Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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3.1 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों का परिचय
व्याख्या3.1 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों का परिचय
तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों को आवर्त सारणी के चौथे, पाँचवें और छठे आवर्त में स्थित 21 से 30, 39 से 48 तथा 57 (लैंथेनाइड्स) के बाद 72 से 80 तक के तत्वों के रूप में जाना जाता है। इनमें तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्व मुख्यतः चौथे आवर्त (स्कैन्डियम से जिंक), पाँचवें आवर्त (इट्रियम से कैडमियम) और छठे आवर्त (हाफ्नियम से मरकरी) में आते हैं। इन तत्वों की सामान्य विशेषता है कि इनमें d-उपश्रेणी में इलेक्ट्रॉन का क्रमिक प्रवेश होता है। तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की इलेक्ट्रॉन विन्यास [Xe] 4f^n 5d^1-10 6s^2 होती है, जहाँ n = 0 से 14 तक हो सकता है। इन तत्वों में d-उपश्रेणी के इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, जिससे इनकी रासायनिक और भौतिक विशेषताएँ प्रभावित होती हैं। इन तत्वों के परमाणु और आयनिक आकार, आयनन ऊर्जा, इलेक्ट्रॉन संबद्धता, और विद्युत-रासायनिक गुणों में विशेष विविधता देखी जाती है।
- तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों में d-उपश्रेणी में इलेक्ट्रॉन का प्रवेश होता है।
- इन तत्वों की इलेक्ट्रॉन विन्यास [Xe] 4f^n 5d^1-10 6s^2 होती है।
- इन तत्वों में परमाणु और आयनिक आकार में विविधता पाई जाती है।
- इनकी रासायनिक और भौतिक विशेषताएँ d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती हैं।
- तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्व आवर्त सारणी के छठे आवर्त में स्थित होते हैं।
- इन तत्वों में लैंथेनाइड संकुचन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- 📌 तृतीय संक्रमण श्रेणी: आवर्त सारणी के छठे आवर्त में स्थित d-ब्लॉक के तत्व।
- 📌 लैंथेनाइड संकुचन: लैंथेनाइड्स के कारण परमाणु आकार में संकुचन।
3.2 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की भौतिक विशेषताएँ
अवधारणा3.2 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की भौतिक विशेषताएँ
तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की भौतिक विशेषताएँ अन्य संक्रमण तत्वों से भिन्न होती हैं। इनमें परमाणु और आयनिक आकार, घनत्व, गलनांक, क्वथनांक, विद्युत चालकता, चुंबकीय गुण, रंग आदि शामिल हैं। इन तत्वों का परमाणु आकार लैंथेनाइड संकुचन के कारण अपेक्षाकृत छोटा होता है। इनका घनत्व अधिक होता है क्योंकि परमाणु द्रव्यमान अधिक और आकार छोटा होता है। गलनांक और क्वथनांक भी उच्च होते हैं, जिससे ये तत्व कठोर और मजबूत होते हैं। इनमें से अधिकांश तत्व धात्विक चमक के साथ होते हैं और विद्युत के अच्छे चालक होते हैं। चुंबकीय गुणों में पैरामैग्नेटिज्म, डायमैग्नेटिज्म और फेरोमैग्नेटिज्म देखा जाता है, जो d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है।
- परमाणु आकार लैंथेनाइड संकुचन के कारण छोटा होता है।
- घनत्व अधिक होता है, जिससे ये तत्व भारी होते हैं।
- गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
- विद्युत चालकता अच्छी होती है।
- चुंबकीय गुण d-इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करते हैं।
- धात्विक चमक और कठोरता प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- 📌 लैंथेनाइड संकुचन: लैंथेनाइड्स के कारण परमाणु आकार में संकुचन।
- 📌 पैरामैग्नेटिज्म: अस्थायी चुंबकीय गुण।
3.3 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की रासायनिक विशेषताएँ
व्याख्या3.3 तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की रासायनिक विशेषताएँ
तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की रासायनिक विशेषताएँ उनकी इलेक्ट्रॉन विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, जटिलता, और संयोजन प्रवृत्ति पर निर्भर करती हैं। इन तत्वों में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ देखने को मिलती हैं, जैसे +2, +3, +4, +5, +6, +7, +8। इनकी रासायनि
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