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उपसहसंयोजन यौगिक | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

उपसहसंयोजन यौगिक | Class 12 Chemistry Notes

उपसहसंयोजन यौगिक – this guide gives you a concise, exam-ready overview of उपसहसंयोजन यौगिक from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

5.4 उपसहसंयोजन यौगिकों में समावयवता

समावयवता (Isomerism) उन यौगिकों में पाई जाती है जिनके रासायनिक सूत्र समान होते हैं परंतु परमाणुओं की व्यवस्था भिन्न होती है, जिससे उनके गुणधर्म अलग होते हैं। उपसहसंयोजन यौगिकों में समावयवता के दो प्रमुख प्रकार हैं: त्रिविम समावयवता और संरचनात्मक समावयवता।

1. त्रिविम समावयवता: (क) ज्यामितीय समावयवता: वर्ग समतलीय और अष्टफलकीय संकुलों में लिगन्डों की भिन्न स्थानिक व्यवस्था से उत्पन्न होती है, जैसे cis और trans समावयव। (ख) ध्रुवण समावयवता: काइरल यौगिक जो दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, जैसे [Co(en)₃]³⁺ के d और l रूप।

2. संरचनात्मक समावयवता: (क) बंधनी समावयवता: लिगन्ड के बंधन के भिन्न रूप, जैसे NO₂⁻ का नाइट्रेटो-N और नाइट्रेटो-O रूप। (ख) उपसहसंयोजन समावयवता: विभिन्न धातुओं के बीच लिगन्डों का स्थानांतरण। (ग) आयनन समावयवता: संकुल और प्रतिआयन के बीच लिगन्डों का स्थानांतरण। (घ) विलायकयोजन समावयवता: विलायक अणु के स्थानांतरण से उत्पन्न।

ज्यामितीय समावयवता के उदाहरणों में [Pt(NH₃)₂Cl₂] के cis और trans रूप शामिल हैं। ध्रुवण समावयवता में [Co(en)₃]³⁺ के दो एनैन्टिओमर होते हैं।

📊 Diagram: Figure 8 and 9: [Pt(NH₃)₂Cl₂] के ज्यामितीय समावयव (समपक्ष एवं विपक्ष); Figures 11-14: [Co(NH₃)₄Cl₂]⁺ के समपक्ष और विपक्ष समावयव तथा [CoCl₂(en)₂] के फलकीय (fac) और रेखाशिक (mer) समावयव; Figures 15-18: [Co(en)₃]²⁺ के दक्षिण और वामावर्ती ध्रुवण समावयव।; Figures 19-22: [Fe(NH₃)₂(CN)₄]⁻ के समपक्ष और विपक्ष समावयव तथा [CrCl₂(ox)₂]³⁻ के समपक्ष और विपक्ष समावयव।

🧪 Activity: विभिन्न उपसहसंयोजन यौगिकों के समावयवों की संरचनाएं बनाना।

🔗 Connection: यह अनुभाग उपसहसंयोजन यौगिकों में आबंधन की प्रकृति की समझ की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5.21 $\left[\mathrm{Fe}(\mathrm{CN})_{6}\right]^{4-}$ तथा $\left[\mathrm{Fe}\left(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\right)_{6}\right]^{2+}$ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?

इन दोनों संकुलों में लिगैंड भिन्न हैं, जिससे क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा (Δ₀) में अंतर होता है। $\mathrm{CN}^-$ एक प्रबल लिगैंड है जो अधिक क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन करता है, जिससे d इलेक्ट्रॉन युगलित हो जाते हैं और संकुल का रंग भिन्न होता है। दूसरी ओर, $\mathrm{H}_2\mathrm{O}$ एक दुर्बल लिगैंड है, जिससे कम क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन होता है और इलेक्ट्रॉन युगलित नहीं होते। अतः दोनों संकुलों के रंग भिन्न होते हैं।

5.22 धातु काबौनिलों में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।

धातु काबौनिलों में धातु और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के बीच आबंध मुख्यतः σ-दान और π-प्रत्यावर्तन (π-back bonding) द्वारा होता है। CO का कार्बन परमाणु धातु को σ-दान करता है, जबकि धातु के d-ऑर्बिटल से CO के π* एंटीबॉन्डिंग ऑर्बिटल में π-प्रत्यावर्तन होता है। यह द्विदिश आबंध धातु-काबौनिल यौगिकों को स्थिर बनाता है।

5.23 निम्न संकुलों में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए— (i) $\mathrm{K}_{3}[\mathrm{Co}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{3}]$ (ii) $\mathrm{ciS}\cdot[\mathrm{CrCl}_{2}(\mathrm{en})_{2}]\mathrm{Cl}$ (iii) $\left[\mathrm{NH}_{4}\right)_{2}[\mathrm{CoF}_{4}]$ (iv) $\left[\mathrm{Mn}\left(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\right)_{6}\right]\mathrm{SO}_{4}$

(i) $\mathrm{K}_{3}[\mathrm{Co}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{3}]$:

  • केंद्रीय धातु: Co
  • ऑक्सीकरण अवस्था: +3 (Co के 3 K⁺ के साथ)
  • d कक्षकों का अधिग्रहण: Co³⁺ का इलेक्ट्रॉन विन्यास d⁶
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6 (तीन ऑक्सालेट लिगैंड, प्रत्येक द्विकेंद्रित)

(ii) $\mathrm{ciS}\cdot[\mathrm{CrCl}_{2}(\mathrm{en})_{2}]\mathrm{Cl}$:

  • केंद्रीय धातु: Cr
  • ऑक्सीकरण अवस्था: +3 (Cl⁻ आयन के संतुलन से)
  • d कक्षकों का अधिग्रहण: Cr³⁺ d³
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6 (2 Cl⁻ + 2 en (दो-दंत लिगैंड))

(iii) $\left[\math

5.24 निम्न संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुंबकीय आघूर्ण भी बतलाइए: (i) $\mathrm{K}[\mathrm{Cr}(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O})_{2}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{2}]\cdot 3 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}$ (ii) $\left[\mathrm{Co}\left(\mathrm{NH}_{3}\right)_{5} \mathrm{Cl}\right]\mathrm{Cl}_{2}$ (iii) $\left[\mathrm{CrCl}_{3}(\mathrm{py})_{3}\right]$ (iv) $\mathrm{K}_{4}[\mathrm{Mn}(\mathrm{CN})_{6}]$ (iv) $\mathrm{Cs}[\mathrm{FeCl}_{4}]$

(i) $\mathrm{K}[\mathrm{Cr}(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O})_{2}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{2}]\cdot 3 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}$:

  • IUPAC नाम: पोटैशियम डाइऑक्सालेटडायहाइड्रेटोक्रोमेट(III) ट्राइहाइड्रेट
  • ऑक्सीकरण अवस्था: Cr = +3
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: d³
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6
  • त्रिविम रसायन: ऑक्सालेट द्विकेंद्रित लिगैंड के कारण
  • चुंबकीय आघूर्ण: प्रबल अनुचुंबकीय (3 अयुगलित इलेक्ट्रॉन)

(ii) $\left[\mathrm{Co}\left(\mathrm{NH}_{3}\right)_{5} \mathrm{Cl}\right]\mathrm{Cl}_{2}$:

  • IUPAC नाम: पें

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