Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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3.1 समदूरी स्थित की मूल अवधारणा
अवधारणा3.1 समदूरी स्थित की मूल अवधारणा
समदूरी स्थित (Equidistant Point) का अर्थ है – किसी दिए गए बिंदु या रेखा से समान दूरी पर स्थित बिंदु। संख्यात्मक विश्लेषण एवं सदिश कलन में, समदूरी स्थित की अवधारणा का प्रयोग विभिन्न समस्याओं के हल में किया जाता है, जैसे – दो बिंदुओं के मध्य स्थित बिंदु की स्थिति ज्ञात करना, किसी रेखा के सापेक्ष समदूरी पर स्थित बिंदुओं का निर्धारण, आदि। समदूरी स्थित का उपयोग ज्यामिति, भौतिकी, और अभियांत्रिकी में भी होता है, जहाँ किसी वस्तु या बिंदु को किसी अन्य वस्तु या रेखा से समान दूरी पर रखना आवश्यक होता है। इस अवधारणा का आधार त्रिकोणमिति और सदिश गणित में निहित है, जहाँ दूरी की गणना सदिशों के माध्यम से की जाती है।
- समदूरी स्थित का अर्थ है – समान दूरी पर स्थित बिंदु।
- यह अवधारणा ज्यामिति, भौतिकी, और गणित में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- सदिशों के माध्यम से समदूरी स्थित की गणना की जाती है।
- दो बिंदुओं के मध्य समदूरी स्थित बिंदु को मध्य बिंदु (Midpoint) कहा जाता है।
- रेखा के सापेक्ष समदूरी स्थित बिंदुओं का निर्धारण समदूरी रेखा (Locus) द्वारा किया जाता है।
- 📌 समदूरी स्थित: समान दूरी पर स्थित बिंदु।
- 📌 मध्य बिंदु: दो बिंदुओं के मध्य स्थित बिंदु।
3.2 समदूरी स्थित की गणना
व्याख्या3.2 समदूरी स्थित की गणना
समदूरी स्थित की गणना के लिए गणित में मुख्य रूप से दो विधियाँ प्रयोग की जाती हैं – निर्देशांक ज्यामिति और सदिश विधि। निर्देशांक ज्यामिति में, दो बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात होने पर उनके मध्य बिंदु का निर्देशांक ज्ञात किया जाता है। सदिश विधि में, दोनों बिंदुओं के सदिशों का औसत लेकर मध्य बिंदु प्राप्त किया जाता है। यदि बिंदु A(x₁, y₁) और B(x₂, y₂) हैं, तो उनके मध्य बिंदु M का निर्देशांक ((x₁+x₂)/2, (y₁+y₂)/2) होगा। इसी प्रकार, त्रि-आयामी स्थान में, यदि बिंदु A(x₁, y₁, z₁) और B(x₂, y₂, z₂) हैं, तो मध्य बिंदु M का निर्देशांक ((x₁+x₂)/2, (y₁+y₂)/2, (z₁+z₂)/2) होगा।
- निर्देशांक ज्यामिति में मध्य बिंदु सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
- सदिश विधि में दोनों बिंदुओं के सदिशों का औसत लिया जाता है।
- त्रि-आयामी स्थान में भी यही सूत्र लागू होता है।
- मध्य बिंदु दो बिंदुओं के बीच की सीधी रेखा पर स्थित होता है।
- यह सूत्र गणितीय समस्याओं के हल में अत्यंत उपयोगी है।
- 📌 निर्देशांक ज्यामिति: बिंदुओं की स्थिति को निर्देशांकों द्वारा दर्शाने की विधि।
- 📌 सदिश विधि: गणना में सदिशों का प्रयोग।
3.3 समदूरी स्थित के सदिशीय गुण
अवधारणा3.3 समदूरी स्थित के सदिशीय गुण
सदिश गणित में, समदूरी स्थित के गुण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि दो बिंदुओं A और B के सदिश a और b हैं, तो उनके मध्य बिंदु का सदिश (a + b)/2 होगा। यह गुण सदिशों के योग और गुणनफल के सिद्धांत पर आधारित है। सदिशीय रूप में, समदूरी स्थित का निर्धारण सरल और प्
SLM - Numerical Analysis & Vector Calculus (Hindi) के सभी 18 अध्याय
Numerical Analysis & Vector Calculus · Vardhman Mahaveer Open University
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