Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
3.1 परिचय
व्याख्या3.1 परिचय
इस अनुभाग में परमाणवीय आबंधन का परिचय दिया गया है। परमाणु और अणु के बीच आबंधन की प्रकृति को समझना ठोस अवस्था भौतिकी में अत्यंत आवश्यक है। परमाणु आपस में विभिन्न प्रकार के आबंधनों के माध्यम से जुड़े रहते हैं, जिससे ठोस पदार्थों की भौतिक और रासायनिक विशेषताएँ निर्धारित होती हैं। परमाणवीय आबंधन के अध्ययन से हम ठोसों की संरचना, स्थायित्व, विद्युत और यांत्रिक गुणों को समझ सकते हैं। इस अध्याय में मुख्यतः आयनिक, सहसंयोजक, धात्विक, वैन डेर वाल्स और हाइड्रोजन आबंधन की चर्चा की गई है। प्रत्येक आबंधन की प्रकृति, गठन की प्रक्रिया, ऊर्जा संबंधी पहलू और ठोसों में उनकी भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।
- परमाणु और अणु के बीच आबंधन ठोसों की संरचना को निर्धारित करता है।
- परमाणवीय आबंधन के विभिन्न प्रकार ठोसों के गुणों को प्रभावित करते हैं।
- आबंधन की ऊर्जा ठोस की स्थायित्व और अन्य गुणों को निर्धारित करती है।
- ठोस अवस्था भौतिकी में आबंधन का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- आबंधन के प्रकार: आयनिक, सहसंयोजक, धात्विक, वैन डेर वाल्स, हाइड्रोजन।
- 📌 परमाणवीय आबंधन: परमाणु या अणु के बीच आकर्षण बल जो उन्हें एक साथ रखता है।
- 📌 आबंधन ऊर्जा: वह ऊर्जा जो आबंधन को तोड़ने के लिए आवश्यक होती है।
3.2 आयनिक आबंधन
अवधारणा3.2 आयनिक आबंधन
आयनिक आबंधन वह आबंधन है जिसमें एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण होता है। यह मुख्यतः धातु और अधातु के बीच बनता है, जहाँ एक परमाणु (धातु) इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन (कैटायन) बनता है और दूसरा परमाणु (अधातु) इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर ऋणायन (एनायन) बनता है। दोनों आयनों के बीच विद्युत आकर्षण बल के कारण आयनिक आबंधन बनता है। आयनिक ठोसों में आयन नियमित रूप से क्रिस्टल जाल में व्यवस्थित होते हैं। आयनिक आबंधन की ऊर्जा को कूलॉम्ब बल द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- आयनिक आबंधन में इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण होता है।
- धनायन और ऋणायन के बीच विद्युत आकर्षण बल मुख्य है।
- आयनिक ठोसों में उच्च गलनांक और कठोरता पाई जाती है।
- आयनिक आबंधन की ऊर्जा कूलॉम्ब बल से संबंधित होती है।
- आयनिक ठोस विद्युत प्रवाह के लिए पिघलने या घुलने पर सक्षम होते हैं।
- 📌 धनायन: वह आयन जो इलेक्ट्रॉन खोकर धनात्मक आवेश प्राप्त करता है।
- 📌 ऋणायन: वह आयन जो इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर ऋणात्मक आवेश प्राप्त करता है।
3.3 सहसंयोजक आबंधन
व्याख्या3.3 सहसंयोजक आबंधन
सहसंयोजक आबंधन वह आबंधन है जिसमें दो या दो से अधिक परमाणु इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं। यह आबंधन मुख्यतः अधातुओं के बीच बनता है। सहसंयोजक आबंधन के कारण ठोसों में अत्यधिक स्थायित्व और कठोरता पाई जाती है। हीरा, ग्रेफाइट, सिलिकॉन, जर्मेनियम आदि में सहसंयोजक
SLM - Solid State Physics (Hindi) के सभी 15 अध्याय
Solid State Physics · Vardhman Mahaveer Open University