्रवेश कक्ष होता है जो भक्तों के लिए बड़ा होता है और इसकी छत खंभों पर टिकी होती है। उत्तर भारत में शिखर को शिखर कहा जाता है जबकि दक्षिण भारत में विमान। वाहन देवता की सवारी होती है जो गर्भगृह के पास स्तंभ या ध्वज के साथ स्थापित होती है। भारत में मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं: नागर (उत्तर भारत), द्रविड़ (दक्षिण भारत), और वेसर (मिश्रित शैली)। मंदिरों की योजना में समय के साथ जटिलता आई और विभिन्न प्रकार के आले-दिवाल जोड़े गए।
- गर्भगृह में मुख्य देवता की मूर्ति स्थापित होती है।
- मंडप भक्तों के लिए बड़ा कक्ष होता है।
- उत्तर भारत में शिखर, दक्षिण भारत में विमान कहा जाता है।
- वाहन देवता की सवारी के रूप में गर्भगृह के पास स्थापित होता है।
- मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ: नागर, द्रविड़, वेसर।
- 📌 गर्भगृह: मंदिर का पवित्र कक्ष जहाँ देवता की मूर्ति होती है।
- 📌 मंडप: मंदिर का प्रवेश कक्ष।
- 📌 शिखर/विमान: मंदिर का ऊपरी गुंबदाकार भाग।
नागर या उत्तर भारतीय मंदिर शैली
व्याख्यानागर या उत्तर भारतीय मंदिर शैली
उत्तर भारत में मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैली नागर शैली है। इस शैली में मंदिर एक विशाल वेदी (चबूतरे) पर बना होता है, जिसके लिए सीढ़ियाँ होती हैं। नागर मंदिरों में चहारदीवारी नहीं होती। मंदिर का शिखर गोलाकार और ऊपर की ओर बढ़ता हुआ होता है, जिसे रेखा-प्
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. भारत में मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैलियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं: (1) नागर शैली: यह शैली उत्तर भारत में प्रचलित है। इसमें मंदिरों के शिखर ऊँचे और सीधें होते हैं। नागर शैली के मंदिर मुख्यतः नगरों में बनाए जाते थे। (2) द्रविड़ शैली: यह दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसमें मंदिरों का प्रांगण विशाल होता है, भव्य प्रवेश द्वार (गोपुरम) और स्तूपाकार शिखर (विमान) होते हैं। (3) वेसरा शैली: यह मध्य भारत में विकसित मिश्रित शैली है, जिसमें नागर और द्रविड़ दोनों शैलियों के तत्व सम्मिलित होते हैं। वेसरा शैली के मंदिरों में ऊँचे शिखर और विस्तृत प्रांगण दोनों मिलते हैं। इन शैलियों के मंदिरों में स्थापत्य, मूर्तिकला और सजावट की विशेषता होती है।
व्याख्या:
उत्तर में तीनों शैलियों का नाम, क्षेत्र, विशेषता और उनकी स्थापत्य संबंधी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।
Q2.2. नागर, द्रविड़ और वेसरा शैलियों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नागर, द्रविड़ और वेसरा शैलियों में निम्नलिखित अंतर हैं: (1) नागर शैली: उत्तर भारत में प्रचलित। शिखर ऊँचे और सीधें होते हैं। उदाहरण: काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), लक्ष्मण मंदिर (खजुराहो)। (2) द्रविड़ शैली: दक्षिण भारत में प्रचलित। विशाल प्रांगण, गोपुरम (प्रवेश द्वार), स्तूपाकार शिखर। उदाहरण: बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), मीनाक्षी मंदिर (मदुरै)। (3) वेसरा शैली: मध्य भारत में विकसित मिश्रित शैली। नागर और द्रविड़ दोनों के तत्व। उदाहरण: होयसलेश्वर मंदिर (हलिबीड), कदंबा मंदिर (कर्नाटक)। इन शैलियों में स्थापत्य, शिखर की बनावट, प्रवेश द्वार, और मूर्तिकला में अंतर होता है।
व्याख्या:
उत्तर में तीनों शैलियों का क्षेत्र, विशेषता, और उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट किया गया है।
Q3.3. मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में कौन-कौन से विषय दर्शाए जाते हैं?
उत्तर:
मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, प्राकृतिक दृश्य, जीव-जंतु, मानव आकृतियाँ, और सामाजिक गतिविधियाँ दर्शाई जाती हैं। मंदिरों की दीवारों, स्तंभों, शिखरों और मंडपों पर ये विषय उकेरे जाते हैं।
व्याख्या:
उत्तर में मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में प्रयुक्त विषयों का उल्लेख किया गया है।
Q4.4. मंदिर स्थापत्य का सामाजिक और धार्मिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मंदिर स्थापत्य का सामाजिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। धार्मिक दृष्टि से मंदिर आस्था का केंद्र होते हैं, जहाँ पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव होते हैं। सामाजिक दृष्टि से मंदिर समाज को एकजुट करते हैं, सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र होते हैं, और कला, संगीत, नृत्य आदि का संरक्षण करते हैं। मंदिरों के निर्माण से समाज में एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलात्मक विकास होता है।
व्याख्या:
उत्तर में मंदिर स्थापत्य के सामाजिक और धार्मिक महत्व का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
Q5.5. भारत में मंदिर स्थापत्य की विरासत के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
भारत में मंदिर स्थापत्य की विरासत के संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक धरोहर भी हैं। प्राकृतिक प्रभाव, पर्यावरणीय परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप से इनकी संरचना को खतरा है। संरक्षण से आने वाली पीढ़ियाँ इस विरासत से परिचित हो सकेंगी और भारतीय संस्कृति का गौरव बना रहेगा।
व्याख्या:
उत्तर में संरक्षण की आवश्यकता के कारणों का उल्लेख किया गया है।
Q6.1. अध्याय में बताए गए स्थानों को मानचित्र में चिन्हित करें।
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए छात्र को अध्याय में वर्णित सभी मंदिर स्थापत्य के प्रमुख स्थानों को पहचानकर भारत के मानचित्र पर सही स्थानों को चिन्हित करना होगा। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत के मंदिर जैसे खजुराहो, काशी, और दक्षिण भारत के मंदिर जैसे तंजावुर, मदुरै आदि को मानचित्र पर सही स्थान पर चिह्नित करें।
व्याख्या:
अध्याय में वर्णित मंदिरों के भौगोलिक स्थानों को समझना और उन्हें मानचित्र पर सही ढंग से चिन्हित करना आवश्यक है। इससे छात्र को भारत में मंदिर स्थापत्य के फैलाव का भौगोलिक ज्ञान प्राप्त होता है।
Q7.2. उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय मंदिरों की प्रमुख विशेषताओं या लक्षणों का वर्णन करें।
उत्तर:
उत्तर भारतीय मंदिरों की प्रमुख विशेषताएँ: - शिखर (टावर) आमतौर पर ऊँचा और खंभों के साथ सजाया हुआ होता है। - गर्भगृह के ऊपर एक प्रमुख शिखर होता है जिसे 'शिखर' या 'नागर शैली' कहा जाता है। - मंदिर का आधार चौकोर होता है। - उदाहरण: खजुराहो के मंदिर। दक्षिण भारतीय मंदिरों की प्रमुख विशेषताएँ: - मंदिरों में विशाल प्रांगण और गुम्बद जैसे संरचनाएँ होती हैं। - वेल्लुम (गोपुरम) मंदिर के प्रवेश द्वार के ऊपर ऊँचा और सजावटी टावर होता है। - मंदिर की शैली को 'द्रविड़ शैली' कहा जाता है। - उदाहरण: तंजावुर का ब्रहदेश्वर मंदिर।
व्याख्या:
उत्तर और दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य की भिन्न-भिन्न शैली और संरचना को समझना आवश्यक है। उत्तर भारतीय मंदिरों में शिखर की ऊँचाई और सजावट पर जोर होता है, जबकि दक्षिण भारतीय मंदिरों में विशाल प्रांगण और गुम्बद जैसे गोपुरम होते हैं।
Q8.3. दक्षिण भारत में मंदिर स्थापत्य/वास्तुकला और मूर्तिकला के विकास के बारे में लिखें।
उत्तर:
दक्षिण भारत में मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला का विकास मुख्य रूप से चोल, पांड्य, और विजयनगर साम्राज्यों के दौरान हुआ। - चोल वंश के दौरान मंदिरों का निर्माण भव्य और विस्तृत हुआ, जैसे तंजावुर का ब्रहदेश्वर मंदिर। - वास्तुकला में विशाल प्रांगण, गोपुरम, और विस्तृत मूर्तिकला शामिल थी। - मूर्तिकला में भगवान शिव, विष्णु, देवी-देवताओं की जटिल और सुंदर मूर्तियाँ बनाईं गईं। - मंदिरों में पत्थर की नक्काशी और चित्रांकन कला का विकास हुआ। - विजयनगर काल में मंदिरों में और अधिक सजावट और विस्तार हुआ।
व्याख्या:
दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य का विकास विभिन्न राजवंशों के संरक्षण और प्रोत्साहन से हुआ। मूर्तिकला में धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को दर्शाया गया। यह विकास मंदिरों को न केवल धार्मिक केंद्र बनाता था, बल्कि कला और संस्कृति के केंद्र भी बनाता था।
Bhartiya Kala ka parichay के सभी 8 अध्याय
Fine Art · Class 11