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Chapter 11

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Indian Politics - An Introduction (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 14Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस खंड में भारतीय राजनीति में उभरते हुए मुद्दों की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की गई है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय राजनीति में अनेक परिवर्तन आए हैं, जिनमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं। 1990 के दशक के बाद से भारतीय राजनीति में कई नए मुद्दे उभरे हैं, जैसे कि सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता, पर्यावरणीय संकट, आर्थिक उदारीकरण, आतंकवाद, और सूचना क्रांति। इन मुद्दों ने राजनीति की दिशा और स्वरूप को गहराई से प्रभावित किया है। इस अध्याय में इन उभरते मुद्दों का विश्लेषण किया गया है और यह बताया गया है कि ये मुद्दे किस प्रकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया, नीति निर्माण और शासन व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। साथ ही, यह भी समझाया गया है कि कैसे ये मुद्दे भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों और क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  • भारतीय राजनीति में 1990 के बाद कई नए मुद्दे उभरे हैं।
  • इन मुद्दों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नया आयाम दिया है।
  • सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता, पर्यावरण, आर्थिक उदारीकरण प्रमुख मुद्दे हैं।
  • इन मुद्दों का प्रभाव नीति निर्माण और शासन पर पड़ा है।
  • समाज के विभिन्न वर्गों के लिए ये मुद्दे अलग-अलग महत्व रखते हैं।
  • 📌 सामाजिक न्याय: समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर देना।
  • 📌 आर्थिक उदारीकरण: अर्थव्यवस्था को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।

आर्थिक मुद्दे: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण

व्याख्या

आर्थिक मुद्दे: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण

इस खंड में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) की अवधारणा और उनके भारतीय राजनीति पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। 1991 में भारत ने आर्थिक संकट के कारण नई आर्थिक नीति अपनाई, जिसमें सरकारी नियंत्रण कम कर अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खोला गया। उदारीकरण का अर्थ है - सरकारी नियंत्रणों को कम करना और बाजार की शक्तियों को बढ़ावा देना। निजीकरण के तहत सरकारी उपक्रमों का निजी हाथों में स्थानांतरण किया गया। वैश्वीकरण का तात्पर्य है - भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ना। इन नीतियों के कारण रोजगार, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में बड़े बदलाव आए। साथ ही, असमानता, बेरोजगारी, क्षेत्रीय असंतुलन जैसे नए मुद्दे भी उभरे।

  • 1991 में भारत ने नई आर्थिक नीति (एलपीजी) अपनाई।
  • उदारीकरण से सरकारी नियंत्रण कम हुए।
  • निजीकरण से सरकारी उपक्रम निजी क्षेत्र को सौंपे गए।
  • वैश्वीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व से जुड़ाव बढ़ा।
  • इन नीतियों से असमानता और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ भी बढ़ीं।
  • 📌 उदारीकरण: सरकारी नियंत्रणों को कम करना।
  • 📌 निजीकरण: सरकारी संपत्तियों का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण।
  • 📌 वैश्वीकरण: विश्व स्तर पर आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एकीकरण।

सामाजिक न्याय और राजनीति

व्याख्या

सामाजिक न्याय और राजनीति

इस खंड में सामाजिक न्याय की अवधारणा और भारतीय राजनीति में इसकी भूमिका का विस्तार से वर्णन किया गया है। सामाजिक न्याय का अर्थ है - समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और अधिकार प्रदान करना। भारत में ऐतिहासिक रूप से जाति, वर्ग, लिंग, धर्म आदि के आधार पर अस