Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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10.1 परिचय
व्याख्या10.1 परिचय
इस अनुभाग में मैक्स वेबर के सामाजिक विचारों का परिचय दिया गया है। वेबर का जन्म 1864 में जर्मनी में हुआ था और वे समाजशास्त्र के प्रमुख विचारक माने जाते हैं। वेबर ने सामाजिक क्रिया की अवधारणा को केंद्र में रखा और यह बताया कि समाज को समझने के लिए हमें व्यक्तियों की क्रियाओं और उनके अर्थों को समझना आवश्यक है। वेबर के अनुसार, समाजशास्त्र को 'सामाजिक क्रिया' का अध्ययन करना चाहिए, न कि केवल सामाजिक संरचनाओं का। उन्होंने सामाजिक क्रिया को अर्थपूर्ण मानवीय व्यवहार के रूप में परिभाषित किया। वेबर ने समाजशास्त्र को एक 'व्याख्यात्मक विज्ञान' माना, जिसमें शोधकर्ता को क्रियाओं के पीछे छिपे अर्थों को समझना होता है। वेबर के विचारों ने समाजशास्त्र की पद्धति, विषयवस्तु और अध्ययन के तरीके को नया दृष्टिकोण दिया।
- मैक्स वेबर का जन्म 1864 में जर्मनी में हुआ था।
- वेबर ने सामाजिक क्रिया को समाजशास्त्र का केंद्र माना।
- समाजशास्त्र को 'व्याख्यात्मक विज्ञान' के रूप में देखा।
- सामाजिक क्रिया अर्थपूर्ण मानवीय व्यवहार है।
- वेबर के विचारों ने समाजशास्त्र की पद्धति को नया दृष्टिकोण दिया।
- 📌 सामाजिक क्रिया: अर्थपूर्ण मानवीय व्यवहार
- 📌 व्याख्यात्मक विज्ञान: अर्थों की व्याख्या पर आधारित विज्ञान
10.2 सामाजिक क्रिया की अवधारणा
अवधारणा10.2 सामाजिक क्रिया की अवधारणा
मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को समाजशास्त्र के अध्ययन का मूल आधार माना। उनके अनुसार, सामाजिक क्रिया वह है जिसमें व्यक्ति अपने व्यवहार में अर्थ और उद्देश्य जोड़ता है। सामाजिक क्रिया केवल बाहरी व्यवहार नहीं है, बल्कि उसमें व्यक्ति की मानसिकता, उद्देश्य और अर्थ निहित होते हैं। वेबर ने सामाजिक क्रिया को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया: 1) उद्देश्यपूर्ण क्रिया, 2) मूल्य-आधारित क्रिया, 3) भावनात्मक क्रिया, 4) परंपरागत क्रिया। उद्देश्यपूर्ण क्रिया में व्यक्ति किसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कार्य करता है। मूल्य-आधारित क्रिया में व्यक्ति किसी नैतिक या सांस्कृतिक मूल्य के आधार पर कार्य करता है। भावनात्मक क्रिया में व्यक्ति अपनी भावनाओं के अनुसार कार्य करता है। परंपरागत क्रिया में व्यक्ति परंपरा या रीतियों के अनुसार कार्य करता है। वेबर ने सामाजिक क्रिया को समझने के लिए 'वेरस्टेहेन' (समझना) की पद्धति अपनाई।
- सामाजिक क्रिया में अर्थ और उद्देश्य निहित होते हैं।
- चार प्रकार की सामाजिक क्रियाएँ: उद्देश्यपूर्ण, मूल्य-आधारित, भावनात्मक, परंपरागत।
- सामाजिक क्रिया व्यक्ति की मानसिकता पर आधारित होती है।
- वेबर ने 'वेरस्टेहेन' पद्धति का उपयोग किया।
- सामाजिक क्रिया समाजशास्त्र का मूल आधार है।
- 📌 उद्देश्यपूर्ण क्रिया: लक्ष्य प्राप्ति हेतु क्रिया
- 📌 मूल्य-आधारित क्रिया: नैतिक/सांस्कृतिक मूल्य पर आधारित क्रिया
- 📌 भावनात्मक क्रिया: भावनाओं के अनुसार क्रिया
10.3 सामाजिक क्रिया के प्रकार
परिभाषा10.3 सामाजिक क्रिया के प्रकार
मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को चार मुख्य प्रकारों में विभाजित किया है। 1) उद्देश्यपूर्ण क्रिया (Instrumental Rational Action): इसमें व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तर्कसंगत साधनों का चयन करता है। 2) मूल्य-आधारित क्रिया (Value Rational Action
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Social Thinkers · Vardhman Mahaveer Open University
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