Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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9.1 रीमान समाकलन की पुनरावृत्ति
व्याख्या9.1 रीमान समाकलन की पुनरावृत्ति
इस अनुभाग में रीमान समाकलन की मूलभूत अवधारणाओं की पुनरावृत्ति की जाती है। रीमान समाकलन गणित की वह विधि है, जिससे किसी फलन के निश्चित अंतराल पर क्षेत्रफल ज्ञात किया जाता है। इसमें फलन को छोटे-छोटे उपखंडों में विभाजित कर, प्रत्येक उपखंड पर फलन के मान का योगफल निकाला जाता है। यदि उपखंडों की संख्या अनंत कर दी जाए और प्रत्येक उपखंड की चौड़ाई शून्य के समीप हो, तो यह योगफल समाकलन के समीप आ जाता है। रीमान समाकलन का मुख्य उद्देश्य किसी फलन के ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल को गणितीय रूप से निकालना है। यह प्रक्रिया भौतिकी, अर्थशास्त्र, और अन्य विज्ञानों में भी प्रयुक्त होती है, जैसे गति, कार्य, ऊर्जा आदि की गणना में।
- रीमान समाकलन निश्चित समाकलन की गणितीय विधि है।
- फलन के ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल की गणना के लिए प्रयुक्त।
- इसे उपखंडों के योग (Riemann Sums) द्वारा परिभाषित किया जाता है।
- उपखंडों की संख्या बढ़ाने पर योगफल समाकल के समीप आता है।
- समाकलन का प्रयोग भौतिकी, अर्थशास्त्र, आदि में होता है।
- 📌 समाकलन (Integration): फलन के ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल की गणना।
- 📌 रीमान योग (Riemann Sum): उपखंडों पर फलन के मान का योग।
9.2 रीमान समाकल की औपचारिक परिभाषा
परिभाषा9.2 रीमान समाकल की औपचारिक परिभाषा
इस अनुभाग में रीमान समाकल की औपचारिक परिभाषा दी गई है। यदि कोई फलन f(x) [a, b] पर परिभाषित है, तो इस अंतराल को n उपखंडों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक उपखंड का चौड़ाई Δx = (b−a)/n होती है। प्रत्येक उपखंड में कोई भी बिंदु ξᵢ चुना जाता है। फिर रीमान योग S = Σ f(ξᵢ) Δx बनता है। यदि n→∞ होने पर यह योगफल किसी निश्चित संख्या S की ओर अग्रसर होता है, तो f(x) को [a, b] पर रीमान समाकलनीय कहते हैं, और S को उसका समाकल कहते हैं।
- समाकल की परिभाषा उपखंडों के योग पर आधारित है।
- ξᵢ उपखंड में कोई भी बिंदु हो सकता है।
- n→∞ पर योगफल समाकल के समीप जाता है।
- यदि सीमा S मौजूद है, तो फलन समाकलनीय है।
- समाकल का मान क्षेत्रफल के बराबर होता है।
- 📌 उपखंड (Subinterval): [a, b] का विभाजन।
- 📌 रीमान योग (Riemann Sum): Σ f(ξᵢ) Δx
9.3 रीमान समाकल के गुण
अवधारणा9.3 रीमान समाकल के गुण
इस अनुभाग में रीमान समाकल के मुख्य गुणों का वर्णन किया गया है। इनमें रैखिकता, अंतराल का योग, और फलनों का योग/गुणन आदि शामिल हैं। यदि f(x) और g(x) दोनों [a, b] पर समाकलनीय हैं, तो उनका योग, अंतर, और स्केलर गुणन भी समाकलनीय होते हैं। साथ ही, समाकल का म
SLM - Real Analysis & Metric Space (Hindi) के सभी 13 अध्याय
Real Analysis & Metric Space · Vardhman Mahaveer Open University