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Chapter 6

🎓 Class 11📖 Bhartiya Kala ka parichay📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

भारत में मंदिर स्थापत्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। यह अध्याय मंदिर स्थापत्य के विकास, उसकी विभिन्न शैलियों, क्षेत्रीय विस्तार, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव तथा संरक्षण के महत्व को विस्तार से समझाता है। मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय कला, संस्कृति और सामाजिक जीवन के केंद्र रहे हैं। मंदिर स्थापत्य में वास्तुकला, मूर्तिकला, चित्रकला और स्थापत्य तकनीक का समन्वय देखने को मिलता है। भारत के विभिन्न भागों में मंदिरों की शैलियाँ भिन्न-भिन्न हैं, जो स्थानीय सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई हैं। इस अध्याय में हम मंदिर स्थापत्य की उत्पत्ति, प्रमुख शैलियाँ, क्षेत्रीय विस्तार, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव और संरक्षण के विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

  • मंदिर स्थापत्य भारत की प्राचीन और समृद्ध कला है।
  • मंदिर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र होते हैं।
  • मंदिर स्थापत्य में वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला का समन्वय होता है।
  • भारत में मंदिर स्थापत्य की विभिन्न शैलियाँ हैं।
  • मंदिर स्थापत्य का क्षेत्रीय विस्तार सांस्कृतिक और भौगोलिक कारकों पर निर्भर है।
  • मंदिरों का संरक्षण भारतीय सांस्कृतिक विरासत के लिए आवश्यक है।
  • 📌 मंदिर स्थापत्य: धार्मिक मंदिरों के निर्माण और उनकी वास्तुकला।
  • 📌 वास्तुकला: भवन निर्माण की कला और विज्ञान।
  • 📌 सांस्कृतिक विरासत: किसी समाज की पारंपरिक कला, संस्कृति और इतिहास।

मंदिर स्थापत्य की उत्पत्ति

व्याख्या

मंदिर स्थापत्य की उत्पत्ति

मंदिर स्थापत्य की उत्पत्ति सिंधु घाटी सभ्यता के बाद वैदिक काल में हुई। सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान धार्मिक स्थलों के अवशेष मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि उस समय भी धार्मिक आस्था के लिए विशेष स्थान बनाए जाते थे। वैदिक काल में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खुले स्थानों और अग्निकुंडों का प्रचलन था, लेकिन धीरे-धीरे स्थायी धार्मिक भवनों का निर्माण शुरू हुआ। प्रारंभिक मंदिरों में प्राकृतिक तत्वों जैसे पेड़, चट्टानें आदि को पूजा का केंद्र माना जाता था। बाद में, मंदिरों का निर्माण पत्थर, ईंट और लकड़ी से होने लगा। मंदिर स्थापत्य का विकास गुप्त काल में विशेष रूप से हुआ, जब मंदिरों में मूर्तिकला और स्थापत्य कला का समन्वय देखने को मिला। इस काल के मंदिरों में गर्भगृह, मंडप, और शिखर जैसे तत्व विकसित हुए। इसके बाद विभिन्न राजवंशों ने मंदिर स्थापत्य को और अधिक भव्य और जटिल बनाया।

  • मंदिर स्थापत्य की शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता के धार्मिक स्थलों से हुई।
  • वैदिक काल में धार्मिक अनुष्ठान खुले स्थानों पर होते थे।
  • गुप्त काल में मंदिर स्थापत्य का विकास हुआ।
  • प्रारंभिक मंदिरों में गर्भगृह, मंडप और शिखर के तत्व विकसित हुए।
  • राजवंशों ने मंदिरों को भव्य और जटिल बनाया।
  • मंदिर स्थापत्य में मूर्तिकला और स्थापत्य कला का समन्वय हुआ।
  • 📌 सिंधु घाटी सभ्यता: प्राचीन भारतीय सभ्यता (लगभग 3300–1300 ई.पू.)।
  • 📌 वैदिक काल: भारतीय इतिहास का वह काल जब वेदों की रचना हुई।
  • 📌 गुप्त काल: भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग (लगभग 320–550 ई.)।

मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैलियाँ

व्याख्या

मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैलियाँ

भारत में मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं: नागर, द्रविड़ और वेसर। नागर शैली मुख्यतः उत्तर भारत में प्रचलित है, जिसमें मंदिर का शिखर ऊँचा, गोलाकार और सीधा होता है। इस शैली में मंदिर का गर्भगृह शिखर के नीचे होता है और शिखर की आकृति अक्सर कुंडला

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. भारत में मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैलियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

भारत में मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं: (1) नागर शैली: यह शैली उत्तर भारत में प्रचलित है। इसमें मंदिरों के शिखर ऊँचे और सीधें होते हैं। नागर शैली के मंदिर मुख्यतः नगरों में बनाए जाते थे। (2) द्रविड़ शैली: यह दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसमें मंदिरों का प्रांगण विशाल होता है, भव्य प्रवेश द्वार (गोपुरम) और स्तूपाकार शिखर (विमान) होते हैं। (3) वेसरा शैली: यह मध्य भारत में विकसित मिश्रित शैली है, जिसमें नागर और द्रविड़ दोनों शैलियों के तत्व सम्मिलित होते हैं। वेसरा शैली के मंदिरों में ऊँचे शिखर और विस्तृत प्रांगण दोनों मिलते हैं। इन शैलियों के मंदिरों में स्थापत्य, मूर्तिकला और सजावट की विशेषता होती है।

व्याख्या:

उत्तर में तीनों शैलियों का नाम, क्षेत्र, विशेषता और उनकी स्थापत्य संबंधी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।

MediumNCERT
Q2.2. नागर, द्रविड़ और वेसरा शैलियों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

नागर, द्रविड़ और वेसरा शैलियों में निम्नलिखित अंतर हैं: (1) नागर शैली: उत्तर भारत में प्रचलित। शिखर ऊँचे और सीधें होते हैं। उदाहरण: काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), लक्ष्मण मंदिर (खजुराहो)। (2) द्रविड़ शैली: दक्षिण भारत में प्रचलित। विशाल प्रांगण, गोपुरम (प्रवेश द्वार), स्तूपाकार शिखर। उदाहरण: बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), मीनाक्षी मंदिर (मदुरै)। (3) वेसरा शैली: मध्य भारत में विकसित मिश्रित शैली। नागर और द्रविड़ दोनों के तत्व। उदाहरण: होयसलेश्वर मंदिर (हलिबीड), कदंबा मंदिर (कर्नाटक)। इन शैलियों में स्थापत्य, शिखर की बनावट, प्रवेश द्वार, और मूर्तिकला में अंतर होता है।

व्याख्या:

उत्तर में तीनों शैलियों का क्षेत्र, विशेषता, और उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट किया गया है।

MediumNCERT
Q3.3. मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में कौन-कौन से विषय दर्शाए जाते हैं?

उत्तर:

मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, प्राकृतिक दृश्य, जीव-जंतु, मानव आकृतियाँ, और सामाजिक गतिविधियाँ दर्शाई जाती हैं। मंदिरों की दीवारों, स्तंभों, शिखरों और मंडपों पर ये विषय उकेरे जाते हैं।

व्याख्या:

उत्तर में मंदिरों की मूर्तिकला और सजावट में प्रयुक्त विषयों का उल्लेख किया गया है।

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Q4.4. मंदिर स्थापत्य का सामाजिक और धार्मिक महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

मंदिर स्थापत्य का सामाजिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। धार्मिक दृष्टि से मंदिर आस्था का केंद्र होते हैं, जहाँ पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव होते हैं। सामाजिक दृष्टि से मंदिर समाज को एकजुट करते हैं, सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र होते हैं, और कला, संगीत, नृत्य आदि का संरक्षण करते हैं। मंदिरों के निर्माण से समाज में एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलात्मक विकास होता है।

व्याख्या:

उत्तर में मंदिर स्थापत्य के सामाजिक और धार्मिक महत्व का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

MediumNCERT
Q5.5. भारत में मंदिर स्थापत्य की विरासत के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर:

भारत में मंदिर स्थापत्य की विरासत के संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक धरोहर भी हैं। प्राकृतिक प्रभाव, पर्यावरणीय परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप से इनकी संरचना को खतरा है। संरक्षण से आने वाली पीढ़ियाँ इस विरासत से परिचित हो सकेंगी और भारतीय संस्कृति का गौरव बना रहेगा।

व्याख्या:

उत्तर में संरक्षण की आवश्यकता के कारणों का उल्लेख किया गया है।

EasyNCERT
Q6.भारत में मंदिर स्थापत्य की कितनी प्रमुख शैलियाँ मानी जाती हैं?
A.A) दो
B.B) चार
C.C) तीन
D.D) पाँच

उत्तर:

तीन

व्याख्या:

भारत में मंदिर स्थापत्य की तीन प्रमुख शैलियाँ मानी जाती हैं: नागर शैली (उत्तर भारत), द्रविड़ शैली (दक्षिण भारत), और वेसरा शैली (मध्य भारत)।

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Q7.नागर शैली के मंदिरों की मुख्य विशेषता क्या है?
A.A) ऊँचा और भव्य शिखर
B.B) गोपुरम
C.C) विस्तृत प्रांगण
D.D) जलाशय

उत्तर:

ऊँचा और भव्य शिखर

व्याख्या:

नागर शैली के मंदिरों की मुख्य विशेषता उनका ऊँचा और भव्य शिखर होता है, जिसे 'विमान' या 'शिखर' कहा जाता है।

Easy
Q8.द्रविड़ शैली के मंदिरों में सबसे अधिक सजावटी और ऊँचा कौन सा भाग होता है?
A.A) मंडप
B.B) गोपुरम
C.C) गर्भगृह
D.D) कलश

उत्तर:

गोपुरम

व्याख्या:

द्रविड़ शैली के मंदिरों में गोपुरम सबसे अधिक ऊँचा और सजावटी होता है, जो मंदिर का प्रवेश द्वार होता है।

Easy