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जैव-अणु | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जैव-अणु | Class 12 Chemistry Notes

जैव-अणु – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जैव-अणु from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

10.1.2.1 ग्लूकोस

ग्लूकोस प्रकृति में मुक्त या संयुक्त रूप में पाया जाता है। यह मीठे फलों, शहद और पके हुए अंगूर में प्रचुर मात्रा में होता है। ग्लूकोस को सूक्रोस के अम्लीय जलअपघटन से और स्टार्च के जलअपघटन से भी प्राप्त किया जा सकता है।

ग्लूकोस का आण्विक सूत्र C₆H₁₂O₆ है। HI के साथ लंबे समय तक गरम करने पर यह n-हैक्सेन देता है, जो यह दर्शाता है कि सभी छह कार्बन परमाणु एक ऋतु श्रृंखला में जुड़े हैं। ग्लूकोस हाइड्रॉक्सिल ऐमीन के साथ अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन सायनाइड के साथ सायनोहाइड्रिन बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति की पुष्टि करता है।

ग्लूकोस ब्रोमीन जल जैसे दुर्बल ऑक्सीकरण कर्मक द्वारा ऑक्सीकरण से ग्लूकोनिक अम्ल बनाता है, जो इसके ऐल्डिहाइड समूह की उपस्थिति दर्शाता है। ग्लूकोस के पाँच –OH समूहों की उपस्थिति इसकी ऐसीटिलन अभिक्रिया से सिद्ध होती है।

ग्लूकोस की संरचना में दो भिन्न क्रिस्टलीय रूप होते हैं, α और β, जो चक्रीय हैमीऐसीटैल संरचना बनाते हैं। ये दोनों रूप पाइरैनोस संरचना के अंतर्गत आते हैं, जिसमें छः सदस्यीय वलय होता है। ग्लूकोस का D(+) विन्यास होता है, जो इसके सबसे नीचे असममित कार्बन पर –OH समूह की स्थिति से निर्धारित होता है।

📊 Diagram: 6. ग्लूकोस तथा ग्लूकोनिक अम्ल दोनों ही नाइट्रिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण से एक डाइकार्बॉक्सिलिक अम्ल, सैकेरिक अम्ल बनाते हैं। यह ग्लूकोस में प्राथमिक ऐल्कोहॉलिक समूह की उपस्थिति को दर्शाता है।; बहुत से अन्य अनेक गुणों के अध्ययन के उपरांत फिशर ने विभिन्न -OH समूहों की सही दिक्-स्थान व्यवस्था को दर्शाया। इसका सही विन्यास संरचना I द्वारा निरूपित होता है। ग्लूकोनिक अम्ल को संरचना II तथा सैकेरिक अम्ल को संरचना III द्वारा निरूपित करते हैं।; ग्लूकोस की सही रूप में D(+) – ग्लूकोस नाम देते हैं। ग्लूकोस के नाम से पहले लिखा 'D' इसके विन्यास को निरूपित करता है जबकि '( + )' अणु की दक्षिण ध्रुवण घूर्णकता को निरूपित करता है। यह स्मरणीय है कि 'D' व 'L' का, यौगिक की ध्रुवण घूर्णकता से कोई संबंध नहीं है एवं इनका शब्द 'd' तथा 'l' से भी कोई संबंध नहीं है (एकक-6 देखें) 'D' व 'L' संकेत चिह्नों को अर्थ नीचे दिया गया है।; D-(+)- ग्लिसरैल्डिहाइड; D-(+)- ग्लूकोस; पाइरैन; α – D – (+) – ग्लूकोपाइरैनोस; β – D – (+) – ग्लूकोपाइरैनोस

🔗 Connection: अगला खंड फ्रक्टोज के बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जो एक अन्य महत्वपूर्ण मोनोसैकेराइड है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10.1 मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?

मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के सबसे सरल रूप होते हैं, जो जल में घुलनशील होते हैं और जिनका सामान्य सूत्र (CH2O)n होता है। ये शर्करा के ऐसे अणु होते हैं जिन्हें और सरल शर्करा में विभाजित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए ग्लूकोज, फ्रक्टोज।

10.2 अपचायी शर्करा क्या होती है?

अपचायी शर्करा वे शर्कराएँ होती हैं जिन्हें हमारे पाचन तंत्र में पचाया नहीं जा सकता। ये शर्कराएँ हमारे शरीर में अवशोषित नहीं होतीं। उदाहरण के लिए सेलुलोज।

10.3 पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।

पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्य हैं: 1. ऊर्जा का स्रोत: कार्बोहाइड्रेट पौधों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं। 2. संरचनात्मक भूमिका: जैसे सेलुलोज पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक होता है, जो उन्हें कठोरता और संरचना प्रदान करता है।

10.4 निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए—राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज तथा लैक्टोस

मोनोसैकेराइड: राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज डाइसैकेराइड: माल्टोस, लैक्टोस

व्याख्या:

  • मोनोसैकेराइड सरल शर्कराएँ हैं जो टूटती नहीं हैं।
  • डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड के यौगिक होते हैं। माल्टोस ग्लूकोज के दो अणुओं से बना होता है और लैक्टोस ग्लूकोज तथा गैलैक्टोस से।

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