Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
2.1 गति का वर्णन
व्याख्या2.1 गति का वर्णन
गति भौतिकी का एक महत्वपूर्ण विषय है, जो यांत्रिकी की शाखा में आता है। गति का अर्थ है किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होना। जब कोई वस्तु किसी निश्चित दिशा में समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तब वह गतिमान होती है। गति का अध्ययन करने के लिए हमें वस्तु की स्थिति, समय, दूरी, और दिशा को समझना आवश्यक है। गति का वर्णन करने के लिए हम किसी वस्तु की स्थिति को एक निश्चित संदर्भ बिंदु से मापते हैं। इस संदर्भ में, वस्तु की स्थिति को स्थान (position) कहते हैं। गति का अध्ययन करने के लिए समय भी आवश्यक है क्योंकि गति में समय के साथ स्थिति परिवर्तन शामिल होता है। गति को मापने के लिए हम समय के विभिन्न क्षणों पर वस्तु की स्थिति को नोट करते हैं। इस प्रकार, गति का अध्ययन वस्तु की स्थिति और समय के बीच के संबंध को समझने पर आधारित है।
- गति का अर्थ है वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन।
- गति का अध्ययन यांत्रिकी की शाखा में आता है।
- स्थिति को मापने के लिए एक निश्चित संदर्भ बिंदु आवश्यक होता है।
- समय के विभिन्न क्षणों पर वस्तु की स्थिति को नोट करना गति का आधार है।
- गति में दिशा और दूरी दोनों महत्वपूर्ण होते हैं।
- 📌 गति: किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन।
- 📌 स्थिति (Position): वस्तु का स्थान जो किसी संदर्भ बिंदु से मापा जाता है।
- 📌 यांत्रिकी: भौतिकी की वह शाखा जो गति और बल का अध्ययन करती है।
2.2 पथ-लंबाई और विस्थापन
व्याख्या2.2 पथ-लंबाई और विस्थापन
पथ-लंबाई और विस्थापन गति के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पथ-लंबाई वह कुल दूरी है जो कोई वस्तु अपने मार्ग पर तय करती है, चाहे वह मार्ग कैसा भी हो। यह सदैव धनात्मक होती है और इसका मात्रात्मक मान हमेशा शून्य या धनात्मक होता है। दूसरी ओर, विस्थापन वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की सीधी रेखा की दूरी और दिशा को दर्शाता है। विस्थापन एक सदिश राशि है, जिसका अर्थ है कि इसमें दिशा भी शामिल होती है। यदि वस्तु अपनी प्रारंभिक स्थिति पर लौट आती है, तो उसका विस्थापन शून्य होगा, जबकि पथ-लंबाई शून्य नहीं होगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति एक वृत्ताकार मार्ग पर चलता है और प्रारंभिक बिंदु पर वापस आता है, तो उसकी पथ-लंबाई वृत्त की परिधि के बराबर होगी, लेकिन विस्थापन शून्य होगा। इस प्रकार, पथ-लंबाई और विस्थापन में अंतर समझना गति के अध्ययन के लिए आवश्यक है।
- पथ-लंबाई वह कुल दूरी है जो वस्तु ने तय की है।
- पथ-लंबाई सदैव धनात्मक होती है।
- विस्थापन वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की दूरी और दिशा है।
- विस्थापन एक सदिश राशि है, जिसमें दिशा शामिल होती है।
- यदि वस्तु प्रारंभिक बिंदु पर लौटती है तो विस्थापन शून्य होगा।
- 📌 पथ-लंबाई: वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी।
- 📌 विस्थापन: वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की सीधी दूरी और दिशा।
- 📌 सदिश राशि: वह राशि जिसमें मात्रात्मक मान के साथ दिशा भी होती है।
2.3 औसत वेग और औसत चाल
व्याख्या2.3 औसत वेग और औसत चाल
औसत वेग और औसत चाल गति के विश्लेषण के लिए आवश्यक मापदंड हैं। औसत चाल (Average Speed) को कुल तय की गई दूरी (पथ-लंबाई) को कुल समय से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है। यह एक स्केलर राशि है, जिसका अर्थ है कि इसमें दिशा शामिल नहीं होती। औसत वेग (Average
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.2.1 नीचे दिए गए गति के कौन से उदाहरणों में वस्तु को लगभग बिंदु वस्तु माना जा सकता है : (a) दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोई रेलगाड़ी। (b) किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ति के ऊपर बैठा कोई बंदर। (c) जमीन से टकरा कर तेजी से मुड़ने वाली क्रिकेट की कोई फिरकती गेंद। (d) किसी मेज के किनारे से फिसल कर गिरा कोई बीकर।
उत्तर:
वस्तु को बिंदु वस्तु तभी माना जा सकता है जब उसकी भौतिक आयामों को नजरअंदाज किया जा सके और वह केवल एक बिंदु के रूप में व्यवहार करे। (a) रेलगाड़ी: लंबी वस्तु है, लेकिन यदि हम उसकी गति को केवल दो स्टेशनों के बीच देखें और झटके को नजरअंदाज करें, तो इसे बिंदु वस्तु माना जा सकता है। (b) बंदर: वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे व्यक्ति के ऊपर बैठा है, बंदर की गति जटिल है, इसलिए इसे बिंदु वस्तु नहीं माना जा सकता। (c) क्रिकेट की गेंद: गेंद का आकार छोटा है और गति के दौरान उसकी स्थिति को बिंदु के रूप में माना जा सकता है, अतः इसे बिंदु वस्तु माना जा सकता है। (d) बीकर: मेज के किनारे से फिसल कर गिर रहा है, इसका आकार छोटा है, इसलिए इसे बिंदु वस्तु माना जा सकता है।
व्याख्या:
बिंदु वस्तु की परिभाषा के अनुसार, यदि वस्तु का आकार उसकी गति के अध्ययन में महत्वपूर्ण न हो तो उसे बिंदु वस्तु माना जाता है। रेलगाड़ी और गेंद तथा बीकर के मामले में यह मान्य है, जबकि बंदर की स्थिति जटिल है।
Q2.2.2 दो बच्चे A व B अपने विद्यालय O से लौट कर अपने-अपने घर क्रमश: P तथा Q को जा रहे हैं। उनके स्थिति-समय (x - t) ग्राफ चित्र 2.9 में दिखाए गए हैं। नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रविष्टियों को चुनिए : (a) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से निकट रहता है। (b) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से पहले चलता है। (c) B/A की तुलना A/B तेज चलता है। (d) A और B घर (एक ही/भिन्न) समय पर पहुँचते हैं। (e) A/B सड़क पर B/A से (एक बार/दो बार) आगे हो जाते हैं।
उत्तर:
इस प्रश्न में ग्राफ के आधार पर सही विकल्प चुनने हैं। (a) A/B की तुलना में B/A विद्यालय से निकट रहता है क्योंकि ग्राफ में B की स्थिति O से कम दूरी पर है। अतः (a) गलत है। (b) A/B विद्यालय से पहले चलता है क्योंकि A का ग्राफ पहले शुरू होता है। अतः (b) सही है। (c) B/A की तुलना में A/B तेज चलता है क्योंकि A का ढाल B से अधिक है। अतः (c) सही है। (d) A और B घर भिन्न समय पर पहुँचते हैं क्योंकि उनके ग्राफ का अंतिम बिंदु अलग-अलग t पर है। अतः (d) गलत है। (e) A/B सड़क पर B/A से दो बार आगे हो जाते हैं क्योंकि ग्राफ में A और B के बीच दो बार क्रॉसिंग होती है। अतः (e) सही है।
व्याख्या:
स्थिति-समय ग्राफ के आधार पर दूरी और समय की तुलना कर सही विकल्प चुने गए हैं। ग्राफ की ढाल गति दर्शाती है, और क्रॉसिंग पॉइंट्स से पता चलता है कि कौन कब आगे है।
Q3.2.3 एक महिला अपने घर से प्रात: 9.00 बजे 2.5 km दूर अपने कार्यालय के लिए सीधी सड़क पर 5 km h⁻¹ चाल से चलती है। वहाँ वह सायं 5.00 बजे तक रहती है और 25 km h⁻¹ की चाल से चल रही किसी ऑटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है। उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का x - t ग्राफ खींचिए।
उत्तर:
समाधान: 1. महिला सुबह 9:00 बजे चलना प्रारंभ करती है। 2. दूरी = 2.5 km, चाल = 5 km/h समय = दूरी/चाल = 2.5/5 = 0.5 घंटे = 30 मिनट इसलिए वह 9:30 बजे कार्यालय पहुँचती है। 3. कार्यालय में वह 5:00 बजे तक रहती है, अर्थात 9:30 से 5:00 तक = 7.5 घंटे 4. वापसी में ऑटो रिक्शा की चाल = 25 km/h समय = 2.5/25 = 0.1 घंटे = 6 मिनट 5. कुल समय रूट: - 9:00 से 9:30 तक चलना - 9:30 से 17:00 तक कार्यालय में रहना - 17:00 से 17:06 तक ऑटो रिक्शा से घर लौटना 6. ग्राफ में x-अक्ष पर दूरी (km), y-अक्ष पर समय (घंटे) लें। 7. ग्राफ में 0 से 0.5 घंटे तक दूरी बढ़ेगी (0 से 2.5 km), फिर दूरी स्थिर रहेगी (कार्यालय में), फिर 7.5 से 7.6 घंटे के बीच दूरी घटेगी (2.5 से 0 km)।
व्याख्या:
गति, दूरी और समय के सूत्र का उपयोग कर समय निकालकर ग्राफ के लिए बिंदु निर्धारित किए गए। ग्राफ में दूरी समय के साथ बढ़ती, स्थिर और घटती है।
Q4.2.4 कोई शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद फिर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है। उसका हर कदम 1m लंबा है और 1s समय लगता है। उसकी गति का x - t ग्राफ खींचिए। ग्राफ से तथा किसी अन्य विधि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहां से चलना प्रारंभ करता है वहाँ से 13 m दूर किसी गड्ढे में कितने समय पश्चात गिरता है।
उत्तर:
समाधान: 1. प्रत्येक चक्र में (5 कदम आगे - 3 कदम पीछे) कुल 2 कदम की शुद्ध प्रगति होती है। 2. प्रत्येक कदम 1 m लंबा है, इसलिए शुद्ध प्रगति = 2 m प्रति 2 सेकंड (5 कदम आगे में 5 सेकंड, 3 कदम पीछे में 3 सेकंड, कुल 8 सेकंड) 3. परंतु प्रश्न में कहा गया है हर कदम 1 s लेता है, इसलिए 5 कदम आगे = 5 s, 3 कदम पीछे = 3 s, कुल 8 s में 2 m आगे बढ़ता है। 4. गति का x-t ग्राफ: - 0 से 5 s: दूरी बढ़ेगी 0 से 5 m तक (सीधी रेखा) - 5 से 8 s: दूरी घटेगी 5 m से 2 m तक (सीधी रेखा) - 8 से 13 s: फिर 5 m आगे (2 m से 7 m) - 13 से 16 s: फिर 3 m पीछे (7 m से 4 m) - इसी प्रकार आगे बढ़ेगा। 5. अब गड्ढा 13 m दूर है। हर 8 s में 2 m आगे बढ़ता है। 6. पहले 5 s में 5 m, फिर 3 s में 3 m पीछे, कुल शुद्ध 2 m प्रति 8 s। 7. 13 m तक पहुंचने के लिए: - पहले 5 s में 5 m - फिर 8 s में 2 m (कुल 7 m) - फिर अगले 8 s में 2 m (कुल 9 m) - फिर अगले 8 s में 2 m (कुल 11 m) - फिर अगले 8 s में 2 m (कुल 13 m) 8. कुल समय = 5 + 8*4 = 5 + 32 = 37 s अतः शराबी 37 सेकंड में 13 m दूर गड्ढे में गिर जाएगा।
व्याख्या:
चरणों में आगे-पीछे की दूरी और समय निकालकर कुल समय ज्ञात किया गया। ग्राफ में दूरी समय के साथ बढ़ती और घटती है।
Q5.2.5 कोई जेट वायुयान 500 km h⁻¹ की चाल से चल रहा है और यह जेट यान के सापेक्ष 1500 km h⁻¹ की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है। जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी?
उत्तर:
समाधान: जेट विमान की चाल, v₁ = 500 km/h दहन उत्पादों की चाल विमान के सापेक्ष, v₂ = 1500 km/h जमीन पर खड़े प्रेक्षक के सापेक्ष दहन उत्पादों की चाल = v = v₁ + v₂ = 500 + 1500 = 2000 km/h अतः दहन उत्पादों की चाल जमीन पर खड़े प्रेक्षक के सापेक्ष 2000 km/h होगी।
व्याख्या:
गतियों का संचयन नियम लागू करते हुए, वस्तु की कुल चाल उसके संदर्भ फ्रेम की चाल और उसके सापेक्ष चाल का योग होती है।
Q6.2.6 सीधे राजमार्ग पर कोई कार 126 km h⁻¹ की चाल से चल रही है। इसे 200 m की दूरी पर रोक दिया जाता है। कार के मंदन को एकसमान मानिए और इसका मान निकालिए। कार को रूकने में कितना समय लगा?
उत्तर:
दिया गया: प्रारंभिक वेग, u = 126 km/h = 126 × (1000/3600) m/s = 35 m/s अंतिम वेग, v = 0 (कार रुकती है) दूरी, s = 200 m मंदन (त्वरण), a = ? समय, t = ? सूत्र: v² = u² + 2as 0 = (35)² + 2 × a × 200 => 0 = 1225 + 400a => a = -1225/400 = -3.0625 m/s² मंदन = -3.06 m/s² (नकारात्मक क्योंकि गति घट रही है) अब समय निकालें: v = u + at 0 = 35 + (-3.0625) t => t = 35 / 3.0625 ≈ 11.43 s अतः मंदन का मान -3.06 m/s² है और कार को रुकने में लगभग 11.43 सेकंड लगते हैं।
व्याख्या:
समान त्वरण वाली गति के सूत्रों का उपयोग कर मंदन और समय निकाले गए।
Q7.2.7 कोई खिलाड़ी एक गेंद को ऊपर की ओर आरंभिक चाल 29 m s⁻¹ से फेंकता है, (i) गेंद की ऊपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा क्या होगी? (ii) इसकी गति के उच्चतम बिंदु पर गेंद के वेग व त्वरण क्या होंगे? (iii) गेंद के उच्चतम बिंदु पर स्थान व समय को x = 0 व t = 0 चुनिए, ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर की दिशा को x-अक्ष की धनात्मक दिशा मानिए। गेंद की ऊपर की व नीचे की ओर गति के दौरान स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न बताइए। (iv) किस ऊँचाई तक गेंद ऊपर जाती है और कितनी देर के बाद गेंद खिलाड़ी के हाथों में आ जाती है? [g = 9.8 m s⁻² तथा वायु का प्रतिरोध नगण्य है।]
उत्तर:
दिया गया: प्रारंभिक वेग, u = 29 m/s (ऊपर की ओर) गुरुत्वाकर्षण त्वरण, g = 9.8 m/s² (नीचे की ओर) (i) ऊपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा नीचे की ओर होगी क्योंकि गुरुत्वाकर्षण हमेशा नीचे की ओर कार्य करता है। (ii) उच्चतम बिंदु पर वेग v = 0 होगा क्योंकि गेंद रुकती है। त्वरण g = 9.8 m/s² नीचे की ओर रहेगा। (iii) x = 0 और t = 0 उच्चतम बिंदु पर लेते हैं। नीचे की ओर धनात्मक दिशा मानते हैं। - ऊपर की ओर गति के दौरान: स्थिति x < 0 (क्योंकि ऊपर की ओर है, और नीचे की ओर धनात्मक है) वेग v < 0 (ऊपर की ओर) त्वरण a > 0 (नीचे की ओर) - नीचे की ओर गति के दौरान: स्थिति x > 0 वेग v > 0 त्वरण a > 0 (iv) ऊँचाई H तक जाने का समय: u = 29 m/s (ऊपर की ओर) v = 0 (ऊँचाई पर) v = u - g t 0 = 29 - 9.8 t => t = 29 / 9.8 ≈ 2.96 s ऊँचाई H: H = u t - (1/2) g t² = 29 × 2.96 - 0.5 × 9.8 × (2.96)² = 85.84 - 42.9 = 42.94 m कुल समय गेंद के हाथों में लौटने का = ऊपर जाने का समय + नीचे आने का समय = 2 × 2.96 = 5.92 s अतः गेंद लगभग 42.94 m ऊँचाई तक जाती है और 5.92 सेकंड में वापस खिलाड़ी के हाथों में आती है।
व्याख्या:
गति के सूत्रों का उपयोग कर समय, ऊँचाई और गति के चिह्न निर्धारित किए गए। गुरुत्वाकर्षण त्वरण की दिशा और वेग के चिह्न समझाए गए।
Q8.2.8 नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण बताते हुए व उदाहरण देते हुए बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य, एकविमीय गति में किसी कण की (a) किसी क्षण चाल शून्य होने पर भी उसका त्वरण अशून्य हो सकता है। (b) चाल शून्य होने पर भी उसका वेग अशून्य हो सकता है। (c) चाल स्थिर हो तो त्वरण अवश्य ही शून्य होना चाहिए। (d) चाल अवश्य ही बढ़ती रहेगी, यदि उसका त्वरण धनात्मक हो।
उत्तर:
(a) सत्य है। उदाहरण: किसी वस्तु का वेग क्षणिक रूप से शून्य हो सकता है (जैसे ऊपर फेंकी गई गेंद का उच्चतम बिंदु), पर त्वरण गुरुत्वाकर्षण के कारण शून्य नहीं होता। (b) असत्य है। वेग की परिभाषा चाल की दिशा सहित होती है, और यदि चाल शून्य है तो वेग भी शून्य होगा। (c) असत्य है। चाल स्थिर होने का अर्थ है वेग का परिमाण स्थिर है, लेकिन दिशा बदल सकती है, जिससे त्वरण हो सकता है (जैसे वृत्तीय गति)। (d) असत्य है। धनात्मक त्वरण का अर्थ है चाल बढ़ रही है यदि त्वरण और चाल की दिशा समान हो, लेकिन यदि वे विपरीत दिशा में हों तो चाल घट सकती है।
व्याख्या:
गति और त्वरण के परिभाषाओं के आधार पर प्रत्येक कथन की सत्यता और उदाहरण दिए गए हैं।
Bhautiki-I के सभी 7 अध्याय
Physics · Class 11