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रासायनिक बलगतिकी | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

रासायनिक बलगतिकी | Class 12 Chemistry Notes

रासायनिक बलगतिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of रासायनिक बलगतिकी from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

3.3 समाकलित वेग समीकरण

अभिक्रिया वेग के अवकल समीकरण को समय के संदर्भ में समाकलित करके समाकलित वेग समीकरण प्राप्त किए जाते हैं, जो सांद्रता और समय के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हैं। यह विधि विशेषकर शून्य और प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिए उपयोगी है। शून्य कोटि की अभिक्रिया में वेग अभिकारक की सांद्रता से स्वतंत्र होता है, अतः वेग समीकरण होता है d[R]/dt = -k, जिसका समाकलन करने पर [R] = [R]₀ - kt प्राप्त होता है। इस समीकरण के अनुसार [R] और t के बीच रेखीय संबंध होता है, जिसका ढाल -k होता है। प्रथम कोटि की अभिक्रिया में वेग समीकरण होता है d[R]/dt = -k[R], जिसका समाकलन करने पर ln[R] = -kt + ln[R]₀ प्राप्त होता है। यहाँ ln[R] और t के बीच रेखीय संबंध होता है, जिसका ढाल -k होता है। प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अधार्यु (t₁/₂) वह समय है जिसमें अभिकारक की सांद्रता आधी हो जाती है, और यह वेग स्थिरांक k के व्युत्क्रमानुपाती होता है: t₁/₂ = 0.693/k। शून्य कोटि अभिक्रिया में अधार्यु प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर करता है। इन समीकरणों के प्रयोग से अभिक्रिया के वेग स्थिरांक और अधार्यु की गणना की जा सकती है।

📊 Diagram: चित्र 3.3 – शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए सांद्रता का समय के साथ परिवर्तन आलेख; चित्र 3.4 – प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए ln[R] एवं t के मध्य आलेख; चित्र 3.5 – प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए log [R]₀ / [R] एवं समय के मध्य आलेख

🧪 Activity: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए विभिन्न समय पर सांद्रता मापन कर वेग स्थिरांक और अधार्यु की गणना।

🔗 Connection: अगले खंड में अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता और सक्रियण ऊर्जा का अध्ययन किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

3.1 निम्न अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए। (i) $3 \mathrm{NO}(\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{N}_{2} \mathrm{O}(\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{NO} \right]^{2}$ (ii) $\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}_{2} (\mathrm{aq}) + 3 \mathrm{I}^{-} (\mathrm{aq}) + 2 \mathrm{H}^{+} \rightarrow 2 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O} (\mathrm{l}) + \mathrm{I}_{3}^{-}$ वेग = $k \left[ \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}_{2} \right] \left[ \mathrm{I}^{-} \right]$ (iii) $\mathrm{CH}_{3} \mathrm{CHO} (\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{CH}_{4} (\mathrm{g}) + \mathrm{CO}(\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{CH}_{3} \mathrm{CHO} \right]^{3/2}$ (iv) $\mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{5} \mathrm{Cl} (\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{4} (\mathrm{g}) + \mathrm{HCl} (\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{5} \mathrm{Cl} \right]$

(i) अभिक्रिया: $3 \mathrm{NO} \rightarrow \mathrm{N}_2\mathrm{O}$ वेग समीकरण: $\text{वेग} = k[\mathrm{NO}]^2$ अभिक्रिया कोटि: अभिक्रिया कोटि वेग समीकरण में सांद्रता के घात के योग के बराबर होती है। यहाँ, कोटि = 2 वेग स्थिरांक की इकाई: वेग की इकाई mol L⁻¹ s⁻¹ होती है और सांद्रता की इकाई mol L⁻¹ होती है। इसलिए, $k$ की इकाई = (mol L⁻¹ s⁻¹) / (mol L⁻¹)² = mol⁻¹ L s⁻¹

(ii) अभिक्रिया: $\mathrm{H}_2\mathrm{O}_2 + 3 \mathrm{I}^- + 2 \mathrm{H}^+ \rightarrow 2 \mathrm{H}_2\mathrm{O} + \mathrm{I}_3^-$ वेग

3.2 अभिक्रिया $2 \mathrm{A} + \mathrm{B} \rightarrow \mathrm{A}_{2} \mathrm{B}$ के लिए, वेग = $k \left[ \mathrm{A} \left[ \mathrm{B} \right]^{2} \right]$ यहाँ $k$ का मान $2.0 \times 10^{-6} \mathrm{~mol}^{-2} \mathrm{~L}^{2} \mathrm{~s}^{-1}$ है। प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए; जब [A] = 0.1 mol L⁻¹ एवं [B] = 0.2 mol L⁻¹ हो तथा अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए; जब [A] घट कर 0.06 mol L⁻¹ रह जाए।

दिया गया: वेग = k [A][B]^2 k = 2.0 × 10⁻⁶ mol⁻² L² s⁻¹ पहली स्थिति में: [A] = 0.1 mol L⁻¹, [B] = 0.2 mol L⁻¹

प्रारंभिक वेग = k × [A] × [B]^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.1 × (0.2)^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.1 × 0.04 = 8.0 × 10⁻⁹ mol L⁻¹ s⁻¹

दूसरी स्थिति में: [A] = 0.06 mol L⁻¹, [B] = 0.2 mol L⁻¹

वेग = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.06 × (0.2)^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.06 × 0.04 = 4.8 × 10⁻⁹ mol L⁻¹ s⁻¹

3.3 प्लैटिनम सतह पर $\mathrm{NH}_{3}$ का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है। $\mathrm{N}_{2}$ एवं $\mathrm{H}_{2}$ के उत्पादन की दर क्या होगी जब $k$ का मान $2.5 \times 10^{-4} \mathrm{~mol} \mathrm{~L}^{-1} \mathrm{~s}^{-1}$ हो?

शून्य कोटि अभिक्रिया में वेग स्थिरांक $k$ ही वेग होता है क्योंकि सांद्रता का प्रभाव नहीं होता।

इसलिए, $\mathrm{N}_2$ और $\mathrm{H}_2$ के उत्पादन की दर = $k = 2.5 \times 10^{-4} \mathrm{mol} \mathrm{L}^{-1} \mathrm{s}^{-1}$

3.4 डाइमेथिल ईथर के अपघटन से $\mathrm{CH}_{4}, \mathrm{H}_{2}$ तथा $\mathrm{CO}$ बनते हैं। इस अभिक्रिया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है— $$ \text{वेग} = k \left[ \mathrm{CH}_{3} \mathrm{OCH}_{3} \right]^{3/2} $$ अभिक्रिया के वेग का अनुगमन बंद पात्र में बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अत: वेग समीकरण को डाइमेथिल ईथर के आधिक दाब के पद में भी दिया जा सकता है। अत: $$ \text{वेग} = k \left( p_{\mathrm{CH}_{3} \mathrm{OCH}_{3}} \right)^{3/2} $$ यदि दाब को bar में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभिक्रिया के वेग एवं वेग स्थिरांक की इकाइयाँ क्या होंगी?

दिया गया: वेग = k (p_{CH3OCH3})^{3/2}

दाब की इकाई: bar समय की इकाई: मिनट

वेग की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ (सामान्यतः)

चूंकि वेग = k × (दाब)^{3/2}

इसलिए,

k की इकाई = (mol L⁻¹ min⁻¹) / (bar)^{3/2} = mol L⁻¹ min⁻¹ bar^{-3/2}

अतः,

वेग की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ वेग स्थिरांक की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ bar^{-3/2}

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