Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
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1.1 प्रस्तावना: भारतीय संविधान का परिचय
व्याख्या1.1 प्रस्तावना: भारतीय संविधान का परिचय
भारतीय संविधान भारत के शासन की आधारशिला है, जो देश के नागरिकों को उनके अधिकार, कर्तव्य और सरकार की संरचना को निर्धारित करता है। संविधान के निर्माण की प्रक्रिया 1946 में संविधान सभा के गठन से शुरू हुई और 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया गया। संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ, जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। संविधान का उद्देश्य देश में लोकतंत्र, समानता, न्याय और स्वतंत्रता की स्थापना करना है। संविधान की प्रस्तावना में भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है। संविधान की प्रस्तावना में नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का आश्वासन दिया गया है। संविधान सभा में विभिन्न क्षेत्रों, जातियों और वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे संविधान में विविधता और समावेशिता सुनिश्चित हुई। संविधान के निर्माण में डॉ. भीमराव अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्हें संविधान का मुख्य शिल्पकार माना जाता है।
- भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- संविधान सभा का गठन 1946 में हुआ था।
- संविधान की प्रस्तावना में भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है।
- संविधान का उद्देश्य नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्रदान करना है।
- संविधान के निर्माण में विविधता और समावेशिता का ध्यान रखा गया।
- डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान के मुख्य शिल्पकार हैं।
- 📌 संविधान: देश के शासन का मूल दस्तावेज
- 📌 प्रस्तावना: संविधान का आरंभिक भाग, जिसमें उसके उद्देश्य और मूल्यों का उल्लेख होता है
- 📌 संविधान सभा: संविधान निर्माण के लिए गठित प्रतिनिधि संस्था
1.2 संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
व्याख्या1.2 संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ब्रिटिश शासन के दौरान बने विभिन्न अधिनियमों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है। 1858 में ब्रिटिश सरकार ने भारत का प्रशासन अपने हाथ में लिया, जिसके बाद कई अधिनियम जैसे भारतीय परिषद अधिनियम 1861, 1892, 1909 (मॉर्ले-मिंटो सुधार), 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार), और 1935 का भारत सरकार अधिनियम लागू हुए। इन अधिनियमों ने भारतीय प्रशासन में क्रमशः सुधार और भारतीयों की भागीदारी बढ़ाई। 1935 का अधिनियम संविधान का आधार बना, जिसमें संघीय ढांचा, प्रांतीय स्वायत्तता और मौलिक अधिकारों की अवधारणा शामिल थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय नेताओं ने स्वराज और लोकतंत्र की मांग की, जिससे संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा में विभिन्न विचारधाराओं और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संविधान के निर्माण में ब्रिटिश अधिनियमों, स्वतंत्रता आंदोलन की मांगों और भारतीय समाज की विविधता का समावेश किया गया।
- भारतीय संविधान की पृष्ठभूमि ब्रिटिश शासन के अधिनियमों से जुड़ी है।
- 1858 से 1947 तक कई अधिनियम लागू हुए, जैसे 1861, 1892, 1909, 1919, 1935।
- 1935 का भारत सरकार अधिनियम संविधान का आधार बना।
- स्वतंत्रता आंदोलन ने संविधान निर्माण की मांग को बल दिया।
- संविधान सभा में विविध विचारधाराओं का समावेश हुआ।
- भारतीय समाज की विविधता संविधान में दर्शाई गई।
- 📌 भारत सरकार अधिनियम 1935: संविधान का आधार अधिनियम
- 📌 स्वराज: आत्म-शासन की अवधारणा
- 📌 संविधान सभा: संविधान निर्माण के लिए गठित संस्था
1.3 संविधान सभा का गठन और कार्य
व्याख्या1.3 संविधान सभा का गठन और कार्य
संविधान सभा का गठन 1946 में हुआ था, जिसमें कुल 389 सदस्य थे। इनमें से 292 प्रांतों से, 93 रियासतों से और 4 मुख्य क्षेत्रों से थे। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान सभा ने विभिन्न समितियों का गठन किया, जैसे प्रारूप समिति, मौलिक अध
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