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Chapter 1

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Numerical Analysis & Vector Calculus (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 18Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

1.1 प्रस्तावना

व्याख्या

1.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में परिमित अंतर (Finite Differences) की मूलभूत अवधारणा का परिचय दिया गया है। परिमित अंतर संख्यात्मक विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसका उपयोग फलनों के मानों के बीच के अंतर को ज्ञात करने के लिए किया जाता है। जब किसी फलन के मान निश्चित अंतराल (interval) पर ज्ञात होते हैं, तब इन मानों के बीच के अंतर को परिमित अंतर कहते हैं। यह विधि विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब फलन का विश्लेषणात्मक रूप ज्ञात न हो, बल्कि केवल कुछ निश्चित बिंदुओं पर उसके मान ज्ञात हों। परिमित अंतर का उपयोग संख्यात्मक अवकलन, समाकलन, तथा अंतरालों के बीच अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। इस अध्याय में परिमित अंतर की विभिन्न परिभाषाएँ, प्रकार, गुणधर्म, तथा उनके अनुप्रयोगों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा।

  • परिमित अंतर संख्यात्मक विश्लेषण का आधार है।
  • यह फलनों के मानों के बीच के अंतर को मापता है।
  • विश्लेषणात्मक रूप के बिना भी गणना संभव बनाता है।
  • अंतरालों के बीच अनुमान लगाने में सहायक है।
  • संख्यात्मक अवकलन एवं समाकलन में उपयोगी है।
  • 📌 परिमित अंतर: दो समीपवर्ती मानों के बीच का अंतर।
  • 📌 संख्यात्मक विश्लेषण: गणितीय समस्याओं के संख्यात्मक हल का अध्ययन।

1.2 परिमित अंतर की परिभाषा

परिभाषा

1.2 परिमित अंतर की परिभाषा

परिमित अंतर वह अंतर है जो किसी फलन के दो समीपवर्ती मानों के बीच निश्चित अंतराल पर प्राप्त होता है। यदि y = f(x) के मान x = a, a + h, a + 2h, ... पर ज्ञात हैं, तो परिमित अंतर को निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है: यदि h नियत है, तो प्रथम परिमित अंतर: Δy₀ = y₁ - y₀ Δy₁ = y₂ - y₁ आदि। यह अंतर फलन के मानों के बीच के परिवर्तन को दर्शाता है। परिमित अंतर के कई प्रकार होते हैं, जैसे अग्रगामी (Forward), पश्चगामी (Backward), केंद्रीय (Central) आदि।

  • परिमित अंतर समीपवर्ती मानों के बीच का अंतर है।
  • यह निश्चित अंतराल h पर निकाला जाता है।
  • प्रथम परिमित अंतर Δy₀ = y₁ - y₀ होता है।
  • अग्रगामी, पश्चगामी, केंद्रीय आदि प्रकार होते हैं।
  • 📌 अग्रगामी अंतर: अगले मान से वर्तमान मान घटाना।
  • 📌 पश्चगामी अंतर: वर्तमान मान से पिछले मान घटाना।

1.3 अग्रगामी, पश्चगामी एवं केंद्रीय अंतर

अवधारणा

1.3 अग्रगामी, पश्चगामी एवं केंद्रीय अंतर

परिमित अंतर के तीन मुख्य प्रकार होते हैं: अग्रगामी (Forward), पश्चगामी (Backward), और केंद्रीय (Central) अंतर। 1. अग्रगामी अंतर (Forward Difference): यदि x के मान a, a + h, a + 2h, ... हैं, तो अग्रगामी अंतर Δy₀ = y₁ - y₀, Δy₁ = y₂ - y₁, आदि। इसे Δy