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Chapter 12

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Issues in Indian Economic Development (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 11अध्याय 17 / 17

Chapter 12अध्ययन नोट्स

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12.1 औद्योगीकरण का अर्थ और महत्व

अवधारणा

12.1 औद्योगीकरण का अर्थ और महत्व

औद्योगीकरण का अर्थ है उत्पादन के लिए मशीनों, तकनीकी नवाचारों और बड़े पैमाने पर श्रमिकों का उपयोग करना। भारत में औद्योगीकरण का महत्व आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, आय में वृद्धि, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। औद्योगीकरण से कृषि पर निर्भरता कम होती है, जिससे अर्थव्यवस्था विविध होती है और देश आत्मनिर्भर बनता है। औद्योगीकरण के माध्यम से कच्चे माल का उपयोग कर उत्पादों का निर्माण किया जाता है, जिससे निर्यात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। औद्योगीकरण सामाजिक संरचना में भी परिवर्तन लाता है, जैसे शहरीकरण, शिक्षा का प्रसार और जीवन स्तर में सुधार।

  • औद्योगीकरण उत्पादन की प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाता है।
  • यह रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करता है।
  • आर्थिक विकास और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
  • कृषि पर निर्भरता कम होती है और विविधता आती है।
  • निर्यात बढ़ता है और विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
  • सामाजिक परिवर्तन और शहरीकरण को बढ़ावा मिलता है।
  • 📌 औद्योगीकरण: मशीनों और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से उत्पादन की प्रक्रिया।
  • 📌 आर्थिक विकास: राष्ट्रीय आय और उत्पादन में वृद्धि।
  • 📌 शहरीकरण: ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर जनसंख्या का स्थानांतरण।

12.2 भारत में औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

व्याख्या

12.2 भारत में औद्योगिक विकास का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत में औद्योगिक विकास का इतिहास ब्रिटिश शासन से शुरू होता है। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की पारंपरिक कुटीर और हस्तशिल्प उद्योगों का पतन हुआ। ब्रिटिश सरकार ने भारत को कच्चे माल का स्रोत और तैयार माल के बाजार के रूप में इस्तेमाल किया। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारी उद्योगों की स्थापना की। 1951 में औद्योगिक नीति घोषित की गई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। 1960-70 के दशक में औद्योगिक विकास की गति बढ़ी, लेकिन 1980 के दशक में आर्थिक समस्याओं के कारण विकास धीमा हुआ। 1991 में आर्थिक सुधारों के बाद निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिला और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया।

  • ब्रिटिश शासन में पारंपरिक उद्योगों का पतन हुआ।
  • स्वतंत्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के तहत औद्योगीकरण को बढ़ावा मिला।
  • 1951 की औद्योगिक नीति में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
  • 1980 के दशक में औद्योगिक विकास धीमा हुआ।
  • 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला।
  • औद्योगिक विकास का इतिहास सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन से जुड़ा है।
  • 📌 पंचवर्षीय योजना: सरकार द्वारा निर्धारित पांच वर्षों के लिए आर्थिक विकास की योजना।
  • 📌 औद्योगिक नीति: उद्योगों के विकास के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति।
  • 📌 आर्थिक सुधार: 1991 में शुरू हुए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के उपाय।

12.3 औद्योगिक नीति और उसके परिवर्तन

व्याख्या

12.3 औद्योगिक नीति और उसके परिवर्तन

औद्योगिक नीति वह नीति है जो सरकार उद्योगों के विकास, नियंत्रण और विनियमन के लिए बनाती है। भारत में औद्योगिक नीति में समय-समय पर परिवर्तन हुए हैं। 1951 की नीति में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। 1956 की नीति में मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया