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Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of Rajasthan (Earliest Time to 1956 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 16Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

प्रागैतिहासिक राजस्थान अध्याय का प्रारंभिक भाग है, जिसमें राजस्थान के प्राचीनतम इतिहास, मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरणों और पुरातात्विक साक्ष्यों की चर्चा की जाती है। इस खंड में बताया गया है कि 'प्रागैतिहासिक' शब्द का अर्थ वह काल है, जब मानव ने लेखन का आविष्कार नहीं किया था, अतः उस समय की जानकारी हमें केवल पुरातात्विक अवशेषों और वस्तुओं से प्राप्त होती है। राजस्थान की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों ने यहाँ की प्राचीन सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस खंड में यह भी बताया गया है कि राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक स्थलों की खोज की गई है, जिनसे यह सिद्ध होता है कि यहाँ मानव जीवन की शुरुआत बहुत प्राचीन काल में हो चुकी थी।

  • प्रागैतिहासिक काल वह समय है जब लेखन का विकास नहीं हुआ था।
  • राजस्थान में प्राचीन मानव सभ्यता के प्रमाण पुरातात्विक खुदाई से मिले हैं।
  • राजस्थान की भौगोलिक स्थिति ने यहाँ की सभ्यता के विकास में योगदान दिया।
  • पुरातात्विक साक्ष्य जैसे औजार, हड्डियाँ, चित्र आदि मुख्य स्रोत हैं।
  • राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक स्थल पाए गए हैं।
  • 📌 प्रागैतिहासिक: वह काल जिसमें लेखन का विकास नहीं हुआ था।
  • 📌 पुरातत्व: प्राचीन वस्तुओं, अवशेषों और स्थलों का अध्ययन।

प्रागैतिहासिक काल की अवधारणा

अवधारणा

प्रागैतिहासिक काल की अवधारणा

प्रागैतिहासिक काल का तात्पर्य उस समय से है, जब मानव ने लेखन का आविष्कार नहीं किया था और उसकी जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान आदि की जानकारी मुख्यतः पुरातात्विक अवशेषों से प्राप्त होती है। इस काल को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है – पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग। पाषाण युग को भी आगे पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण युग में बांटा गया है। राजस्थान में इन सभी युगों के प्रमाण मिले हैं। इस खंड में यह भी बताया गया है कि प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन के लिए पुरातत्वविद् स्थल खुदाई, शैलचित्रों, औजारों, हड्डियों आदि का विश्लेषण करते हैं।

  • प्रागैतिहासिक काल में लेखन का अभाव था।
  • इस काल को पाषाण, कांस्य और लौह युग में विभाजित किया गया है।
  • पाषाण युग के भी तीन उपविभाग हैं – पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण।
  • राजस्थान में सभी युगों के प्रमाण मिलते हैं।
  • अध्ययन के मुख्य स्रोत – औजार, शैलचित्र, हड्डियाँ।
  • 📌 पाषाण युग: वह काल जिसमें मानव ने पत्थर के औजारों का उपयोग किया।
  • 📌 कांस्य युग: वह काल जिसमें मानव ने तांबे और कांसे के औजार बनाए।
  • 📌 लौह युग: वह काल जिसमें लोहे के औजारों का प्रयोग आरंभ हुआ।

राजस्थान में पाषाण युग

व्याख्या

राजस्थान में पाषाण युग

राजस्थान में पाषाण युग के प्रमाण अनेक स्थलों से प्राप्त हुए हैं। पाषाण युग को तीन भागों में बाँटा गया है – पुरापाषाण (लगभग 5,00,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू.), मध्यपाषाण (लगभग 10,000 ई.पू. से 6,000 ई.पू.) और नवपाषाण (लगभग 6,000 ई.पू. से 2,500 ई.पू.)। पुर