Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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10.1 कार्बोहाइड्रेट
व्याख्या10.1 कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट प्राकृतिक कार्बनिक यौगिकों का एक बड़ा समूह हैं, जो मुख्यतः पौधों द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं। इनका सामान्य सूत्र Cₓ(H₂O)ᵧ होता है, इसलिए इन्हें कार्बन के हाइड्रेट के रूप में माना गया है, जिसके कारण इनका नाम कार्बोहाइड्रेट पड़ा। उदाहरणार्थ, ग्लूकोस का सूत्र C₆H₁₂O₆ है, जो C₆(H₂O)₆ के समान है। परंतु सभी यौगिक जो इस सूत्र के अनुरूप हैं, कार्बोहाइड्रेट नहीं होते, जैसे कि ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH)। कार्बोहाइड्रेटों में एक विशिष्ट प्रकार्यात्मक समूह होता है जो जलअपघटन के दौरान ध्रुवण घूर्णक पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन इकाइयाँ देता है। मीठे स्वाद वाले कार्बोहाइड्रेटों को शर्करा कहा जाता है, जैसे सूक्रोस। दुग्ध में पाए जाने वाली शर्करा को लैक्टोस कहते हैं। कार्बोहाइड्रेटों को सैकेराइड भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है शर्करा। ये जीवों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं और पौधों तथा प्राणियों में जीवन के लिए आवश्यक हैं।
- कार्बोहाइड्रेट प्राकृतिक कार्बनिक यौगिक हैं, जिनका सामान्य सूत्र Cₓ(H₂O)ᵧ होता है।
- सभी यौगिक जो इस सूत्र के अनुरूप हैं, कार्बोहाइड्रेट नहीं होते, उदाहरण के लिए ऐसीटिक अम्ल।
- कार्बोहाइड्रेटों में ध्रुवण घूर्णक पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होते हैं।
- मीठे स्वाद वाले कार्बोहाइड्रेटों को शर्करा कहा जाता है, जैसे सूक्रोस।
- कार्बोहाइड्रेटों को सैकेराइड भी कहा जाता है।
- ये जीवों के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं।
- 📌 कार्बोहाइड्रेट: प्राकृतिक कार्बनिक यौगिक जिनका सामान्य सूत्र Cₓ(H₂O)ᵧ होता है।
- 📌 शर्करा: मीठे स्वाद वाले कार्बोहाइड्रेट।
- 📌 सैकेराइड: कार्बोहाइड्रेट का एक अन्य नाम।
10.1.1 कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण
व्याख्या10.1.1 कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरण
कार्बोहाइड्रेटों को उनके जलअपघटन के व्यवहार के आधार पर तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है: (i) मोनोसैकेराइड, (ii) ओलिगोसैकेराइड, और (iii) पॉलिसैकेराइड। (i) मोनोसैकेराइड वे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें और छोटे यौगिकों में जल अपघटित नहीं किया जा सकता। लगभग 20 मोनोसैकेराइड प्रकृति में ज्ञात हैं, जैसे ग्लूकोस, फ्रक्टोज, राइबोस। (ii) ओलिगोसैकेराइड वे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिनके जलअपघटन से 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइयाँ प्राप्त होती हैं। इन्हें डाइसैकेराइड, ट्राइसैकेराइड आदि में वर्गीकृत किया जाता है। डाइसैकेराइड सबसे प्रमुख हैं, जैसे सूक्रोस, माल्टोस। (iii) पॉलिसैकेराइड वे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिनके जलअपघटन पर बहुत अधिक संख्या में मोनोसैकेराइड इकाइयाँ प्राप्त होती हैं। ये स्वाद में मीठे नहीं होते, इसलिए इन्हें अशर्करा भी कहा जाता है। उदाहरण हैं स्टार्च, सेलुलोस, ग्लाइकोजन। कार्बोहाइड्रेटों को अपचायी और अनपचायी शर्करा में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। अपचायी शर्करा वे होती हैं जो फेलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक को अपचित कर देती हैं। सभी मोनोसैकेराइड अपचायी शर्करा होती हैं। **Table on page 2 (6×4)** | कार्बन परमाणु | सामान्य पद | ऐल्डिहाइड | कीटोन | | --- | --- | --- | --- | | 3 | ट्रायोस | ऐल्डोट्रायोस | कीटोट्रायोस | | 4 | टेट्रोस | ऐल्डोटेट्रोस | कीटोटेट्रोस | | 5 | पेन्टोस | ऐल्डोपेन्टोस | कीटोपेन्टोस | | 6 | हैक्सोज | ऐल्डोहैक्सोज | कीटो हैक्सोस | | 7 | हेप्टोस | ऐल्डोहैप्टोस | कीटोहैप्टोस | **Table on page 11 (6×4)** | ऐमीनो अम्ल का नाम | पार्श्व शृंखला R का विशिष्ट लक्षण | 3-अक्षर प्रतीक | एक अक्षर कोड | | --- | --- | --- | --- | | 1. ग्लाइसीन | H | Gly | G | | 2. ऐलानिन | – CH₃ | Ala | A | | 3. वैलीन* | (H₃C)₂CH- | Val | V | | 4. ल्यूसीन* | (H₃C)₂CH-CH₂- | Leu | L | | 5. आइसोल्यूसीन* | H₃C-CH₂-CH- **Table on page 11 (3×4)** | 7. लाइसीन* | H₂N-(CH₂)₄- | Lys | K | | 8. ग्लूटैमिक अम्ल | HOOC-CH₂-CH₂- | Glu | E | | 9. ऐस्पार्टिक अम्ल | HOOC-CH₂- | Asp | D | | 10. ग्लूटेसीन | H₂N-C-CH₂-CH₂- **Table on page 11 (7×4)** || | Gln | Q | | 11. ऐस्पेराजीन | H₂N-C-CH₂- | Asn | N | | 12. थ्रिऑनीन* | H₃C-CHOH- | Thr | T | | 13. सेरीन | HO-CH₂- | Ser | S | | 14. सिस्टीन | HS-CH₂- | Cys | C | | 15. मेथाइओनिन* | H₃C-S-CH₂-CH₂- | Met | M | | 16. फ्रेनिल-ऐलानिन* | C₆H₅-CH₂- | Phe | F | | 17. टाइरोसीन | (p)HO-C₆H₄-CH₂-
- कार्बोहाइड्रेटों को तीन वर्गों में बांटा गया है: मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड, पॉलिसैकेराइड।
- मोनोसैकेराइड छोटे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें और छोटे यौगिकों में नहीं तोड़ा जा सकता।
- ओलिगोसैकेराइड में 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइयाँ होती हैं।
- पॉलिसैकेराइड में बहुत अधिक मोनोसैकेराइड इकाइयाँ होती हैं और ये मीठे नहीं होते।
- अपचायी शर्करा वे होती हैं जो फेलिंग विलयन को अपचित करती हैं।
- सभी मोनोसैकेराइड अपचायी शर्करा होती हैं।
- 📌 मोनोसैकेराइड: सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट जो और छोटे यौगिकों में नहीं टूटते।
- 📌 ओलिगोसैकेराइड: 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइयों से बने कार्बोहाइड्रेट।
- 📌 पॉलिसैकेराइड: बहुत अधिक मोनोसैकेराइड इकाइयों से बने बहुलक।
10.1.2 मोनोसैकेराइड
व्याख्या10.1.2 मोनोसैकेराइड
मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के सबसे सरल रूप होते हैं, जिन्हें और छोटे यौगिकों में जल अपघटित नहीं किया जा सकता। इन्हें उनके कार्बन परमाणुओं की संख्या और प्रकार्यात्मक समूह के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। यदि मोनोसैकेराइड में ऐल्डिहाइड समूह होता है त
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.10.1 मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?
उत्तर:
मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के सबसे सरल रूप होते हैं, जो जल में घुलनशील होते हैं और जिनका सामान्य सूत्र (CH2O)n होता है। ये शर्करा के ऐसे अणु होते हैं जिन्हें और सरल शर्करा में विभाजित नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए ग्लूकोज, फ्रक्टोज।
व्याख्या:
मोनोसैकेराइड सरल शर्करा होते हैं जो जल में घुलनशील होते हैं और ऊर्जा का स्रोत होते हैं। ये किसी भी प्रकार के हाइड्रोलिसिस से टूटते नहीं हैं।
Q2.10.2 अपचायी शर्करा क्या होती है?
उत्तर:
अपचायी शर्करा वे शर्कराएँ होती हैं जिन्हें हमारे पाचन तंत्र में पचाया नहीं जा सकता। ये शर्कराएँ हमारे शरीर में अवशोषित नहीं होतीं। उदाहरण के लिए सेलुलोज।
व्याख्या:
अपचायी शर्करा का पाचन हमारे शरीर में नहीं होता क्योंकि हमारे पाचन एंजाइम उनमें उपस्थित β-ग्लाइकोसाइड बंध को तोड़ नहीं पाते। इसलिए ये आंतों में बिना पचे निकल जाती हैं।
Q3.10.3 पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
उत्तर:
पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्य हैं: 1. ऊर्जा का स्रोत: कार्बोहाइड्रेट पौधों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं। 2. संरचनात्मक भूमिका: जैसे सेलुलोज पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक होता है, जो उन्हें कठोरता और संरचना प्रदान करता है।
व्याख्या:
कार्बोहाइड्रेट पौधों में ऊर्जा संग्रहित करते हैं और संरचनात्मक रूप से कोशिका भित्ति का निर्माण करते हैं।
Q4.10.4 निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए—राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज तथा लैक्टोस
उत्तर:
मोनोसैकेराइड: राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोज डाइसैकेराइड: माल्टोस, लैक्टोस व्याख्या: - मोनोसैकेराइड सरल शर्कराएँ हैं जो टूटती नहीं हैं। - डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड के यौगिक होते हैं। माल्टोस ग्लूकोज के दो अणुओं से बना होता है और लैक्टोस ग्लूकोज तथा गैलैक्टोस से।
व्याख्या:
राइबोस और 2-डीऑक्सीराइबोस न्यूक्लिक एसिड के घटक हैं, इसलिए मोनोसैकेराइड हैं। माल्टोस और लैक्टोस दो मोनोसैकेराइड के संयोजन से बने डाइसैकेराइड हैं।
Q5.10.5 ग्लाइकोसाइडों बंध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ग्लाइकोसाइड बंध वह बंध होता है जो एक मोनोसैकेराइड के हाइड्रॉक्सिल समूह और किसी अन्य अणु के हाइड्रॉक्सिल या अन्य समूह के बीच बनता है। यह बंध शर्करा के अणु को अन्य अणुओं से जोड़ता है।
व्याख्या:
ग्लाइकोसाइड बंध में शर्करा का हाइड्रॉक्सिल समूह किसी अन्य अणु से जुड़कर एक एथर बंध बनाता है, जो जैविक अणुओं के निर्माण में महत्वपूर्ण होता है।
Q6.10.6 ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
ग्लाइकोजन एक बहु-शर्करा (पॉलीसैकेराइड) है जो जानवरों में ऊर्जा भंडारण के लिए पाया जाता है। यह α-D-ग्लूकोज के कई अणुओं से बना होता है, जिसमें α-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध मुख्य होते हैं और α-1,6-शाखाएं भी होती हैं। स्टार्च भी α-D-ग्लूकोज से बना होता है, लेकिन इसमें दो प्रकार होते हैं: एमाइलेस (सीधी श्रृंखला) और एमाइलोपेक्टिन (शाखायुक्त)। भिन्नता: - ग्लाइकोजन स्टार्च की तुलना में अधिक शाखायुक्त होता है। - ग्लाइकोजन जानवरों में ऊर्जा भंडारण करता है, जबकि स्टार्च पौधों में।
व्याख्या:
ग्लाइकोजन और स्टार्च दोनों ऊर्जा भंडारण पॉलीसैकेराइड हैं, पर ग्लाइकोजन अधिक शाखायुक्त होता है जिससे यह तेजी से ऊर्जा मुहैया कराता है।
Q7.10.7 (अ) सूक्रोस तथा (ब) लैक्टोस के जलअपघटन से कौन से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
(अ) सूक्रोस के जलअपघटन से ग्लूकोज और फ्रक्टोज प्राप्त होते हैं। (ब) लैक्टोस के जलअपघटन से ग्लूकोज और गैलैक्टोज प्राप्त होते हैं।
व्याख्या:
सूक्रोस एक डाइसैकेराइड है जो ग्लूकोज और फ्रक्टोज से बना है। लैक्टोस भी डाइसैकेराइड है जो ग्लूकोज और गैलैक्टोज से बना है। जलअपघटन (हाइड्रोलिसिस) में ये बंध टूट जाते हैं।
Q8.10.8 स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अंतर क्या है?
उत्तर:
स्टार्च में α-ग्लूकोज इकाइयाँ α-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंधों से जुड़ी होती हैं, जबकि सेलुलोस में β-ग्लूकोज इकाइयाँ β-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंधों से जुड़ी होती हैं। इस कारण स्टार्च घुमावदार (helical) संरचना बनाता है और सेलुलोस सीधी रेखा में होती है।
व्याख्या:
α और β ग्लाइकोसिडिक बंधों के कारण स्टार्च और सेलुलोस की संरचना और गुण अलग होते हैं।
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Chemistry · Class 12