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Chapter 7

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of Rajasthan (Earliest Time to 1956 AD) (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 16Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

7.1 मेवाड़ का ऐतिहासिक महत्व

व्याख्या

7.1 मेवाड़ का ऐतिहासिक महत्व

मेवाड़ राजस्थान का एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसका ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। यह क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी भाग में स्थित है और इसकी राजधानी उदयपुर रही है। मेवाड़ का इतिहास वीरता, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक समृद्धि से भरा हुआ है। यहाँ के शासकों ने सदैव विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष किया और अपनी भूमि की रक्षा की। मेवाड़ का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है, जहाँ इसे 'मेदपाट' कहा गया है। यहाँ के राजपूत शासकों ने न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि कला, संस्कृति और स्थापत्य में भी योगदान दिया। मेवाड़ के किले, महल और मंदिर इसकी समृद्ध विरासत के प्रमाण हैं।

  • मेवाड़ राजस्थान का दक्षिणी क्षेत्र है, जिसकी राजधानी उदयपुर है।
  • यह क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
  • मेवाड़ का इतिहास वीरता और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ के शासकों ने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष किया।
  • मेवाड़ का सांस्कृतिक और स्थापत्य महत्व भी अत्यधिक है।
  • प्राचीन ग्रंथों में मेवाड़ को 'मेदपाट' कहा गया है।
  • 📌 मेवाड़: राजस्थान का ऐतिहासिक क्षेत्र, वीरता और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध।
  • 📌 अरावली: भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला।

7.2 महाराणा कुम्भा: शासन, उपलब्धियाँ एवं सांस्कृतिक योगदान

व्याख्या

7.2 महाराणा कुम्भा: शासन, उपलब्धियाँ एवं सांस्कृतिक योगदान

महाराणा कुम्भा (1433-1468 ई.) मेवाड़ के सबसे महान शासकों में से एक थे। उनका शासनकाल राजनीतिक, सैन्य और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। कुम्भा ने मेवाड़ की सीमाओं का विस्तार किया और कई किलों का निर्माण कराया। उन्होंने चित्तौड़गढ़ किले का पुनर्निर्माण किया और कुम्भलगढ़ किले का निर्माण कराया, जो उनकी सैन्य शक्ति का प्रतीक है। कुम्भा ने गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासकों के विरुद्ध सफल युद्ध किए। सांस्कृतिक क्षेत्र में कुम्भा ने संगीत, साहित्य और स्थापत्य को बढ़ावा दिया। उन्होंने 'कुम्भा स्वामी' मंदिर का निर्माण कराया और संगीत ग्रंथों की रचना की।

  • महाराणा कुम्भा का शासनकाल 1433-1468 ई. था।
  • उन्होंने मेवाड़ की सीमाओं का विस्तार किया।
  • कुम्भलगढ़ किले का निर्माण कराया।
  • गुजरात, मालवा और मारवाड़ के विरुद्ध युद्ध किए।
  • संगीत, साहित्य और स्थापत्य को बढ़ावा दिया।
  • कुम्भा स्वामी मंदिर का निर्माण कराया।
  • 📌 महाराणा कुम्भा: मेवाड़ के महान शासक, सैन्य और सांस्कृतिक योगदान के लिए प्रसिद्ध।
  • 📌 कुम्भलगढ़: कुम्भा द्वारा निर्मित किला, सैन्य शक्ति का प्रतीक।

7.3 राणा सांगा: संघर्ष, युद्ध एवं दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में भूमिका

व्याख्या

7.3 राणा सांगा: संघर्ष, युद्ध एवं दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में भूमिका

राणा सांगा (1508-1528 ई.) मेवाड़ के एक महान शासक थे, जिन्होंने उत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका शासनकाल संघर्ष और युद्धों से भरा रहा। राणा सांगा ने दिल्ली, गुजरात, मालवा, और अफगान शासकों के विरुद्ध कई युद्ध किए। उन्हो