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दो उपसमितियों का योग, उपसमितियों का अनुलोम योग एवं

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Algebra (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 15

दो उपसमितियों का योग, उपसमितियों का अनुलोम योग एवंअध्ययन नोट्स

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15.1 दो उपसमितियों का योग

व्याख्या

15.1 दो उपसमितियों का योग

इस अनुभाग में दो उपसमितियों के योग की संकल्पना को विस्तार से समझाया गया है। यदि हमारे पास कोई समुच्चय S है और उसकी दो उपसमितियाँ A और B हैं, तो उनका योग (A ∪ B) वह उपसमिति होगी जिसमें वे सभी तत्त्व होंगे जो या तो A में, या B में, या दोनों में उपस्थित हों। इसे उपसमितियों के योग के रूप में जाना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि S = {1, 2, 3, 4} है, A = {1, 2} और B = {2, 3}, तो A ∪ B = {1, 2, 3} होगा। इस प्रक्रिया में, किसी भी तत्त्व की पुनरावृत्ति नहीं होती, अर्थात् प्रत्येक तत्त्व केवल एक बार ही लिखा जाता है। उपसमितियों के योग के लिए कुछ महत्वपूर्ण गुण भी हैं, जैसे कि संक्रियात्मकता, संघटकता, और पहचान तत्त्व का अस्तित्व। इस अनुभाग में इन गुणों को उदाहरणों सहित समझाया गया है।

  • दो उपसमितियों का योग वह उपसमिति है जिसमें दोनों उपसमितियों के सभी तत्त्व शामिल होते हैं।
  • योग में किसी तत्त्व की पुनरावृत्ति नहीं होती।
  • A ∪ B = {x : x ∈ A या x ∈ B}
  • योग संक्रिया संघटक (commutative) और संघटक (associative) होती है।
  • खाली उपसमिति (∅) के साथ किसी भी उपसमिति का योग वही उपसमिति होती है।
  • पूर्ण समुच्चय के साथ किसी भी उपसमिति का योग पूर्ण समुच्चय होता है।
  • 📌 उपसमिति: किसी समुच्चय के तत्त्वों का कोई भी भाग।
  • 📌 योग (Union): दो उपसमितियों के सभी तत्त्वों का समुच्चय।

15.2 उपसमितियों का अनुलोम योग

व्याख्या

15.2 उपसमितियों का अनुलोम योग

इस अनुभाग में उपसमितियों के अनुलोम योग (Symmetric Difference) की परिभाषा, गुणधर्म और उदाहरण दिए गए हैं। दो उपसमितियों A और B का अनुलोम योग (A Δ B) वह उपसमिति है जिसमें वे तत्त्व होते हैं जो या तो A में हैं या B में, परंतु दोनों में नहीं। इसे इस प्रकार भी लिखा जाता है: A Δ B = (A ∪ B) − (A ∩ B)। अनुलोम योग का उपयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहाँ हमें केवल वे तत्त्व चाहिए जो दोनों उपसमितियों में एक ही बार आते हैं। इस अनुभाग में अनुलोम योग के संघटक, संक्रियात्मक और अन्य गुणों को विस्तार से समझाया गया है।

  • अनुलोम योग में वे तत्त्व होते हैं जो केवल एक उपसमिति में होते हैं।
  • A Δ B = (A ∪ B) − (A ∩ B)
  • अनुलोम योग संक्रियात्मक (commutative) है।
  • A Δ ∅ = A और A Δ A = ∅
  • अनुलोम योग का परिणाम उपसमिति ही होता है।
  • यह संक्रिया संघटक (associative) भी होती है।
  • 📌 अनुलोम योग: दो उपसमितियों के वे तत्त्व जो केवल एक में हों।
  • 📌 संघटकता: (A Δ B) Δ C = A Δ (B Δ C)

15.3 उपसमितियों का प्रतिच्छेद

व्याख्या

15.3 उपसमितियों का प्रतिच्छेद

इस अनुभाग में उपसमितियों के प्रतिच्छेद (Intersection) की परिभाषा, गुणधर्म और उदाहरण दिए गए हैं। दो उपसमितियों A और B का प्रतिच्छेद (A ∩ B) वह उपसमिति है जिसमें वे तत्त्व होते हैं जो दोनों उपसमितियों में समान रूप से उपस्थित होते हैं। यदि कोई तत्त्व दो