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Chapter 13

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Social Thinkers (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 12अध्याय 14 / 18Chapter 14

Chapter 13अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में राधाकमल मुखर्जी के सामाजिक मूल्य विषय की पृष्ठभूमि और उनके समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का परिचय दिया गया है। राधाकमल मुखर्जी भारतीय समाजशास्त्र के प्रमुख विचारकों में से एक हैं, जिन्होंने सामाजिक मूल्यों की अवधारणा को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने सामाजिक संरचना, संस्कृति, और मूल्यों के आपसी संबंधों पर विशेष बल दिया। मुखर्जी के अनुसार, सामाजिक मूल्य समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक मानकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समाज के सदस्यों के आचरण को दिशा देते हैं। उन्होंने भारतीय समाज की विविधता, परंपरा और आधुनिकता के संदर्भ में सामाजिक मूल्यों की भूमिका का विश्लेषण किया। इस अध्याय में मुखर्जी के सामाजिक मूल्य संबंधी विचारों, उनकी विशेषताओं, प्रकारों, और समाज में उनके महत्व पर चर्चा की गई है।

  • राधाकमल मुखर्जी भारतीय समाजशास्त्र के अग्रणी विचारक हैं।
  • सामाजिक मूल्य समाज के नैतिक और सांस्कृतिक मानकों को दर्शाते हैं।
  • मुखर्जी ने सामाजिक मूल्यों की संरचना और कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया।
  • भारतीय समाज की विविधता में मूल्यों की भूमिका को समझाया।
  • मूल्य समाज के सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
  • 📌 सामाजिक मूल्य: समाज द्वारा स्वीकृत नैतिक और सांस्कृतिक मानक।
  • 📌 संरचना: समाज के विभिन्न अंगों की व्यवस्था।

राधाकमल मुखर्जी का जीवन और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण

व्याख्या

राधाकमल मुखर्जी का जीवन और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण

इस अनुभाग में राधाकमल मुखर्जी के जीवन, शिक्षा, और उनके समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण का विस्तार से वर्णन किया गया है। मुखर्जी का जन्म 1889 में बंगाल में हुआ था। वे एक बहुआयामी विद्वान थे, जिन्होंने समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान और दर्शन में योगदान दिया। उन्होंने भारतीय समाज के गहन अध्ययन के लिए तुलनात्मक और अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाया। मुखर्जी का मानना था कि समाजशास्त्र को केवल पश्चिमी सैद्धांतिक ढांचे में नहीं देखना चाहिए, बल्कि भारतीय संदर्भ में उसकी व्याख्या आवश्यक है। उन्होंने समाज के विभिन्न पहलुओं जैसे संस्कृति, मूल्य, परंपरा, और सामाजिक परिवर्तन का विश्लेषण किया। उनके अनुसार, समाज में मूल्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सामाजिक व्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करते हैं।

  • राधाकमल मुखर्जी का जन्म 1889 में बंगाल में हुआ।
  • उन्होंने समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान और दर्शन में योगदान दिया।
  • मुखर्जी ने भारतीय समाज के अध्ययन के लिए अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाया।
  • उन्होंने समाज में मूल्यों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया।
  • पश्चिमी समाजशास्त्र की सीमाओं को उजागर किया।
  • 📌 अंतर्विषयक दृष्टिकोण: विभिन्न विषयों के समन्वित अध्ययन की विधि।
  • 📌 सांस्कृतिक मूल्य: समाज की सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े मूल्य।

सामाजिक मूल्य की अवधारणा

अवधारणा

सामाजिक मूल्य की अवधारणा

इस अनुभाग में सामाजिक मूल्य की अवधारणा को विस्तार से समझाया गया है। मुखर्जी के अनुसार, सामाजिक मूल्य वे आदर्श, मानक या सिद्धांत हैं, जो समाज के सदस्यों के व्यवहार को दिशा देते हैं। ये मूल्य समाज द्वारा स्वीकृत होते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित ह