Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
7.1 वलय की परिभाषा और उदाहरण
परिभाषा7.1 वलय की परिभाषा और उदाहरण
इस अनुभाग में वलय (Ring) की सटीक परिभाषा दी गई है। वलय एक ऐसी बीजगणितीय संरचना है जिसमें दो संक्रियाएँ होती हैं: योग (addition) और गुणा (multiplication)। वलय को एक समुच्चय R के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसमें दो बाइनरी संक्रियाएँ '+' और '×' परिभाषित होती हैं, जो निम्नलिखित गुणों को संतुष्ट करती हैं: 1. (R, +) एक एबेलियन समूह है। 2. गुणा संक्रिया (×) संघटनशील है। 3. गुणा संक्रिया योग पर वितरणशील है। वलय के उदाहरणों में पूर्णांक (ℤ), वास्तविक संख्याएँ (ℝ), और मैट्रिक्स वलय (n × n मैट्रिक्स) शामिल हैं। वलय की परिभाषा: एक समुच्चय R एक वलय कहलाता है यदि: (i) (R, +) एक एबेलियन समूह है। (ii) (R, ×) एक मोनॉइड है (संघटनशीलता और एकता)। (iii) गुणा संक्रिया योग पर वितरणशील है। इस अनुभाग में वलय के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं, जैसे: - पूर्णांक का वलय (ℤ) - वास्तविक संख्याओं का वलय (ℝ) - n × n मैट्रिक्स का वलय वलय की परिभाषा और उदाहरणों को समझने के लिए विद्यार्थियों को वलय के गुणों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
- वलय में दो संक्रियाएँ होती हैं: योग और गुणा
- वलय का समुच्चय (R, +) एबेलियन समूह होता है
- गुणा संक्रिया संघटनशील होती है
- गुणा संक्रिया योग पर वितरणशील होती है
- पूर्णांक, वास्तविक संख्याएँ, मैट्रिक्स वलय के उदाहरण हैं
- 📌 वलय: दो संक्रियाओं वाला समुच्चय, जो विशेष गुणों को संतुष्ट करता है
- 📌 एबेलियन समूह: ऐसा समूह जिसमें संक्रिया कम्यूटेटिव होती है
7.2 वलय के गुण
अवधारणा7.2 वलय के गुण
इस अनुभाग में वलय के महत्वपूर्ण गुणों की चर्चा की गई है। वलय की दो संक्रियाएँ (योग और गुणा) विशेष गुणों को संतुष्ट करती हैं: 1. योग संक्रिया: - संघटनशीलता: a + (b + c) = (a + b) + c - पहचान तत्व: एक तत्व 0, जिससे a + 0 = a - प्रतिलोम: प्रत्येक a के लिए एक -a, जिससे a + (-a) = 0 - कम्यूटेटिव: a + b = b + a 2. गुणा संक्रिया: - संघटनशीलता: a × (b × c) = (a × b) × c - वितरणशीलता: a × (b + c) = a × b + a × c और (a + b) × c = a × c + b × c वलय में गुणा संक्रिया कम्यूटेटिव नहीं होती, लेकिन कुछ वलय में होती है (कम्यूटेटिव वलय)। वलय में एकता तत्व (1) हो सकता है, जिससे a × 1 = a। NCERT में वलय के गुणों को उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है।
- वलय में योग संक्रिया एबेलियन समूह बनाती है
- गुणा संक्रिया संघटनशील होती है
- गुणा संक्रिया योग पर वितरणशील होती है
- वलय में एकता तत्व (1) हो सकता है
- गुणा संक्रिया कम्यूटेटिव नहीं होती
- 📌 संघटनशीलता: संक्रिया का क्रम बदलने पर परिणाम वही रहता है
- 📌 कम्यूटेटिव: संक्रिया का क्रम बदलने पर परिणाम वही रहता है
7.3 उपवलय (Subring)
परिभाषा7.3 उपवलय (Subring)
इस अनुभाग में उपवलय (Subring) की परिभाषा और उसके गुणों की चर्चा की गई है। उपवलय वलय का एक उपसमुच्चय होता है, जो वलय की दोनों संक्रियाओं के लिए बंद होता है और वलय के सभी गुणों को संतुष्ट करता है। उपवलय की परिभाषा: यदि R एक वलय है और S उसका उपसमुच्चय
SLM - Algebra (Hindi) के सभी 15 अध्याय
Algebra · Vardhman Mahaveer Open University