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Chapter 11

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Solid State Physics (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 15Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

11.1 परिचय

व्याख्या

11.1 परिचय

इस अनुभाग में ठोसों के अधचालकीय गुणों का परिचय दिया गया है। अधचालक (Semiconductor) वे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता धातुओं और कुचालकों के बीच होती है। ये पदार्थ सामान्य तापमान पर कुचालक की तरह व्यवहार करते हैं, परंतु कुछ परिस्थितियों में इनकी चालकता बढ़ जाती है। अधचालकों का अध्ययन ठोस अवस्था भौतिकी में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर, इंटीग्रेटेड सर्किट आदि के निर्माण में प्रयुक्त होते हैं। अधचालकों की चालकता तापमान, अशुद्धियों (डोपिंग) तथा बाह्य क्षेत्रों के प्रभाव से परिवर्तित की जा सकती है। इस खंड में अधचालकों के मूल गुण, उनके प्रकार तथा ठोसों में इलेक्ट्रॉनों की गति के सिद्धांतों की चर्चा की गई है।

  • अधचालक की चालकता धातु और कुचालक के बीच होती है।
  • अधचालकों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है।
  • इनकी चालकता तापमान और डोपिंग से नियंत्रित की जा सकती है।
  • ठोस अवस्था भौतिकी में अधचालकों का विशेष महत्व है।
  • अधचालकों के प्रकार – शुद्ध (Intrinsic) और अशुद्ध (Extrinsic)।
  • 📌 अधचालक: ऐसा पदार्थ जिसकी चालकता धातु और कुचालक के बीच होती है।
  • 📌 डोपिंग: अधचालकों में अशुद्धि मिलाने की प्रक्रिया।

11.2 अधचालकों के प्रकार

अवधारणा

11.2 अधचालकों के प्रकार

अधचालकों को मुख्य रूप से दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है – शुद्ध अधचालक (Intrinsic Semiconductor) और अशुद्ध अधचालक (Extrinsic Semiconductor)। शुद्ध अधचालक वे होते हैं जिनमें केवल एक ही प्रकार के परमाणु होते हैं, जैसे शुद्ध सिलिकॉन या जर्मेनियम। इनकी चालकता बहुत कम होती है क्योंकि इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या कम होती है। अशुद्ध अधचालकों में किसी अन्य तत्व की थोड़ी मात्रा मिलाई जाती है, जिससे उनकी चालकता कई गुना बढ़ जाती है। अशुद्ध अधचालकों को भी दो भागों में बांटा जाता है – एन-प्रकार (n-type) और पी-प्रकार (p-type)। एन-प्रकार अधचालक में पंचम समूह के तत्व (जैसे फास्फोरस) मिलाए जाते हैं, जिससे अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन मिलते हैं। पी-प्रकार अधचालक में तृतीय समूह के तत्व (जैसे बोरॉन) मिलाए जाते हैं, जिससे छिद्र (होल) बनते हैं।

  • अधचालक दो प्रकार के होते हैं – शुद्ध और अशुद्ध।
  • शुद्ध अधचालकों में केवल एक ही तत्व होता है।
  • अशुद्ध अधचालकों में डोपिंग द्वारा चालकता बढ़ाई जाती है।
  • एन-प्रकार में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन, पी-प्रकार में छिद्र होते हैं।
  • डोपिंग से अधचालकों की विद्युत गुणधर्म बदलते हैं।
  • 📌 शुद्ध अधचालक: केवल एक तत्व से बना अधचालक।
  • 📌 अशुद्ध अधचालक: डोपिंग द्वारा चालकता बढ़ाया गया अधचालक।
  • 📌 एन-प्रकार: अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन युक्त अधचालक।

11.3 बैंड सिद्धांत

व्याख्या

11.3 बैंड सिद्धांत

बैंड सिद्धांत ठोसों में इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा अवस्था को समझाने के लिए प्रयुक्त होता है। इसमें बताया गया है कि ठोस में परमाणुओं के पास-पास होने पर उनकी बाह्य कक्षाओं के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा स्तर आपस में मिलकर ऊर्जा बैंड बनाते हैं। मुख्यतः दो बैंड होत