Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
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सिंधु घाटी की कलाएँ
व्याख्यासिंधु घाटी की कलाएँ
सिंधु घाटी सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन और सुव्यवस्थित नगर सभ्यता थी, जिसका विकास ईसा-पूर्व तीसरी सहस्राब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। इस सभ्यता के विभिन्न पुरास्थलों से प्राप्त कला के रूपों में प्रतिमाएँ, मुद्राएँ, मिट्टी के बर्तन, आभूषण, पकी हुई मिट्टी की मूर्तियाँ आदि शामिल हैं। इन कलाकृतियों से पता चलता है कि उस समय के कलाकारों में उच्च कोटि की कलात्मक सूझ-बूझ और कल्पनाशक्ति विद्यमान थी। सिंधु घाटी के दो प्रमुख नगर हड़प्पा और मोहनजोदड़ो थे, जो सिंधु नदी के किनारे बसे थे। ये नगर अपने सुव्यवस्थित नगर नियोजन के लिए प्रसिद्ध थे, जिनमें मकान, बाजार, भंडारघर, कार्यालय, सार्वजनिक स्नानागार आदि व्यवस्थित रूप से बनाए गए थे। इन नगरों में जल निकासी की व्यवस्था भी अत्यंत विकसित थी। इसके अतिरिक्त गुजरात के लोथल और धौलावीरा, हरियाणा का राखीगढ़ी, पंजाब का रोपड़ और राजस्थान का कालीबंगा भी महत्वपूर्ण पुरास्थल हैं जहाँ से कला-संबंधी वस्तुएं मिली हैं। सिंधु घाटी की कलाएँ न केवल तकनीकी रूप से उन्नत थीं, बल्कि उनमें जीवन के विविध पक्षों का चित्रण भी मिलता है। मानव और पशु मूर्तियों में अंगों की बनावट अत्यंत स्वाभाविक है, जो कलाकारों की सूक्ष्म अवलोकन क्षमता को दर्शाती है। इस सभ्यता की कलाकृतियाँ हमें तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन की झलक प्रदान करती हैं।
- सिंधु घाटी सभ्यता ईसा-पूर्व तीसरी सहस्राब्दी के उत्तरार्ध में विकसित हुई।
- हड़प्पा और मोहनजोदड़ो प्रमुख नगर थे जो सिंधु नदी के किनारे बसे थे।
- नगर नियोजन और जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत विकसित थी।
- कलाकृतियाँ उच्च कोटि की और स्वाभाविक थीं।
- लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, रोपड़, कालीबंगा जैसे अन्य पुरास्थल भी महत्वपूर्ण हैं।
- 📌 सिंधु घाटी सभ्यता: भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन नगर सभ्यता।
- 📌 नगर नियोजन: नगर के विभिन्न भागों का सुव्यवस्थित निर्माण।
- 📌 पुरास्थल: प्राचीन काल के अवशेषों वाली जगह।
पत्थर की मूर्तियाँ
व्याख्यापत्थर की मूर्तियाँ
सिंधु घाटी के प्रमुख स्थलों हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त पत्थर की मूर्तियाँ संख्या में कम हैं, लेकिन कलात्मक दृष्टि से अत्यंत उच्च कोटि की हैं। ये मूर्तियाँ त्रि-आयामी होती हैं और मानव तथा पशु रूपों का सजीव चित्रण करती हैं। इन मूर्तियों में दो पुरुष प्रतिमाएँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। पहली लाल चूना पत्थर से बनी पुरुष धड़ की मूर्ति है, जिसमें सिर और भुजाओं को जोड़ने के लिए गर्दन और कंधों में गड्ढे बने हुए हैं। दूसरी मूर्ति दाड़ी वाले पुरुष की आवक्ष (छाती) मूर्ति है, जो सेलखड़ी पत्थर की बनी है। इस दाड़ी वाले पुरुष को एक धार्मिक व्यक्ति माना जाता है। मूर्ति में शॉल बाएं कंधे के ऊपर से और दाहिनी भुजा के नीचे से डाली गई है, जो त्रिफुलिया नमूनों से सजी हुई है। आँखें कुछ लंबी और आधी बंद दिखाई गई हैं, जो ध्यानावस्था को दर्शाती हैं। नाक सुंदर और होंठ कुछ आगे निकले हुए हैं। दाड़ी-मूँछ और गलमुच्छ चेहरे पर उभरी हुई हैं। कान सीप जैसे हैं जिनमें छेद हैं, बालों को बीच की मांग से दो हिस्सों में बाँटा गया है और सिर के चारों ओर एक सादा फीता बंधा हुआ है। दाहिनी भुजा पर बाजूबंद है और गर्दन के चारों ओर छोटे-छोटे छेद हैं, जो हार पहनने का संकेत देते हैं। यह मूर्ति सिंधु घाटी की मूर्तिकला कला की सूक्ष्मता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
- पत्थर की मूर्तियाँ संख्या में कम लेकिन कलात्मक रूप से उच्च कोटि की हैं।
- दो प्रसिद्ध मूर्तियाँ हैं: पुरुष धड़ और दाड़ी वाले पुरुष की आवक्ष मूर्ति।
- दाड़ी वाले पुरुष को धार्मिक व्यक्ति माना जाता है।
- मूर्ति में शॉल, बाजूबंद, हार आदि आभूषण दिखाए गए हैं।
- मूर्ति में ध्यानावस्था और सूक्ष्म शारीरिक विवरण स्पष्ट हैं।
- 📌 आवक्ष मूर्ति: छाती तक की बनी मूर्ति।
- 📌 त्रि-आयामी मूर्ति: तीन आयामों वाली मूर्ति।
- 📌 शॉल: वस्त्र का एक प्रकार जो कंधों पर ओढ़ा जाता है।
कांसे की ढलाई
व्याख्याकांसे की ढलाई
सिंधु घाटी के लोग कांसे की ढलाई में प्रवीण थे। कांसे की मूर्तियाँ मोम ढलाई (लॉस्ट वैक्स कास्टिंग) तकनीक द्वारा बनाई जाती थीं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मोम की मूर्ति बनाई जाती थी, जिसे चिकनी मिट्टी से पूरी तरह ढक दिया जाता था। जब यह सूख जाती थी, तो
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. सिंधु सभ्यता के लोग कला-प्रेमी थे, इस कथन को न्यायोचित ठहराएं।
उत्तर:
सिंधु सभ्यता के लोग कला-प्रेमी थे क्योंकि उनके द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ अत्यंत सुंदर, सूक्ष्म और विविध प्रकार की थीं। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त मूर्तियाँ, जैसे नर्तकी की कांस्य प्रतिमा, वृषभ की मूर्ति, पुरुष धड़, चित्रित मूर्दभांड आदि, यह दर्शाती हैं कि वे न केवल कलात्मक कौशल में निपुण थे बल्कि उनकी कला में भावाभिव्यक्ति, शारीरिक ऊर्जा और सूक्ष्मता भी थी। उनकी मूर्तियाँ नृत्य, पशु, मानव आकृतियों और ज्यामितीय चित्रों से भरी हुई हैं, जो उनकी जीवन शैली, धार्मिक विश्वास और सामाजिक व्यवस्था को समझने में मदद करती हैं। इस प्रकार, उनकी कलाकृतियाँ यह साबित करती हैं कि वे कला-प्रेमी थे।
व्याख्या:
सिंधु घाटी की कलाकृतियाँ जैसे नर्तकी की मूर्ति, वृषभ प्रतिमा, चित्रित मूर्दभांड आदि से पता चलता है कि वे कला के प्रति गहरी रुचि रखते थे। मूर्तियों की सूक्ष्मता, भावाभिव्यक्ति और शारीरिक मुद्रा यह दर्शाती है कि वे कला को न केवल सजावट के लिए बल्कि सामाजिक और धार्मिक अभिव्यक्ति के लिए भी महत्व देते थे।
Q2.2. हड़प्पाई मूण्मूर्ति कला और आज प्रचलित मूण्मूर्ति कला में आप क्या समानताएं और भिन्नताएं पाते हैं?
उत्तर:
समानताएं: - दोनों में मानव और पशु आकृतियों का चित्रण होता है। - मूर्तियों में भावाभिव्यक्ति और शारीरिक मुद्रा का महत्व होता है। - दोनों में कलात्मक कौशल और सूक्ष्मता दिखाई देती है। भिन्नताएं: - हड़प्पाई मूर्तियाँ प्राचीन काल की हैं और उनमें प्राकृतिक रूपों की सरलता और अमूर्तिकरण की प्रवृत्ति होती है, जबकि आज की मूर्तियाँ अधिक यथार्थवादी और विस्तृत होती हैं। - हड़प्पाई मूर्तियाँ मुख्यतः कांस्य, पत्थर और मिट्टी से बनी होती थीं, जबकि आज विभिन्न सामग्रियों जैसे प्लास्टिक, धातु, संगमरमर आदि से मूर्तियाँ बनती हैं। - हड़प्पाई मूर्तियों में धार्मिक और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है, जबकि आज की मूर्तियाँ विभिन्न विषयों पर आधारित होती हैं।
व्याख्या:
हड़प्पाई मूर्तियाँ प्राचीन सभ्यता की सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्ति हैं, जो सरल और प्रतीकात्मक होती हैं। आज की मूर्तियाँ तकनीकी उन्नति के कारण अधिक यथार्थवादी और विस्तृत होती हैं। दोनों में कला की भावना समान है, पर शैली और सामग्री में अंतर है।
Q3.3. मुद्राएं भिन्न-भिन्न प्रकार की सामग्रियों से बनाई जाती थीं। सिंधु घाटी की मुद्राओं के संदर्भ को ध्यान में रखते हुए क्या आप किसी अन्य सामग्री से मुद्रा बनाना चाहेंगे? वे कौन-से पशु हैं जिनकी आकृतियाँ आप अपनी मुद्राओं पर बनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर:
सिंधु घाटी की मुद्राएँ मुख्यतः पत्थर, धातु और मिट्टी से बनी होती थीं। यदि मुझे मुद्राएँ बनानी हों तो मैं लकड़ी या कांच जैसी सामग्रियों का उपयोग करना चाहूंगा क्योंकि ये सामग्री सजावट और टिकाऊपन में भिन्नता प्रदान करती हैं। मैं अपनी मुद्राओं पर हाथी, वृषभ (बैल), और मयूर जैसी पशु आकृतियाँ बनाना चाहूंगा क्योंकि ये पशु भारतीय संस्कृति में शक्ति, समृद्धि और सौंदर्य के प्रतीक हैं। हाथी बुद्धिमत्ता और शक्ति का प्रतीक है, वृषभ कृषि और परिश्रम का, और मयूर सौंदर्य और गरिमा का। ये आकृतियाँ मुद्राओं को सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व प्रदान करेंगी।
व्याख्या:
सिंधु घाटी की मुद्राएँ विभिन्न सामग्रियों से बनी थीं, जो उनकी तकनीकी दक्षता को दर्शाती हैं। नई सामग्रियों का उपयोग मुद्राओं को और अधिक आकर्षक और टिकाऊ बना सकता है। पशु आकृतियाँ सांस्कृतिक प्रतीक होती हैं, जो मुद्राओं को अर्थपूर्ण बनाती हैं।
Q4.4. सिंधु सभ्यता से प्राप्त कला संबंधी वस्तुओं से हमें उनके जीवन के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर:
सिंधु सभ्यता से प्राप्त कला संबंधी वस्तुएं जैसे मूर्तियाँ, चित्रित पात्र, और अन्य कलाकृतियाँ उनके सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक जीवन की जानकारी देती हैं। इन वस्तुओं से पता चलता है कि वे नृत्य, पशु पालन, कृषि, और धार्मिक अनुष्ठानों में रुचि रखते थे। मूर्तियों में भावाभिव्यक्ति और शारीरिक मुद्राएँ उनके जीवन के उत्साह और ऊर्जा को दर्शाती हैं। चित्रित पात्रों पर वनस्पति और ज्यामितीय आकृतियाँ उनकी कला में अमूर्तिकरण की प्रवृत्ति को दिखाती हैं। कुल मिलाकर, ये वस्तुएं उनकी सभ्यता की समृद्धि, सांस्कृतिक विविधता और कलात्मक कौशल को दर्शाती हैं।
व्याख्या:
कलाकृतियाँ किसी सभ्यता के जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने का माध्यम होती हैं। सिंधु सभ्यता की कलाकृतियाँ उनके धार्मिक विश्वास, सामाजिक जीवन, और आर्थिक गतिविधियों की झलक प्रस्तुत करती हैं।
Q5.5. कल्पना कीजिए कि आप किसी संग्रहालय में संग्रहालय पाल (क्यूरेटर) के रूप में कार्य कर रहे हैं और आपको सिंधु कला के विषय में एक प्रदर्शनी बनानी है। सिंधु सभ्यता में उत्पादित और प्रयुक्त पत्थर, धातु और मिट्टी की बनी कम-से-कम 10 वस्तुओं के चित्र इकट्ठा करें और प्रदर्शनी बनाएं।
उत्तर:
यह एक क्रियात्मक प्रश्न है जिसमें विद्यार्थी को संग्रहालय पाल के रूप में कार्य करते हुए सिंधु सभ्यता की कला वस्तुओं की प्रदर्शनी बनानी है। इसके लिए वे मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त पत्थर, धातु और मिट्टी की बनी वस्तुओं जैसे नर्तकी की कांस्य प्रतिमा, वृषभ प्रतिमा, पुरुष धड़, चित्रित मूर्दभांड, मातृका की मूर्तियाँ आदि के चित्र इकट्ठा कर सकते हैं। प्रदर्शनी में प्रत्येक वस्तु का विवरण, उसका उपयोग, और उसकी सांस्कृतिक महत्ता भी शामिल करनी चाहिए।
व्याख्या:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को सिंधु सभ्यता की कलाकृतियों के बारे में विस्तार से अध्ययन करने और उन्हें व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करता है। इससे उनकी समझ और प्रस्तुति कौशल दोनों विकसित होते हैं।
Q6.सिंधु घाटी सभ्यता को किस नाम से भी जाना जाता है और इसका विकास कब हुआ था?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता, लगभग 2500 ईसा पूर्व
व्याख्या:
सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है। इसका विकास लगभग 2500 ईसा पूर्व सिंधु नदी के किनारे हुआ था।
Q7.सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगरों में से कौन सा नगर शामिल नहीं है?
उत्तर:
पाटलिपुत्र
व्याख्या:
हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, और लोथल सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगर थे, जबकि पाटलिपुत्र मौर्यकालीन नगर था।
Q8.सिंधु घाटी सभ्यता के नगरों की योजना किस पैटर्न पर आधारित थी?
उत्तर:
ग्रिड पैटर्न / जालीदार योजना
व्याख्या:
सिंधु घाटी सभ्यता के नगर ग्रिड पैटर्न पर बने थे, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
Bhartiya Kala ka parichay के सभी 8 अध्याय
Fine Art · Class 11