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Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Thinkers (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 14अध्याय 16 / 18Chapter 16

Chapter 15अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

डी. पी. मुखर्जी भारतीय समाजशास्त्र के प्रमुख विचारकों में से एक हैं। उनका योगदान भारतीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक संरचना के विश्लेषण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इस अध्याय में मुखर्जी के विचारों का विवेचन किया गया है, जिसमें उन्होंने भारतीय समाज की विशिष्टता, परंपराओं की भूमिका, और समाज में परिवर्तन की प्रक्रिया को समझाया है। मुखर्जी ने भारतीय समाज को पश्चिमी समाज से अलग मानते हुए उसकी विशिष्टताओं को उजागर किया है। उन्होंने परंपरा को समाज की आत्मा बताया और सामाजिक परिवर्तन को परंपरा के भीतर ही संभव माना। उनके विचारों में भारतीय समाज की विविधता, सहिष्णुता, और सांस्कृतिक समन्वय का उल्लेख मिलता है।

  • डी. पी. मुखर्जी भारतीय समाजशास्त्र के अग्रणी विचारक हैं।
  • उन्होंने भारतीय समाज की विशिष्टता पर बल दिया।
  • परंपरा को समाज की आत्मा माना।
  • सामाजिक परिवर्तन को परंपरा के भीतर ही संभव बताया।
  • भारतीय समाज की विविधता और सहिष्णुता पर प्रकाश डाला।
  • 📌 परंपरा: समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली सांस्कृतिक और सामाजिक मान्यताएँ।
  • 📌 सामाजिक संरचना: समाज के विभिन्न घटकों का संगठन।

डी. पी. मुखर्जी का जीवन परिचय

व्याख्या

डी. पी. मुखर्जी का जीवन परिचय

डी. पी. मुखर्जी का जन्म 1894 में बंगाल में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और समाजशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। मुखर्जी ने भारतीय समाज की विशिष्टता को समझने के लिए पश्चिमी समाजशास्त्र की विधियों का प्रयोग किया, लेकिन भारतीय संदर्भ में उनका पुनः मूल्यांकन किया। वे भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापक माने जाते हैं। उनका जीवन समाज, संस्कृति और परंपरा की गहन समझ से प्रेरित था। उन्होंने भारतीय समाज के अध्ययन के लिए स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाया और भारतीय समाज की विविधता, सहिष्णुता, और समन्वय को अपने विचारों में स्थान दिया।

  • डी. पी. मुखर्जी का जन्म 1894 में बंगाल में हुआ।
  • कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
  • भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापक माने जाते हैं।
  • पश्चिमी विधियों का भारतीय संदर्भ में पुनः मूल्यांकन किया।
  • स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाया।
  • 📌 स्वदेशी दृष्टिकोण: स्थानीय संदर्भ में विचारों का विकास।
  • 📌 संस्थापक: किसी क्षेत्र की नींव रखने वाला व्यक्ति।

मुखर्जी का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण

अवधारणा

मुखर्जी का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण

डी. पी. मुखर्जी का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण भारतीय समाज की विशिष्टता को समझने पर केंद्रित है। उन्होंने समाज को एक गतिशील इकाई माना, जिसमें परंपरा, संस्कृति और सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण स्थान है। मुखर्जी के अनुसार, भारतीय समाज में परंपराएँ केवल अतीत