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जैव-अणु | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जैव-अणु | Class 12 Chemistry Notes

जैव-अणु – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जैव-अणु from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

10.1.4 पॉलिसैकैराइड

पॉलिसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के बहुलक होते हैं जिनमें बहुत सारी मोनोसैकेराइड इकाइयाँ ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा जुड़ी होती हैं। ये मुख्यतः भोजन संग्रहण और संरचनात्मक कार्य करते हैं।

(i) स्टार्च: यह पौधों में मुख्य संग्रहित पॉलिसैकेराइड है और मानव आहार का मुख्य स्रोत है। यह α-ग्लूकोस का बहुलक होता है और दो घटकों – ऐमिलोस और ऐमिलोपेक्टिन – से मिलकर बनता है। ऐमिलोस जल में घुलनशील होता है और स्टार्च का 15-20% भाग बनाता है। यह α-D-(+)-ग्लूकोस इकाइयों की अशाखित शृंखला होती है। ऐमिलोपेक्टिन जल में अविलेय होता है और स्टार्च का 80-85% भाग बनाता है। यह α-D-ग्लूकोस इकाइयों की शाखित शृंखला होती है।

(ii) सेलुलोस: यह केवल पौधों में पाया जाता है और वनस्पति जगत में सबसे प्रचुर कार्बनिक पदार्थ है। यह पौधों की कोशिका भित्ति का प्रधान अवयव है। सेलुलोस β-D-ग्लूकोस से बनी ऋतु शृंखला युक्त पॉलिसैकेराइड है जिसमें C₁ और C₄ के बीच β-ग्लाइकोसाइडी बंध होता है।

(iii) ग्लाइकोजन: यह प्राणी शरीर में कार्बोहाइड्रेट का संग्रहित रूप है। इसकी संरचना ऐमिलोपेक्टिन के समान होती है, पर अधिक शाखित होती है। यह यकृत, मांसपेशियों और मस्तिष्क में पाया जाता है। जब शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है, तो एन्जाइम ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में तोड़ देते हैं।

📊 Diagram: III. ग्लाइकोजन– प्राणी शरीर में कार्बोहाइड्रेट, ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित रहता है। चूँकि इसकी संरचना ऐमिलोपेक्टिन के समान होती है, अत: इसे प्राणी स्टार्च भी कहा जाता है एवं यह ऐमिलोपेक्टिन से अधिक शाखित होता है। यह यकृत, मांसपेशियों तथा मस्तिष्क में उपस्थित रहता है। जब शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है, एन्जाइम, ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में तोड़ देते हैं।; II. सेलुलोस– सेलुलोस विशिष्ट रूप से केवल पौधों में मिलता है तथा यह वनस्पति जगत में प्रचुरता में उपलब्ध कार्बनिक पदार्थ है। यह पौधों की कोशिकाओं की कोशिका भित्ति का प्रधान अवयव है। सेलुलोस, β-D-ग्लूकोस से बनी ऋतु शृंखला युक्त पॉलिसैकैराइड है जिसमें एक ग्लूकोस इकाई के C₁ तथा दूसरी ग्लूकोस इकाई के C₄ के मध्य ग्लाइकोसाइडी बंध बनता है।; जेव-अणु 295

🔗 Connection: अगला खंड कार्बोहाइड्रेटों के महत्व और उनके जैविक कार्यों पर प्रकाश डालता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10.1 मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?

मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के सबसे सरल रूप होते हैं, जो जल में घुलनशील होते हैं और जिनका सामान्य सूत्र (CH2O)n होता है। ये शर्करा के ऐसे अणु होते हैं जिन्हें और सरल शर्करा में विभाजित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए ग्लूकोज, फ्रक्टोज।

10.2 अपचायी शर्करा क्या होती है?

अपचायी शर्करा वे शर्कराएँ होती हैं जिन्हें हमारे पाचन तंत्र में पचाया नहीं जा सकता। ये शर्कराएँ हमारे शरीर में अवशोषित नहीं होतीं। उदाहरण के लिए सेलुलोज।

10.3 पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।

पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्य हैं: 1. ऊर्जा का स्रोत: कार्बोहाइड्रेट पौधों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं। 2. संरचनात्मक भूमिका: जैसे सेलुलोज पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक होता है, जो उन्हें कठोरता और संरचना प्रदान करता है।

10.4 निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए—राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज तथा लैक्टोस

मोनोसैकेराइड: राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज डाइसैकेराइड: माल्टोस, लैक्टोस

व्याख्या:

  • मोनोसैकेराइड सरल शर्कराएँ हैं जो टूटती नहीं हैं।
  • डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड के यौगिक होते हैं। माल्टोस ग्लूकोज के दो अणुओं से बना होता है और लैक्टोस ग्लूकोज तथा गैलैक्टोस से।

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