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Chapter 11

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - History of India (Earliest Time to 1200 AD) (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 19Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में दक्षिण भारत के संगमकाल का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया गया है। संगमकालीन सभ्यता दक्षिण भारत के तमिल क्षेत्र में विकसित हुई थी, जिसका समय लगभग ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से ईसा की तीसरी शताब्दी तक माना जाता है। यह काल तमिल साहित्य, समाज और राजनीति के विकास के लिए प्रसिद्ध है। संगम शब्द का अर्थ है 'सभा' या 'सम्मेलन', जिसमें विद्वानों और कवियों ने एकत्र होकर साहित्य की रचना की। इस काल के साहित्य को संगम साहित्य कहा जाता है, जो तत्कालीन समाज, संस्कृति, राजनीति, अर्थव्यवस्था और धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण स्रोत है। संगमकालीन समाज में चोल, चेर और पांड्य जैसे प्रमुख राजवंशों का उल्लेख मिलता है। इस काल के ग्रंथों में तत्कालीन जीवन के विविध पक्षों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

  • संगमकाल दक्षिण भारत के तमिल क्षेत्र में विकसित हुआ।
  • इस काल का समय ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से ईसा की तीसरी शताब्दी तक है।
  • संगम का अर्थ सभा या सम्मेलन है।
  • संगम साहित्य तत्कालीन समाज का दर्पण है।
  • चोल, चेर और पांड्य प्रमुख राजवंश थे।
  • संगमकालीन साहित्य में समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था का उल्लेख मिलता है।
  • 📌 संगम: विद्वानों की सभा, जहाँ साहित्य की रचना होती थी।
  • 📌 संगम साहित्य: संगम सभाओं में रचित तमिल ग्रंथ।

संगमकालीन साहित्य : स्वरूप और विशेषताएँ

व्याख्या

संगमकालीन साहित्य : स्वरूप और विशेषताएँ

संगमकालीन साहित्य तमिल भाषा में रचित प्राचीनतम साहित्य है। इसे तीन संगमों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रथम और द्वितीय संगम के अधिकांश ग्रंथ लुप्त हो चुके हैं, जबकि तृतीय संगम के ग्रंथ उपलब्ध हैं। संगम साहित्य को दो भागों में बाँटा जाता है—'एट्टुत्तोकाई' (आठ संग्रह) और 'पट्टुप्पाट्टु' (दस गीत)। इसमें कुल 18 प्रमुख ग्रंथ हैं। संगम साहित्य की प्रमुख विशेषता इसकी यथार्थपरकता है, जिसमें तत्कालीन समाज, प्रकृति, प्रेम, युद्ध, वीरता, कृषि, व्यापार, धार्मिक विश्वास आदि का सजीव चित्रण मिलता है। इसमें नायक-नायिका के प्रेम, वीरता, युद्ध, मृत्यु, प्रकृति का सुंदर वर्णन है। संगम साहित्य में 'अहम्' (व्यक्तिगत भावनाएँ) और 'पुरम्' (सामाजिक विषय) दो प्रमुख विषय हैं।

  • संगम साहित्य तमिल भाषा का प्राचीनतम साहित्य है।
  • तीन संगमों में विभाजन, तृतीय संगम के ग्रंथ उपलब्ध।
  • एट्टुत्तोकाई और पट्टुप्पाट्टु दो प्रमुख संग्रह।
  • 18 प्रमुख संगम ग्रंथ उपलब्ध हैं।
  • साहित्य में यथार्थपरकता और सामाजिक जीवन का चित्रण।
  • अहम् और पुरम् दो मुख्य विषय।
  • 📌 एट्टुत्तोकाई: आठ संग्रहों का समूह।
  • 📌 पट्टुप्पाट्टु: दस गीतों का संग्रह।
  • 📌 अहम्: व्यक्तिगत भावनाओं पर आधारित विषय।

संगम सभाएँ : स्वरूप और ऐतिहासिकता

व्याख्या

संगम सभाएँ : स्वरूप और ऐतिहासिकता

संगम सभाएँ तमिल विद्वानों और कवियों की वह संस्था थी, जहाँ साहित्यिक रचनाएँ होती थीं। संगम सभाओं की परंपरा के अनुसार, तीन संगम हुए—प्रथम मदुरै में, द्वितीय कापाटपुरम में और तृतीय पुनः मदुरै में। प्रथम और द्वितीय संगम के अधिकांश ग्रंथ नष्ट हो गए, तृतीय