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Chapter 4

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Contemporary International Relations (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
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Chapter 4अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में भारतीय विदेश नीति के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की गई है। भारत की विदेश नीति उसके स्वतंत्रता आंदोलन, उपनिवेशवाद के अनुभव और विभाजन के परिणामों से गहराई से प्रभावित रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी पहचान स्थापित करने का प्रयास किया। पंडित जवाहरलाल नेहरू की भूमिका, गुटनिरपेक्षता की अवधारणा, और शांति, सहयोग, तथा समानता के सिद्धांतों को इस नीति की नींव माना जाता है। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति अपनाई और विश्व के अन्य देशों के साथ भी मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने का प्रयास किया। इस नीति का उद्देश्य न केवल राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना था, बल्कि वैश्विक शांति और विकास में भी योगदान देना था।

  • भारतीय विदेश नीति की जड़ें स्वतंत्रता आंदोलन और उपनिवेशवाद के अनुभव में हैं।
  • पंडित नेहरू ने विदेश नीति के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।
  • गुटनिरपेक्षता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व इसके मुख्य स्तंभ हैं।
  • भारत ने वैश्विक शांति और विकास को प्राथमिकता दी।
  • पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को विशेष महत्व दिया गया।
  • 📌 विदेश नीति: किसी देश द्वारा अन्य देशों के साथ संबंधों को संचालित करने के लिए अपनाई गई नीति।
  • 📌 गुटनिरपेक्षता: शीत युद्ध के दौरान किसी भी शक्ति गुट में शामिल न होने की नीति।

भारत की विदेश नीति का ऐतिहासिक विकास

व्याख्या

भारत की विदेश नीति का ऐतिहासिक विकास

इस अनुभाग में भारत की विदेश नीति के ऐतिहासिक विकास को विस्तार से समझाया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के समक्ष कई चुनौतियाँ थीं, जैसे विभाजन, शरणार्थी समस्या, सीमाओं की सुरक्षा, और आर्थिक पुनर्निर्माण। इन परिस्थितियों में भारत ने अपनी विदेश नीति को बहुपक्षीय और संतुलित रखने का प्रयास किया। पंडित नेहरू के नेतृत्व में भारत ने गुटनिरपेक्षता को अपनाया, जिससे वह शीत युद्ध के दौरान किसी भी शक्ति गुट में शामिल नहीं हुआ। भारत ने उपनिवेशवाद का विरोध किया और एशिया-अफ्रीका के नवस्वतंत्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाया। पंचशील के सिद्धांतों, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता ने भारत की विदेश नीति को दिशा दी।

  • स्वतंत्रता के समय भारत के समक्ष कई आंतरिक और बाह्य चुनौतियाँ थीं।
  • भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई।
  • पंचशील के सिद्धांतों को विदेश नीति में शामिल किया गया।
  • भारत ने उपनिवेशवाद का विरोध किया।
  • नवस्वतंत्र देशों के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी गई।
  • 📌 पंचशील: शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांत, जैसे एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान।
  • 📌 नवस्वतंत्र देश: वे देश जिन्होंने हाल ही में उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता प्राप्त की।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका

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गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका

इस अनुभाग में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) में भारत की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। शीत युद्ध के दौरान विश्व दो गुटों में बँटा हुआ था—एक ओर अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी गुट और दूसरी ओर सोवियत संघ के नेतृत्व में पूर्वी गुट। भारत ने किसी भी गुट में शा