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Chapter 1

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Thermal and Statistical Physics (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
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Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

1.1 ऊष्मागतिकीय साध्य का परिचय

व्याख्या

1.1 ऊष्मागतिकीय साध्य का परिचय

ऊष्मागतिकीय साध्य (Thermodynamic Equilibrium) ऊष्मागतिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है, जिसमें किसी प्रणाली की ऐसी अवस्था को दर्शाया जाता है जहाँ उसके सभी भागों में कोई भी परिवर्तन स्वतः नहीं होता। अर्थात्, जब कोई प्रणाली ऊष्मागतिकीय साध्य में होती है, तो उसमें ताप, दाब, रासायनिक संघटन आदि में कोई परिवर्तन नहीं होता। यह स्थिति तब प्राप्त होती है जब प्रणाली के सभी भाग आपस में तथा बाहरी वातावरण के साथ संतुलन में होते हैं। ऊष्मागतिकीय साध्य की अवधारणा ऊष्मागतिकी के नियमों को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसी आधार पर हम ऊष्मा, कार्य, ऊर्जा, तथा अन्य ऊष्मागतिकीय राशियों का अध्ययन करते हैं। ऊष्मागतिकीय साध्य प्राप्त करने के लिए तीन प्रकार के संतुलन आवश्यक होते हैं: 1. तापीय संतुलन (Thermal Equilibrium): प्रणाली के सभी भागों का ताप समान होना चाहिए। 2. यांत्रिक संतुलन (Mechanical Equilibrium): प्रणाली के सभी भागों में दाब समान होना चाहिए। 3. रासायनिक संतुलन (Chemical Equilibrium): प्रणाली के सभी भागों में रासायनिक संघटन समान होना चाहिए, अर्थात् कोई रासायनिक अभिक्रिया स्वतः नहीं हो रही हो। यदि इन तीनों संतुलनों में से कोई भी संतुलन नहीं है, तो प्रणाली ऊष्मागतिकीय साध्य में नहीं मानी जाएगी। ऊष्मागतिकीय साध्य की अवधारणा का उपयोग ऊष्मागतिकी के नियमों, जैसे शून्यवाँ नियम, प्रथम नियम, द्वितीय नियम आदि को समझने में किया जाता है। यह अवधारणा हमें बताती है कि किसी प्रणाली की स्थिति को किन-किन चर राशियों द्वारा व्यक्त किया जा सकता है तथा उनका आपसी संबंध क्या है।

  • ऊष्मागतिकीय साध्य वह अवस्था है जिसमें प्रणाली के सभी भागों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  • तापीय, यांत्रिक एवं रासायनिक संतुलन का होना आवश्यक है।
  • ऊष्मागतिकीय साध्य प्राप्त होने पर ताप, दाब, संघटन आदि स्थिर रहते हैं।
  • यह अवधारणा ऊष्मागतिकी के नियमों की नींव है।
  • ऊष्मागतिकीय साध्य के बिना ऊष्मागतिकीय विश्लेषण संभव नहीं।
  • 📌 ऊष्मागतिकीय साध्य: वह अवस्था जिसमें प्रणाली के सभी भागों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
  • 📌 तापीय संतुलन: ताप का संतुलन, सभी भागों का ताप समान।
  • 📌 यांत्रिक संतुलन: दाब का संतुलन, सभी भागों का दाब समान।

1.2 ऊष्मागतिकीय प्रणाली और उसके प्रकार

अवधारणा

1.2 ऊष्मागतिकीय प्रणाली और उसके प्रकार

ऊष्मागतिकीय प्रणाली (Thermodynamic System) वह भाग है जिसे हम ऊष्मागतिकीय अध्ययन के लिए चुनते हैं। इसके चारों ओर शेष भाग को परिवेश (Surroundings) कहते हैं। प्रणाली और परिवेश के बीच एक काल्पनिक या वास्तविक सीमा (Boundary) होती है, जो दोनों को अलग करती है। ऊष्मागतिकीय प्रणालियों को उनके गुणों के आधार पर तीन प्रकारों में बाँटा जाता है: 1. खुली प्रणाली (Open System): इसमें द्रव्य और ऊर्जा दोनों का आदान-प्रदान प्रणाली और परिवेश के बीच संभव होता है। उदाहरण: उबलता हुआ पानी जिसमें भाप बाहर निकलती है। 2. बंद प्रणाली (Closed System): इसमें केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान संभव होता है, द्रव्य का नहीं। उदाहरण: बंद ढक्कन वाले बर्तन में उबलता पानी। 3. पृथक प्रणाली (Isolated System): इसमें न तो द्रव्य और न ही ऊर्जा का आदान-प्रदान संभव होता है। उदाहरण: आदर्श थर्मस फ्लास्क। प्रणाली की सीमा (Boundary) स्थिर या गतिशील हो सकती है, और यह वास्तविक (जैसे बर्तन की दीवार) या काल्पनिक (जैसे गणितीय रेखा) भी हो सकती है।

  • ऊष्मागतिकीय प्रणाली अध्ययन का चयनित भाग है।
  • प्रणाली और परिवेश के बीच सीमा होती है।
  • प्रणाली तीन प्रकार की होती है: खुली, बंद, पृथक।
  • खुली प्रणाली में द्रव्य और ऊर्जा दोनों का आदान-प्रदान होता है।
  • बंद प्रणाली में केवल ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है।
  • पृथक प्रणाली में कोई आदान-प्रदान नहीं होता।
  • 📌 ऊष्मागतिकीय प्रणाली: अध्ययन के लिए चयनित भाग।
  • 📌 परिवेश: प्रणाली के बाहर का भाग।
  • 📌 सीमा: प्रणाली और परिवेश को अलग करने वाली रेखा।

1.3 ऊष्मागतिकीय चर और अवस्थाएँ

परिभाषा

1.3 ऊष्मागतिकीय चर और अवस्थाएँ

ऊष्मागतिकीय चर (Thermodynamic Variables) वे राशियाँ हैं जिनके मान से प्रणाली की ऊष्मागतिकीय अवस्था निर्धारित होती है। ये चर दो प्रकार के होते हैं: 1. व्यापक चर (Extensive Variables): ये प्रणाली के आकार या द्रव्यमान पर निर्भर करते हैं, जैसे द्रव्यमान