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Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Real Analysis & Metric Space (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 5अध्याय 5 / 13Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 अवकलज की मूलभूत परिभाषा

परिभाषा

6.1 अवकलज की मूलभूत परिभाषा

अवकलज (Derivative) गणित की वह संकल्पना है जो किसी फलन के परिवर्तन की दर को निरूपित करती है। यदि y = f(x) कोई फलन है, तो x में सूक्ष्म परिवर्तन के कारण y में होने वाले परिवर्तन की दर को अवकलज कहा जाता है। अवकलज का उपयोग भौतिकी, अभियांत्रिकी, अर्थशास्त्र आदि में व्यापक रूप से होता है। अवकलज की औपचारिक परिभाषा सीमा (limit) के माध्यम से दी जाती है। यदि f(x) का अवकलज x = a पर अस्तित्व में है, तो उसे निम्न प्रकार से लिखा जाता है: f'(a) = lim (h→0) [(f(a+h) - f(a)) / h] यहाँ, h बहुत छोटा मान है, और lim (h→0) का अर्थ है कि h शून्य की ओर अग्रसर है। अवकलज का भौतिक अर्थ है - किसी बिंदु पर रेखा के स्पर्शज का ढाल।

  • अवकलज परिवर्तन की दर को दर्शाता है।
  • सीमा (limit) की संकल्पना पर आधारित है।
  • स्पर्शज के ढाल के रूप में भी समझा जा सकता है।
  • अवकलज का सूत्र f'(a) = lim (h→0) [(f(a+h) - f(a)) / h] है।
  • अवकलज का उपयोग गति, दर, अधिकतम-न्यूनतम आदि में होता है।
  • 📌 अवकलज: किसी फलन के परिवर्तन की दर।
  • 📌 सीमा (Limit): एक बिंदु के समीप फलन के मान का व्यवहार।
  • 📌 स्पर्शज (Tangent): वक्र को एक बिंदु पर छूने वाली रेखा।

6.2 अवकलनीयता (Differentiability)

अवधारणा

6.2 अवकलनीयता (Differentiability)

किसी फलन के किसी बिंदु पर अवकलज का अस्तित्व होना आवश्यक है, तभी वह फलन उस बिंदु पर अवकलनीय कहलाता है। यदि f(x) का अवकलज x = a पर अस्तित्व में है, तो f(x) को x = a पर अवकलनीय कहते हैं। अवकलनीयता की औपचारिक परिभाषा: यदि lim (h→0⁺) [(f(a+h) - f(a))/h] और lim (h→0⁻) [(f(a+h) - f(a))/h] दोनों का मान समान है, तो f(x) x = a पर अवकलनीय है। सभी सतत फलन अवकलनीय नहीं होते, लेकिन सभी अवकलनीय फलन सतत होते हैं। अवकलनीयता का भौतिक अर्थ है कि वक्र पर उस बिंदु पर एक अद्वितीय स्पर्शज संभव है।

  • अवकलनीयता का अर्थ है - अवकलज का अस्तित्व।
  • सततता और अवकलनीयता में अंतर है।
  • अवकलनीयता के लिए बाएँ और दाएँ अवकलज समान होने चाहिए।
  • अवकलनीयता के बिना स्पर्शज की परिभाषा संभव नहीं।
  • सभी अवकलनीय फलन सतत होते हैं।
  • 📌 अवकलनीयता: किसी बिंदु पर अवकलज का अस्तित्व।
  • 📌 सततता: फलन का बिना टूटे बढ़ना।
  • 📌 बाएँ अवकलज: h → 0⁻ की सीमा।

6.3 अवकलज के नियम (Rules of Differentiation)

सूत्र

6.3 अवकलज के नियम (Rules of Differentiation)

अवकलज के नियमों के माध्यम से जटिल फलनों के अवकलज सरलता से निकाले जा सकते हैं। मुख्य नियम निम्नलिखित हैं: 1. योग का नियम (Sum Rule): यदि f(x) और g(x) दोनों अवकलनीय हैं, तो (f(x) + g(x))' = f'(x) + g'(x) 2. गुणनफल नियम (Product Rule): (f(x) × g(x))' =