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उपसहसंयोजन यौगिक | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

उपसहसंयोजन यौगिक | Class 12 Chemistry Notes

उपसहसंयोजन यौगिक – this guide gives you a concise, exam-ready overview of उपसहसंयोजन यौगिक from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

5.1 उपसहसंयोजन यौगिकों का वर्नर का सिद्धांत

उपसहसंयोजन यौगिक आधुनिक अकार्बनिक और जैव अकार्बनिक रसायन तथा रासायनिक उद्योगों के आधार स्तंभ हैं। संक्रमण धातुएं अनेक ऋणायनों अथवा उदासीन अणुओं से इलेक्ट्रॉनों का सहसंयोजन कर संकुल यौगिक बनाती हैं। वर्नर ने उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचनाओं के संबंध में अपने विचार प्रतिपादित किए। उन्होंने धातु आयन के लिए प्राथमिक संयोजकता (primary valence) तथा द्वितीयक संयोजकता (secondary valence) की धारणा दी।

प्राथमिक संयोजकता सामान्यतः आयननीय होती है और द्वितीयक संयोजकता अनायनीकृत होती है। वर्नर ने यह भी बताया कि धातु से द्वितीयक संयोजकता से आबंधित आयन समूह विशिष्ट ज्यामितीय व्यवस्था में व्यवस्थित रहते हैं, जिन्हें समन्वय बहुफलक (coordination polyhedron) कहा जाता है।

उदाहरण के लिए, कोबाल्ट (III) क्लोराइड-अमोनिया संकुलों में विभिन्न रंगों के यौगिकों का अध्ययन करके वर्नर ने यह सिद्ध किया कि धातु से जुड़े क्लोराइड आयनों की संख्या (द्वितीयक संयोजकता) विभिन्न होती है, जबकि कुल संयोजकता समान रहती है। इससे उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचना और गुणधर्मों की समझ मिली।

📊 Diagram: Table on page 2 (5×3) showing CoCl₃-NH₃ complexes with their colors, formulas and conductivity; Table on page 3 (6×2) showing AgCl precipitate moles on addition of AgNO₃ to various complexes.

🧪 Activity: प्रयोग के रूप में विभिन्न कोबाल्ट (III) क्लोराइड-अमोनिया संकुलों के विलयन में AgNO₃ मिलाकर AgCl के अवक्षेपण की मात्रा मापना।

🔗 Connection: यह अनुभाग उपसहसंयोजन यौगिकों से संबंधित पारिभाषिक शब्दों और उनकी परिभाषाओं की ओर ले जाता है।

Table on page 2 (5×3)

रंगसूत्रविलयन चालकता संबंध
पीला[Co(NH₃)₆]³⁺3Cl⁻1:3 विद्युत अपघट्य
नीललोहित[CoCl(NH₃)₅]²⁺2Cl⁻1:2 विद्युत अपघट्य
हरा[CoCl₂(NH₃)₄]⁺Cl⁻1:1 विद्युत अपघट्य
बैंगनी[CoCl₂(NH₃)₄]⁺Cl⁻1:1 विद्युत अपघट्य

Table on page 3 (6×2)

सूत्रआधिक्य में AgNO₃ मिलाने पर एक मोल यौगिक से अवक्षेपित AgCl के मोलों की संख्या
(i) PdCl₂·4NH₃2
(ii) NiCl₂·6H₂O2
(iii) PtCl₄·2HCl0
(iv) CoCl₃·4NH₃1
(v) PtCl₂·2NH₃0

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5.21 $\left[\mathrm{Fe}(\mathrm{CN})_{6}\right]^{4-}$ तथा $\left[\mathrm{Fe}\left(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\right)_{6}\right]^{2+}$ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?

इन दोनों संकुलों में लिगैंड भिन्न हैं, जिससे क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा (Δ₀) में अंतर होता है। $\mathrm{CN}^-$ एक प्रबल लिगैंड है जो अधिक क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन करता है, जिससे d इलेक्ट्रॉन युगलित हो जाते हैं और संकुल का रंग भिन्न होता है। दूसरी ओर, $\mathrm{H}_2\mathrm{O}$ एक दुर्बल लिगैंड है, जिससे कम क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन होता है और इलेक्ट्रॉन युगलित नहीं होते। अतः दोनों संकुलों के रंग भिन्न होते हैं।

5.22 धातु काबौनिलों में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।

धातु काबौनिलों में धातु और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के बीच आबंध मुख्यतः σ-दान और π-प्रत्यावर्तन (π-back bonding) द्वारा होता है। CO का कार्बन परमाणु धातु को σ-दान करता है, जबकि धातु के d-ऑर्बिटल से CO के π* एंटीबॉन्डिंग ऑर्बिटल में π-प्रत्यावर्तन होता है। यह द्विदिश आबंध धातु-काबौनिल यौगिकों को स्थिर बनाता है।

5.23 निम्न संकुलों में केंद्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d कक्षकों का अधिग्रहण एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए— (i) $\mathrm{K}_{3}[\mathrm{Co}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{3}]$ (ii) $\mathrm{ciS}\cdot[\mathrm{CrCl}_{2}(\mathrm{en})_{2}]\mathrm{Cl}$ (iii) $\left[\mathrm{NH}_{4}\right)_{2}[\mathrm{CoF}_{4}]$ (iv) $\left[\mathrm{Mn}\left(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}\right)_{6}\right]\mathrm{SO}_{4}$

(i) $\mathrm{K}_{3}[\mathrm{Co}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{3}]$:

  • केंद्रीय धातु: Co
  • ऑक्सीकरण अवस्था: +3 (Co के 3 K⁺ के साथ)
  • d कक्षकों का अधिग्रहण: Co³⁺ का इलेक्ट्रॉन विन्यास d⁶
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6 (तीन ऑक्सालेट लिगैंड, प्रत्येक द्विकेंद्रित)

(ii) $\mathrm{ciS}\cdot[\mathrm{CrCl}_{2}(\mathrm{en})_{2}]\mathrm{Cl}$:

  • केंद्रीय धातु: Cr
  • ऑक्सीकरण अवस्था: +3 (Cl⁻ आयन के संतुलन से)
  • d कक्षकों का अधिग्रहण: Cr³⁺ d³
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6 (2 Cl⁻ + 2 en (दो-दंत लिगैंड))

(iii) $\left[\math

5.24 निम्न संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुंबकीय आघूर्ण भी बतलाइए: (i) $\mathrm{K}[\mathrm{Cr}(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O})_{2}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{2}]\cdot 3 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}$ (ii) $\left[\mathrm{Co}\left(\mathrm{NH}_{3}\right)_{5} \mathrm{Cl}\right]\mathrm{Cl}_{2}$ (iii) $\left[\mathrm{CrCl}_{3}(\mathrm{py})_{3}\right]$ (iv) $\mathrm{K}_{4}[\mathrm{Mn}(\mathrm{CN})_{6}]$ (iv) $\mathrm{Cs}[\mathrm{FeCl}_{4}]$

(i) $\mathrm{K}[\mathrm{Cr}(\mathrm{H}_{2} \mathrm{O})_{2}(\mathrm{C}_{2} \mathrm{O}_{4})_{2}]\cdot 3 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}$:

  • IUPAC नाम: पोटैशियम डाइऑक्सालेटडायहाइड्रेटोक्रोमेट(III) ट्राइहाइड्रेट
  • ऑक्सीकरण अवस्था: Cr = +3
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: d³
  • उपसहसंयोजन संख्या: 6
  • त्रिविम रसायन: ऑक्सालेट द्विकेंद्रित लिगैंड के कारण
  • चुंबकीय आघूर्ण: प्रबल अनुचुंबकीय (3 अयुगलित इलेक्ट्रॉन)

(ii) $\left[\mathrm{Co}\left(\mathrm{NH}_{3}\right)_{5} \mathrm{Cl}\right]\mathrm{Cl}_{2}$:

  • IUPAC नाम: पें

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