Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस खंड में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया है। दक्षिण एशिया विश्व की सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान शामिल हैं। इस क्षेत्र के देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक संबंध हैं, लेकिन साथ ही राजनीतिक तनाव, सीमाविवाद, आर्थिक असमानता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं। क्षेत्रीय सहयोग का उद्देश्य इन देशों के बीच विश्वास, शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की अवधारणा 1980 के दशक में प्रमुखता से उभरी, जब वैश्वीकरण और आर्थिक उदारीकरण के चलते क्षेत्रीय एकीकरण की आवश्यकता महसूस की गई। इस संदर्भ में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम था। इस खंड में यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्रीय सहयोग केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर भी आवश्यक है।
- दक्षिण एशिया में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता है।
- क्षेत्रीय सहयोग से शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- सार्क की स्थापना क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- राजनीतिक तनाव और सीमाविवाद क्षेत्रीय सहयोग में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- आर्थिक असमानता और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ भी मौजूद हैं।
- क्षेत्रीय सहयोग बहुआयामी है—आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक।
- 📌 क्षेत्रीय सहयोग: एक ही भौगोलिक क्षेत्र के देशों के बीच आपसी सहयोग की प्रक्रिया।
- 📌 सार्क: दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ, 1985 में स्थापित एक संगठन।
दक्षिण एशिया के देशों के आपसी संबंध
व्याख्यादक्षिण एशिया के देशों के आपसी संबंध
इस खंड में दक्षिण एशिया के देशों के आपसी संबंधों की ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण किया गया है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान के बीच संबंध जटिल और बहुआयामी हैं। इतिहास में, इन देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और धार्मिक यात्राएँ होती रही हैं। ब्रिटिश उपनिवेशवाद के दौरान इन देशों के बीच राजनीतिक सीमाएँ बनीं, जिससे कई सीमाविवाद उत्पन्न हुए। स्वतंत्रता के बाद, भारत-पाकिस्तान, भारत-श्रीलंका, भारत-नेपाल आदि के संबंधों में उतार-चढ़ाव आए। आर्थिक दृष्टि से, भारत क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करता है। सांस्कृतिक रूप से, भाषाएँ, धर्म और परंपराएँ इन देशों को जोड़ती हैं। राजनीतिक रूप से, लोकतंत्र, राजतंत्र और सैन्य शासन जैसी विविध व्यवस्थाएँ देखी जाती हैं। इन संबंधों में कभी-कभी तनाव भी उत्पन्न होता है, जैसे कि भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद, भारत-नेपाल के बीच सीमा विवाद, या भारत-श्रीलंका के बीच तमिल मुद्दा। फिर भी, आपसी सहयोग के प्रयास भी होते रहे हैं।
- दक्षिण एशिया के देशों के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से गहरे हैं।
- ब्रिटिश उपनिवेशवाद के बाद राजनीतिक सीमाएँ बनीं।
- आर्थिक संबंधों में भारत की भूमिका प्रमुख है।
- सीमाविवाद और राजनीतिक तनाव संबंधों में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान संबंधों को मजबूत करता है।
- लोकतंत्र, राजतंत्र और सैन्य शासन की विविधता देखी जाती है।
- 📌 सीमाविवाद: दो या अधिक देशों के बीच सीमा को लेकर विवाद।
- 📌 सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक तत्वों का आदान-प्रदान।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क): स्थापना और उद्देश्य
व्याख्यादक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क): स्थापना और उद्देश्य
इस खंड में सार्क की स्थापना, उसके उद्देश्य और कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है। सार्क (South Asian Association for Regional Cooperation) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य भारत, पाकिस्तान,
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Contemporary International Relations · Vardhman Mahaveer Open University