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Chapter 15

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Solid State Physics (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 14अध्याय 15 / 15

Chapter 15अध्ययन नोट्स

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15.1 अत्यचालकता की खोज

व्याख्या

15.1 अत्यचालकता की खोज

अत्यचालकता (Superconductivity) की खोज 1911 में डच वैज्ञानिक हीके कैमरलिंग ओनेस (Heike Kamerlingh Onnes) ने की थी। उन्होंने पारे (Mercury) के विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) का अध्ययन अत्यंत निम्न तापमान (लगभग 4.2 K) पर किया। उन्होंने पाया कि जैसे ही तापमान एक निश्चित सीमा (Critical Temperature, T_c) से नीचे जाता है, पारे का प्रतिरोध अचानक शून्य (Zero) हो जाता है। इस घटना को अत्यचालकता कहा गया। अत्यचालकता वह अवस्था है जिसमें कोई पदार्थ शून्य प्रतिरोध दर्शाता है और उसमें से विद्युत धारा बिना किसी ऊर्जा हानि के प्रवाहित हो सकती है। इस खोज ने ठोस अवस्था भौतिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। इसके बाद अन्य तत्वों जैसे सीसा (Lead), टिन (Tin) आदि में भी अत्यचालकता देखी गई। अत्यचालकता का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न धातुओं और मिश्रधातुओं पर प्रयोग किए। अत्यचालकता का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनों के जोड़े (Cooper Pairs) का निर्माण और उनका बंधन है, जो बाद के अध्यायों में विस्तार से समझाया गया है।

  • 1911 में हीके कैमरलिंग ओनेस ने अत्यचालकता की खोज की।
  • पारे का प्रतिरोध 4.2 K पर अचानक शून्य हो गया।
  • अत्यचालकता में पदार्थ शून्य प्रतिरोध दर्शाता है।
  • अत्यचालकता की खोज ने ठोस अवस्था भौतिकी में नई दिशा दी।
  • सीसा, टिन आदि में भी अत्यचालकता देखी गई।
  • अत्यचालकता के लिए क्रांतिक तापमान (T_c) आवश्यक है।
  • 📌 अत्यचालकता: वह अवस्था जिसमें पदार्थ का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है।
  • 📌 क्रांतिक तापमान (T_c): वह तापमान जिसके नीचे पदार्थ अत्यचालक बनता है।

15.2 अत्यचालकता के गुण

अवधारणा

15.2 अत्यचालकता के गुण

अत्यचालकता की अवस्था में पदार्थ कुछ विशेष गुण दर्शाते हैं। सबसे प्रमुख गुण शून्य विद्युत प्रतिरोध है, जिससे उसमें से विद्युत धारा बिना ऊर्जा हानि के प्रवाहित होती है। दूसरा महत्वपूर्ण गुण है - मैस्नर प्रभाव (Meissner Effect), जिसमें अत्यचालक अवस्था में पदार्थ अपने भीतर से चुंबकीय क्षेत्र को पूरी तरह निष्कासित कर देता है। इसके अलावा, अत्यचालकता में तापीय चालकता अत्यधिक बढ़ जाती है, और जौफ का प्रभाव (Josephson Effect) भी देखा जाता है। अत्यचालकता के गुण तापमान, चुंबकीय क्षेत्र और धारा की तीव्रता पर निर्भर करते हैं।

  • अत्यचालकता में विद्युत प्रतिरोध शून्य होता है।
  • मैस्नर प्रभाव के कारण चुंबकीय क्षेत्र निष्कासित होता है।
  • तापीय चालकता अत्यधिक बढ़ जाती है।
  • जौफ का प्रभाव अत्यचालक जोड़ में देखा जाता है।
  • गुण तापमान, चुंबकीय क्षेत्र व धारा पर निर्भर करते हैं।
  • 📌 मैस्नर प्रभाव: अत्यचालक अवस्था में चुंबकीय क्षेत्र का निष्कासन।
  • 📌 जौफ का प्रभाव: अत्यचालक जोड़ में क्वांटम टनलिंग के कारण धारा का प्रवाह।

15.3 अत्यचालकता के प्रकार

परिभाषा

15.3 अत्यचालकता के प्रकार

अत्यचालकता को उनके चुंबकीय गुणों के आधार पर दो प्रकारों में विभाजित किया गया है: (1) प्रकार-I अत्यचालक (Type-I Superconductors) और (2) प्रकार-II अत्यचालक (Type-II Superconductors)। प्रकार-I अत्यचालक वे होते हैं जो केवल एक निश्चित क्रांतिक चुंबकीय क्ष