Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
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3.1 रासायनिक अभिक्रिया वेग
व्याख्या3.1 रासायनिक अभिक्रिया वेग
रासायनिक बलगतिकी अभिक्रियाओं की गति का अध्ययन करती है। रासायनिक अभिक्रिया वेग से अभिप्राय है कि अभिक्रिया कितनी शीघ्रता से होती है। उदाहरण के लिए, ऊष्मागतिकीय दृष्टिकोण से हीरे को ग्रैफाइट में परिवर्तित किया जा सकता है, परंतु यह प्रक्रिया अत्यंत धीमी होती है, इसलिए व्यवहार में हीरा सदैव हीरा ही रहता है। इस प्रकार, बलगतिकी हमें यह समझने में सहायता करती है कि अभिक्रियाएं कैसे होती हैं और उनकी गति क्या होती है। अभिक्रिया वेग को अभिकारक की सांद्रता में कमी या उत्पाद की सांद्रता में वृद्धि की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। यदि कोई अभिक्रिया R → P हो, तो अभिकारक R की सांद्रता में समय के साथ कमी और उत्पाद P की सांद्रता में वृद्धि होती है। अभिक्रिया वेग का औसत मान किसी निश्चित समयांतराल में सांद्रता परिवर्तन को समय से भाग देकर प्राप्त किया जाता है। जबकि किसी क्षण विशेष पर अभिक्रिया वेग को ताल्क्षणिक वेग कहते हैं, जिसे सांद्रता-समय वक्र पर स्पर्श रेखा की ढाल से ज्ञात किया जाता है। अभिक्रिया वेग की इकाई सांद्रता/समय होती है, जैसे mol L⁻¹ s⁻¹। गैसीय अभिक्रियाओं में सांद्रता आंशिक दाब के समानुपाती होती है, अतः वेग को आंशिक दाब की दर से भी व्यक्त किया जा सकता है। इस खंड में ब्यूटिल क्लोराइड के जल अपघटन के उदाहरण द्वारा औसत और ताल्क्षणिक वेग की गणना समझाई गई है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न अभिक्रियाओं में अभिकारकों और उत्पादों के स्टॉइकियोमीट्री गुणांक के आधार पर वेग की गणना के नियम भी बताए गए हैं।
- रासायनिक अभिक्रिया वेग अभिकारक की सांद्रता में कमी या उत्पाद की सांद्रता में वृद्धि की दर है।
- औसत वेग किसी समयांतराल में सांद्रता परिवर्तन को समय से भाग देकर ज्ञात किया जाता है।
- ताल्क्षणिक वेग किसी क्षण विशेष पर सांद्रता-समय वक्र की स्पर्श रेखा की ढाल से प्राप्त होता है।
- अभिक्रिया वेग की इकाई सांद्रता/समय होती है, जैसे mol L⁻¹ s⁻¹।
- गैसीय अभिक्रियाओं में वेग आंशिक दाब की दर से भी व्यक्त किया जा सकता है।
- अभिकारक और उत्पाद के स्टॉइकियोमीट्री गुणांक के अनुसार वेग की गणना में समायोजन किया जाता है।
- 📌 रासायनिक अभिक्रिया वेग: अभिक्रिया की गति को मापने वाली मात्रा।
- 📌 औसत वेग: किसी निश्चित समयांतराल में सांद्रता परिवर्तन की दर।
- 📌 ताल्क्षणिक वेग: किसी क्षण विशेष पर अभिक्रिया की गति।
3.2 अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कारक
व्याख्या3.2 अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कारक
अभिक्रिया वेग विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जिनमें प्रमुख हैं अभिकारकों की सांद्रता, तापमान, दाब (विशेषकर गैसीय अभिक्रियाओं में) और उत्प्रेरक। किसी अभिक्रिया का वेग नियम (Rate Law) अभिकारकों की सांद्रताओं के घातांकों के रूप में व्यक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, सामान्य अभिक्रिया aA + bB → cC + dD के लिए वेग समीकरण होता है: वेग = k [A]^x [B]^y, जहाँ x और y वेग क्रम (order) के घातांक होते हैं जो स्टॉइकियोमीट्री गुणांक से भिन्न हो सकते हैं। वेग समीकरण प्रयोग द्वारा निर्धारित किया जाता है, न कि केवल समीकरण देखकर। अभिक्रिया की कुल कोटि x + y होती है, जो अभिक्रिया की गति पर सांद्रता के प्रभाव को दर्शाती है। अभिक्रियाओं को उनके वेग क्रम के आधार पर शून्य, प्रथम, द्वितीय आदि कोटि में वर्गीकृत किया जाता है। शून्य कोटि अभिक्रिया में वेग सांद्रता पर निर्भर नहीं करता, प्रथम कोटि में वेग सीधे सांद्रता के समानुपाती होता है, और द्वितीय कोटि में वेग सांद्रता के वर्ग के समानुपाती होता है। वेग स्थिरांक k की इकाई अभिक्रिया के क्रम पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त, अभिक्रिया की आण्विकता वह संख्या होती है जो प्राथमिक अभिक्रिया में संघट्ट करने वाले अणुओं की संख्या को दर्शाती है। जटिल अभिक्रियाओं में आण्विकता का अर्थ नहीं होता। उत्प्रेरक अभिक्रिया वेग को बढ़ाता है बिना स्वयं अभिक्रिया में स्थायी परिवर्तन हुए। **Table on page 8 (5×4)** | प्रयोग | प्रारंभिक [NO]/mol L⁻¹ | प्रारंभिक [O₂]/mol L⁻¹ | NO₂ के विरचन का प्रारंभिक वेग/mol L⁻¹ s⁻¹ | | --- | --- | --- | --- | | 1. | 0.30 | 0.30 | 0.096 | | 2. | 0.60 | 0.30 | 0.384 | | 3. | 0.30 | 0.60 | 0.192 | | 4. | 0.60 | 0.60 | 0.768 | **Table on page 10 (4×3)** | अभिक्रिया | कोटि | वेग स्थिरांक की इकाई | | --- | --- | --- | | शून्य कोटि अभिक्रिया | 0 | $$\frac{\text{mol L}^{-1}}{\text{s}} \times \frac{1}{(\text{mol L}^{-1})^0} = \text{mol L}^{-1}\text{s}^{-1}$$ | | प्रथम कोटि अभिक्रिया | 1 | $$\frac{\text{mol L}^{-1}}{\text{s}} \times \frac{1}{(\text{mol L}^{-1})^1} = \text{s}^{-1}$$ | | द्वितीय कोटि अभिक्रिया | 2 | $$\frac{\text{mol L}^{-1}}{\text{s}} \times \frac{1}{(\text{mol L}^{-1})^2} = \text{mol}^{-1}\text{L s}^{-1}$$ | **Table on page 4 (2×10)** | t/s | 0 | 50 | 100 | 150 | 200 | 300 | 400 | 700 | 800 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | [C₄H₉Cl]/mol L⁻¹ | 0.100 | 0.0905 | 0.0820 | 0.0741 | 0.0671 | 0.0549 | 0.0439 | 0.0210 | 0.017 | **Table on page 4 (8×5)** | --- | --- | --- | --- | --- | | 0.100 | 0.0905 | 0 | 50 | 1.90 | | 0.0905 | 0.0820 | 50 | 100 | 1.70 | | 0.0820 | 0.0741 | 100 | 150 | 1.58 | | 0.0741 | 0.0671 | 150 | 200 | 1.40 | | 0.0671 | 0.0549 | 200 | 300 | 1.22 | | 0.0549 | 0.0439 | 300 | 400 | 1.10 | | 0.0439 | 0.0335 | 400 | 500 | 1.04 | | 0.0210 | 0.017 | 700 | 800 | 0.4 | **Table on page 15 (3×6)** | | A(g) | → | B(g) | + | C(g) | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | $ t = 0 $ समय पर | $ p_i \text{ atm} $ | | $ 0 \text{ atm} $ | | $ 0 \text{ atm} $ | | $ t $ समय पर | $ (p_i - x) \text{ atm} $ | | $ x \text{ atm} $ | | $ x \text{ atm} $ | **Table on page 16 (3×3)** | क्र.सं. | समय/s | कुल दाब/atm | | --- | --- | --- | | 1 | 0 | 0.5 | | 2 | 100 | 0.512 | **Table on page 16 (2×4)** | प्रारंभ में t = 0 | 0.5 atm | 0 atm | 0 atm | | --- | --- | --- | --- | | t समय पर | (0.5 - 2x) atm | 2x atm | x atm | **Table on page 18 (2×7)** | कोटि | अभिक्रिया प्रकार | अवकल वेग नियम | समाकलन वेग नियम | सरल रेखा आलेख | अधार्यु | k की इकाई | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 0 | R→P | d[R]/dt = -k | kt = [R]₀-[R] | [R] एवं t के मध्य | [R]₀/2k | सांद्रता समय⁻¹ **Table on page 25 (2×5)** | t/s | 0 | 30 | 60 | 90 | | --- | --- | --- | --- | --- | | [A]/ mol L⁻¹ | 0.55 | 0.31 | 0.17 | 0.085 | **Table on page 26 (3×4)** | A/ mol L⁻¹ | 0.20 | 0.20 | 0.40 | | --- | --- | --- | --- | | B/ mol L⁻¹ | 0.30 | 0.10 | 0.05 | | r₀/mol L⁻¹s⁻¹ | 5.07 × 10⁻⁵ | 5.07 × 10⁻⁵ | 1.43 × 10⁻⁴ | **Table on page 26 (5×4)** | प्रयोग | [A]/ mol L⁻¹ | [B]/ mol L⁻¹ | D के विरचन का प्रारंभिक वेग/mol L⁻¹ min⁻¹ | | --- | --- | --- | --- | | I | 0.1 | 0.1 | 6.0 × 10⁻³ | | II | 0.3 | 0.2 | 7.2 × 10⁻² | | III | 0.3 | 0.4 | 2.88 × 10⁻¹ | | IV | 0.4 | 0.1 | 2.40 × 10⁻² | **Table on page 26 (5×4)** | प्रयोग | [A]/mol L⁻¹ | [B]/mol L⁻¹ | प्रारंभिक वेग/mol L⁻¹ min⁻¹ | | --- | --- | --- | --- | | I | 0.1 | 0.1 | 2.0 × 10⁻² | | II | - | 0.2 | 4.0 × 10⁻² | | III | 0.4 | 0.4 | - | | IV | - | 0.2 | 2.0 × 10⁻² | **Table on page 26 (2×10)** | t/s | 0 | 400 | 800 | 1200 | 1600 | 2000 | 2400 | 2800 | 3200 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | 10² × [N₂O₅]/mol L⁻¹ | 1.63 | 1.36 | 1.14 | 0.93 | 0.78 | 0.64 | 0.53 | 0.43 | 0.35 | **Table on page 27 (4×2)** | t (sec) | p (mm Hg में) | | --- | --- | | 0 | 35.0 | | 360 | 54.0 | | 720 | 63.0 | **Table on page 27 (3×3)** | प्रयोग | समय/s | कुल दाब/atm | | --- | --- | --- | | 1 | 0 | 0.5 | | 2 | 100 | 0.6 | **Table on page 27 (2×6)** | T/°C | 0 | 20 | 40 | 60 | 80 | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | $10^5 \times k/\mathrm{s}^{-1}$ | 0.0787 | 1.70 | 25.7 | 178 | 2140 |
- अभिक्रिया वेग अभिकारकों की सांद्रता, तापमान, दाब और उत्प्रेरक पर निर्भर करता है।
- वेग नियम वेग को अभिकारकों की सांद्रताओं के घातांकों के रूप में व्यक्त करता है।
- अभिक्रिया की कुल कोटि वेग नियम में उपस्थित सभी घातांकों का योग होती है।
- अभिक्रियाओं को शून्य, प्रथम, द्वितीय आदि कोटि में वर्गीकृत किया जाता है।
- वेग स्थिरांक की इकाई अभिक्रिया के क्रम के अनुसार भिन्न होती है।
- आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए परिभाषित होती है, जटिल अभिक्रियाओं के लिए नहीं।
- 📌 वेग नियम: अभिक्रिया वेग और अभिकारकों की सांद्रता के बीच संबंध।
- 📌 कोटि (Order): अभिक्रिया वेग पर सांद्रता के प्रभाव की डिग्री।
- 📌 आण्विकता: प्राथमिक अभिक्रिया में संघट्ट करने वाले अणुओं की संख्या।
3.3 समाकलित वेग समीकरण
व्याख्या3.3 समाकलित वेग समीकरण
अभिक्रिया वेग के अवकल समीकरण को समय के संदर्भ में समाकलित करके समाकलित वेग समीकरण प्राप्त किए जाते हैं, जो सांद्रता और समय के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हैं। यह विधि विशेषकर शून्य और प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिए उपयोगी है। शून्य कोटि की अभि
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.3.1 निम्न अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए। (i) $3 \mathrm{NO}(\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{N}_{2} \mathrm{O}(\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{NO} \right]^{2}$ (ii) $\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}_{2} (\mathrm{aq}) + 3 \mathrm{I}^{-} (\mathrm{aq}) + 2 \mathrm{H}^{+} \rightarrow 2 \mathrm{H}_{2} \mathrm{O} (\mathrm{l}) + \mathrm{I}_{3}^{-}$ वेग = $k \left[ \mathrm{H}_{2} \mathrm{O}_{2} \right] \left[ \mathrm{I}^{-} \right]$ (iii) $\mathrm{CH}_{3} \mathrm{CHO} (\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{CH}_{4} (\mathrm{g}) + \mathrm{CO}(\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{CH}_{3} \mathrm{CHO} \right]^{3/2}$ (iv) $\mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{5} \mathrm{Cl} (\mathrm{g}) \rightarrow \mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{4} (\mathrm{g}) + \mathrm{HCl} (\mathrm{g})$ वेग = $k \left[ \mathrm{C}_{2} \mathrm{H}_{5} \mathrm{Cl} \right]$
उत्तर:
(i) अभिक्रिया: $3 \mathrm{NO} \rightarrow \mathrm{N}_2\mathrm{O}$ वेग समीकरण: $\text{वेग} = k[\mathrm{NO}]^2$ अभिक्रिया कोटि: अभिक्रिया कोटि वेग समीकरण में सांद्रता के घात के योग के बराबर होती है। यहाँ, कोटि = 2 वेग स्थिरांक की इकाई: वेग की इकाई mol L⁻¹ s⁻¹ होती है और सांद्रता की इकाई mol L⁻¹ होती है। इसलिए, $k$ की इकाई = (mol L⁻¹ s⁻¹) / (mol L⁻¹)² = mol⁻¹ L s⁻¹ (ii) अभिक्रिया: $\mathrm{H}_2\mathrm{O}_2 + 3 \mathrm{I}^- + 2 \mathrm{H}^+ \rightarrow 2 \mathrm{H}_2\mathrm{O} + \mathrm{I}_3^-$ वेग समीकरण: $\text{वेग} = k [\mathrm{H}_2\mathrm{O}_2][\mathrm{I}^-]$ अभिक्रिया कोटि = 1 + 1 = 2 वेग स्थिरांक की इकाई = (mol L⁻¹ s⁻¹) / (mol L⁻¹)(mol L⁻¹) = mol⁻² L² s⁻¹ (iii) अभिक्रिया: $\mathrm{CH}_3\mathrm{CHO} \rightarrow \mathrm{CH}_4 + \mathrm{CO}$ वेग समीकरण: $\text{वेग} = k [\mathrm{CH}_3\mathrm{CHO}]^{3/2}$ अभिक्रिया कोटि = 3/2 = 1.5 वेग स्थिरांक की इकाई = (mol L⁻¹ s⁻¹) / (mol L⁻¹)^{3/2} = mol^{-1/2} L^{1/2} s⁻¹ (iv) अभिक्रिया: $\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5\mathrm{Cl} \rightarrow \mathrm{C}_2\mathrm{H}_4 + \mathrm{HCl}$ वेग समीकरण: $\text{वेग} = k [\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5\mathrm{Cl}]$ अभिक्रिया कोटि = 1 वेग स्थिरांक की इकाई = (mol L⁻¹ s⁻¹) / (mol L⁻¹) = s⁻¹
व्याख्या:
अभिक्रिया कोटि वेग समीकरण में सांद्रता के घात के योग के बराबर होती है। वेग स्थिरांक की इकाई वेग की इकाई को सांद्रता के घात से भाग देकर प्राप्त की जाती है। प्रत्येक अभिक्रिया के लिए वेग समीकरण में सांद्रता के घात को जोड़कर कोटि ज्ञात की जाती है। फिर वेग स्थिरांक की इकाई को वेग की इकाई (mol L⁻¹ s⁻¹) को सांद्रता के घात से भाग देकर निकाला जाता है।
Q2.3.2 अभिक्रिया $2 \mathrm{A} + \mathrm{B} \rightarrow \mathrm{A}_{2} \mathrm{B}$ के लिए, वेग = $k \left[ \mathrm{A} \left[ \mathrm{B} \right]^{2} \right]$ यहाँ $k$ का मान $2.0 \times 10^{-6} \mathrm{~mol}^{-2} \mathrm{~L}^{2} \mathrm{~s}^{-1}$ है। प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए; जब [A] = 0.1 mol L⁻¹ एवं [B] = 0.2 mol L⁻¹ हो तथा अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए; जब [A] घट कर 0.06 mol L⁻¹ रह जाए।
उत्तर:
दिया गया: वेग = k [A][B]^2 k = 2.0 × 10⁻⁶ mol⁻² L² s⁻¹ पहली स्थिति में: [A] = 0.1 mol L⁻¹, [B] = 0.2 mol L⁻¹ प्रारंभिक वेग = k × [A] × [B]^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.1 × (0.2)^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.1 × 0.04 = 8.0 × 10⁻⁹ mol L⁻¹ s⁻¹ दूसरी स्थिति में: [A] = 0.06 mol L⁻¹, [B] = 0.2 mol L⁻¹ वेग = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.06 × (0.2)^2 = 2.0 × 10⁻⁶ × 0.06 × 0.04 = 4.8 × 10⁻⁹ mol L⁻¹ s⁻¹
व्याख्या:
वेग समीकरण में सांद्रता के मान डालकर वेग की गणना की जाती है। पहले स्थिति में [A] और [B] के मान डालकर प्रारंभिक वेग निकाला गया। फिर [A] के घटने पर वेग पुनः गणना किया गया।
Q3.3.3 प्लैटिनम सतह पर $\mathrm{NH}_{3}$ का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है। $\mathrm{N}_{2}$ एवं $\mathrm{H}_{2}$ के उत्पादन की दर क्या होगी जब $k$ का मान $2.5 \times 10^{-4} \mathrm{~mol} \mathrm{~L}^{-1} \mathrm{~s}^{-1}$ हो?
उत्तर:
शून्य कोटि अभिक्रिया में वेग स्थिरांक $k$ ही वेग होता है क्योंकि सांद्रता का प्रभाव नहीं होता। इसलिए, $\mathrm{N}_2$ और $\mathrm{H}_2$ के उत्पादन की दर = $k = 2.5 \times 10^{-4} \mathrm{mol} \mathrm{L}^{-1} \mathrm{s}^{-1}$
व्याख्या:
शून्य कोटि अभिक्रिया में वेग स्थिरांक $k$ ही वेग होता है क्योंकि अभिक्रियक की सांद्रता का वेग पर कोई प्रभाव नहीं होता। अतः उत्पादन की दर $k$ के बराबर होगी।
Q4.3.4 डाइमेथिल ईथर के अपघटन से $\mathrm{CH}_{4}, \mathrm{H}_{2}$ तथा $\mathrm{CO}$ बनते हैं। इस अभिक्रिया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है— $$ \text{वेग} = k \left[ \mathrm{CH}_{3} \mathrm{OCH}_{3} \right]^{3/2} $$ अभिक्रिया के वेग का अनुगमन बंद पात्र में बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अत: वेग समीकरण को डाइमेथिल ईथर के आधिक दाब के पद में भी दिया जा सकता है। अत: $$ \text{वेग} = k \left( p_{\mathrm{CH}_{3} \mathrm{OCH}_{3}} \right)^{3/2} $$ यदि दाब को bar में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभिक्रिया के वेग एवं वेग स्थिरांक की इकाइयाँ क्या होंगी?
उत्तर:
दिया गया: वेग = k (p_{CH3OCH3})^{3/2} दाब की इकाई: bar समय की इकाई: मिनट वेग की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ (सामान्यतः) चूंकि वेग = k × (दाब)^{3/2} इसलिए, k की इकाई = (mol L⁻¹ min⁻¹) / (bar)^{3/2} = mol L⁻¹ min⁻¹ bar^{-3/2} अतः, वेग की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ वेग स्थिरांक की इकाई: mol L⁻¹ min⁻¹ bar^{-3/2}
व्याख्या:
वेग समीकरण में दाब के घात के अनुसार वेग स्थिरांक की इकाई निर्धारित की जाती है। दाब bar में है और समय मिनट में है, इसलिए वेग की इकाई mol L⁻¹ min⁻¹ होगी। वेग स्थिरांक की इकाई वेग की इकाई को दाब के घात से भाग देकर प्राप्त होती है।
Q5.3.5 रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले मुख्य कारक हैं: 1. अभिक्रियक की सांद्रता 2. तापमान 3. उत्प्रेरक (Catalyst) की उपस्थिति 4. अभिक्रिया का दाब (विशेषकर गैसों के लिए) 5. अभिक्रिया के अभिक्रियाशील पदार्थों की प्रकृति 6. प्रकाश (कुछ अभिक्रियाओं में) 7. घोल का प्रकार और उसकी प्रकृति (यदि अभिक्रिया घोल में हो) ये कारक अभिक्रिया की गति को बढ़ा या घटा सकते हैं।
व्याख्या:
अभिक्रिया की गति पर विभिन्न भौतिक और रासायनिक कारक प्रभाव डालते हैं। सांद्रता बढ़ने से अभिक्रिया की गति बढ़ती है क्योंकि अभिक्रियक अधिक होते हैं। तापमान बढ़ने से अणुओं की ऊर्जा बढ़ती है जिससे वेग बढ़ता है। उत्प्रेरक अभिक्रिया की ऊर्जा बाधा को कम करता है। दाब गैसों की सांद्रता को प्रभावित करता है।
Q6.3.6 किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा; यदि अभिक्रियक की सांद्रता— (i) दुगुनी कर दी जाए (ii) आधी कर दी जाए
उत्तर:
(i) यदि अभिक्रियक की सांद्रता दुगुनी हो जाए तो वेग में वृद्धि होगी। चूंकि अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है, वेग = k [A]^2 यदि [A] को 2[A] कर दिया जाए तो नया वेग = k (2[A])^2 = 4 k [A]^2 = 4 × प्रारंभिक वेग अर्थात् वेग चार गुना हो जाएगा। (ii) यदि अभिक्रियक की सांद्रता आधी कर दी जाए तो वेग घट जाएगा। नया वेग = k (½ [A])^2 = ¼ k [A]^2 = ¼ × प्रारंभिक वेग अर्थात् वेग एक-चौथाई रह जाएगा।
व्याख्या:
द्वितीय कोटि अभिक्रिया में वेग सांद्रता के वर्ग के समानुपाती होता है। इसलिए सांद्रता में परिवर्तन वेग को घातीय रूप से प्रभावित करता है।
Q7.3.7 वेग स्थिरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप में कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं?
उत्तर:
वेग स्थिरांक पर तापमान का प्रभाव होता है; तापमान बढ़ने पर वेग स्थिरांक बढ़ता है। इस प्रभाव को आरेनियस समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है: $$ k = A e^{-E_a/(RT)} $$ जहाँ, - $k$ वेग स्थिरांक है - $A$ पूर्व-गुणांक (frequency factor) - $E_a$ सक्रियण ऊर्जा - $R$ गैस स्थिरांक - $T$ तापमान (केल्विन में) यह समीकरण दर्शाता है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, $k$ का मान बढ़ता है क्योंकि $e^{-E_a/(RT)}$ बढ़ता है।
व्याख्या:
तापमान बढ़ने से अणुओं की औसत ऊर्जा बढ़ती है जिससे अधिक अणु सक्रियण ऊर्जा पार कर पाते हैं और अभिक्रिया की गति बढ़ती है। आरेनियस समीकरण इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप में दर्शाता है।
Q8.3.8 एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए— | t/s | 0 | 30 | 60 | 90 | | --- | --- | --- | --- | --- | | [A]/ mol L⁻¹ | 0.55 | 0.31 | 0.17 | 0.085 | 30 से 60 सेकेंड समय अंतराल में औसत वेग की गणना कीजिए।
उत्तर:
औसत वेग = $-\frac{\Delta [A]}{\Delta t}$ 30 से 60 सेकेंड में, $[A]_{30s} = 0.31$ mol L⁻¹ $[A]_{60s} = 0.17$ mol L⁻¹ $\Delta [A] = 0.17 - 0.31 = -0.14$ mol L⁻¹ $\Delta t = 60 - 30 = 30$ s औसत वेग = $-(-0.14)/30 = 0.14/30 = 0.00467$ mol L⁻¹ s⁻¹
व्याख्या:
औसत वेग को सांद्रता परिवर्तन को समय परिवर्तन से भाग देकर निकाला जाता है। चूंकि सांद्रता घट रही है, वेग सकारात्मक होगा।
Rasayan vigyan bhag I के सभी 5 अध्याय
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