NCERTCh 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Class 11📖 Bhautiki-I📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 7Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

3.1 भूमिका

व्याख्या

3.1 भूमिका

इस अनुभाग में समतल में गति की अवधारणा का परिचय दिया गया है। पिछले अध्याय में हमने एकविमीय गति के लिए स्थिति, विस्थापन, वेग और त्वरण की परिभाषाएँ सीखी थीं। एकविमीय गति में दिशा केवल दो होती है, इसलिए दिशा को + और – चिह्नों से व्यक्त किया जा सकता है। परंतु जब गति द्विविमीय (समतल) या त्रिविमीय (त्रि-आयामी) होती है, तब दिशा को केवल चिह्नों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में हमें सदिशों (vectors) की आवश्यकता होती है। इस अध्याय में हम सदिशों के गुण, उनका योग, घटाव, और वास्तविक संख्या से गुणा करना सीखेंगे। इसके बाद समतल में वस्तु की गति का अध्ययन करेंगे। सरल उदाहरण के रूप में एकसमान त्वरण से गति और प्रक्षेप्य गति का विश्लेषण करेंगे। अंत में वृत्तीय गति की भी चर्चा होगी। इस अध्याय में प्राप्त समीकरणों को त्रिविमीय गति के लिए भी विस्तारित किया जा सकता है।

  • एकविमीय गति में दिशा को + और – चिह्नों से व्यक्त किया जाता है।
  • द्विविमीय या त्रिविमीय गति के लिए सदिशों की आवश्यकता होती है।
  • सदिशों के गुण, योग, घटाव और गुणा सीखना आवश्यक है।
  • समतल में गति के लिए सदिशों का उपयोग किया जाएगा।
  • प्रक्षेप्य गति और वृत्तीय गति के उदाहरणों पर चर्चा होगी।
  • 📌 सदिश (Vector): परिमाण और दिशा दोनों वाली राशि।
  • 📌 अदिश (Scalar): केवल परिमाण वाली राशि।
  • 📌 विस्थापन: प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की दिशा और दूरी।

3.2 अदिश एवं सदिश

व्याख्या

3.2 अदिश एवं सदिश

इस खंड में अदिश और सदिश राशियों का परिचय दिया गया है। अदिश राशियाँ केवल परिमाण से परिभाषित होती हैं, जैसे दूरी, द्रव्यमान, तापमान आदि। इनका जोड़-घटाव सामान्य संख्याओं की तरह होता है। दूसरी ओर, सदिश राशियों में परिमाण के साथ दिशा भी होती है, जैसे विस्थापन, वेग, त्वरण और बल। सदिशों को मोटे अक्षरों या अक्षर के ऊपर तीर लगाकर व्यक्त किया जाता है। किसी सदिश का परिमाण उसके ‘परम मान’ कहलाता है और इसे |A| से दर्शाया जाता है। 3.2.1 स्थिति एवं विस्थापन सदिश: किसी समतल में गतिमान वस्तु की स्थिति को किसी बिंदु O से वस्तु के वर्तमान स्थान P तक खींची गई रेखा सदिश r द्वारा व्यक्त किया जाता है। वस्तु के दो भिन्न समयों t और t' पर स्थितियाँ P और P' हों तो विस्थापन सदिश Δr = r' – r होता है, जो वस्तु की प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक की दिशा और दूरी को दर्शाता है। विस्थापन सदिश वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक पथ पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं पर निर्भर करता है। 3.2.2 सदिशों की समता: दो सदिश तभी समान होते हैं जब उनके परिमाण समान हों और दिशा भी समान हो। यदि दिशा भिन्न हो तो सदिश समान नहीं होंगे, भले ही परिमाण समान हो।

  • अदिश राशियाँ केवल परिमाण से परिभाषित होती हैं।
  • सदिश राशियों में परिमाण के साथ दिशा भी होती है।
  • स्थिति सदिश वस्तु की स्थिति को दर्शाता है।
  • विस्थापन सदिश वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच का सदिश होता है।
  • दो सदिश तभी समान होते हैं जब उनका परिमाण और दिशा दोनों समान हों।
  • 📌 परम मान: सदिश का परिमाण।
  • 📌 स्थिति सदिश: वस्तु की स्थिति को दर्शाने वाला सदिश।
  • 📌 विस्थापन सदिश: प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच का सदिश।

3.3 सदिशों की वास्तविक संख्या से गुणा

व्याख्या

3.3 सदिशों की वास्तविक संख्या से गुणा

इस खंड में सदिशों को वास्तविक संख्या (स्केलर) से गुणा करने के नियमों का वर्णन है। यदि सदिश A को धनात्मक वास्तविक संख्या λ से गुणा किया जाए तो परिणामी सदिश λA होगा, जिसका परिमाण λ गुना होगा और दिशा वही रहेगी। यदि λ ऋणात्मक हो तो परिणामी सदिश की दिशा म

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.3.1 निम्नलिखित भौतिक राशियों में से बतलाइए कि कौन-सी सदिश है और कौन-सी अदिश : आयतन, द्रव्यमान, चाल, त्वरण, घनत्व, मोल संख्या, वेग, कोणीय आवृत्ति, विस्थापन, कोणीय वेग।

उत्तर:

सदिश राशियाँ वे होती हैं जिनके पास परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, जबकि अदिश राशियाँ केवल परिमाण रखती हैं। सदिश राशियाँ: चाल, त्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग अदिश राशियाँ: आयतन, द्रव्यमान, घनत्व, मोल संख्या, कोणीय आवृत्ति

व्याख्या:

आयतन, द्रव्यमान, घनत्व, मोल संख्या, कोणीय आवृत्ति केवल परिमाण रखते हैं अतः अदिश हैं। चाल, त्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग में दिशा भी होती है अतः वे सदिश हैं।

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Q2.3.2 निम्नाकित सूची में से दो अदिश राशियों को छाँटिए- बल, कोणीय संवेग, कार्य, धारा, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आघूर्ण, आपेक्षिक वेग।

उत्तर:

अदिश राशियाँ: कार्य, धारा बल, कोणीय संवेग, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आघूर्ण, आपेक्षिक वेग सदिश राशियाँ हैं क्योंकि इनमें दिशा होती है।

व्याख्या:

कार्य और धारा केवल परिमाण रखते हैं अतः अदिश हैं। अन्य सभी में दिशा होती है अतः वे सदिश हैं।

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Q3.3.3 निम्नलिखित सूची में से एकमात्र सदिश राशि को छाँटिए- ताप, दाब, आवेग, समय, शक्ति, पूरी पथ-लंबाई, ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव, घर्षण गुणांक, आवेश।

उत्तर:

सदिश राशि: आवेग बाकी सभी अदिश राशियाँ हैं क्योंकि उनमें केवल परिमाण होता है।

व्याख्या:

आवेग में दिशा होती है अतः यह सदिश है। ताप, दाब, समय, शक्ति, पथ-लंबाई, ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव, घर्षण गुणांक, आवेश सभी अदिश हैं।

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Q4.3.4 कारण सहित बताइए कि अदिश तथा सदिश राशियों के साथ क्या निम्नलिखित बीजगणितीय संक्रियाएँ अर्थपूर्ण हैं? (a) दो अदिशों को जोड़ना, (b) एक ही विमाओं के एक सदिश व एक अदिश को जोड़ना, (c) एक सदिश को एक अदिश से गुणा करना, (d) दो अदिशों का गुणन, (e) दो सदिशों को जोड़ना, (f) एक सदिश के घटक को उसी सदिश से जोड़ना ।

उत्तर:

उत्तर: (a) दो अदिशों को जोड़ना: अर्थपूर्ण है क्योंकि दोनों के परिमाण और दिशा नहीं होते, केवल परिमाण होते हैं। इसलिए जोड़ना संभव है। (b) एक सदिश और एक अदिश को जोड़ना: अर्थपूर्ण नहीं है क्योंकि सदिश में दिशा होती है और अदिश में नहीं, अतः सीधे जोड़ना भौतिक अर्थ में सही नहीं। (c) एक सदिश को एक अदिश से गुणा करना: अर्थपूर्ण है क्योंकि अदिश से गुणा करने पर सदिश का परिमाण बदलता है पर दिशा अपरिवर्तित रहती है। (d) दो अदिशों का गुणन: अर्थपूर्ण है, जैसे ऊर्जा = शक्ति × समय। (e) दो सदिशों को जोड़ना: अर्थपूर्ण है यदि दोनों सदिश एक ही विमा में हों। (f) एक सदिश के घटक को उसी सदिश से जोड़ना: अर्थपूर्ण है क्योंकि घटक सदिश के भाग होते हैं।

व्याख्या:

अदिश राशियाँ केवल परिमाण रखती हैं, सदिश राशियों में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। इसलिए जोड़ने और गुणा करने के नियम भिन्न होते हैं।

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Q5.3.5 निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन को ध्यानपूर्वक पढ़िए और कारण सहित बताइए कि यह सत्य है या असत्य : (a) किसी सदिश का परिमाण सदैव एक अदिश होता है, (b) किसी सदिश का प्रत्येक घटक सदैव अदिश होता है, (c) किसी कण द्वारा चली गई पथ की कुल लंबाई सदैव विस्थापन सदिश के परिमाण के बराबर होती है, (d) किसी कण की औसत चाल (पथ तय करने में लगे समय द्वारा विभाजित कुल पथ-लंबाई) समय के समान-अंतराल में कण के औसत वेग के परिमाण से अधिक या उसके बराबर होती है । (e) उन तीन सदिशों का योग जो एक समतल में नहीं हैं, कभी भी शून्य सदिश नहीं होता ।

उत्तर:

(a) सत्य: किसी सदिश का परिमाण एक अदिश होता है क्योंकि परिमाण केवल मात्रा है। (b) सत्य: सदिश के घटक अदिश होते हैं क्योंकि वे केवल परिमाण होते हैं। (c) असत्य: पथ की कुल लंबाई विस्थापन के परिमाण से अधिक या बराबर होती है, हमेशा बराबर नहीं। (d) सत्य: औसत चाल पथ की लंबाई को समय से विभाजित करती है, जो औसत वेग के परिमाण से अधिक या बराबर होती है। (e) असत्य: तीन सदिशों का योग जो समतल में नहीं हैं, शून्य सदिश हो सकता है यदि वे उचित दिशा में हों।

व्याख्या:

सदिशों के परिमाण और घटकों की प्रकृति के आधार पर प्रत्येक कथन का विश्लेषण किया गया है।

MediumNCERT
Q6.3.6 निम्नलिखित असमिकाओं की ज्यामिति या किसी अन्य विधि द्वारा स्थापना कीजिए : (a) $|\mathbf{a} + \mathbf{b}| \leq |\mathbf{a}| + |\mathbf{b}|$ (b) $|\mathbf{a} + \mathbf{b}| \geq ||\mathbf{a}| - |\mathbf{b}||$ (c) $|a - b| \leq |a| + |b|$ (d) $|a - b| \geq |a| - |b|$ इनमें समिका (समता) का चिह्न कब लागू होता है ?

उत्तर:

उत्तर: (a) त्रिकोण असमीकरण: किसी दो सदिशों के योग का परिमाण उनके परिमाणों के योग से अधिक नहीं हो सकता। स्थापना: ज्यामिति द्वारा, यदि दो सदिशों को सिर से पूंछ जोड़कर जोड़ा जाए तो उनकी resultant सदिश की लंबाई उनके परिमाणों के योग से अधिक नहीं होती। (b) $|\mathbf{a} + \mathbf{b}| \geq ||\mathbf{a}| - |\mathbf{b}||$ भी त्रिकोण असमीकरण का दूसरा रूप है। (c) और (d) भी इसी प्रकार के असमीकरण हैं जो स्केलर राशियों के लिए लागू होते हैं। समता तब होती है जब दोनों सदिश समान दिशा में हों या एक दूसरे के विपरीत दिशा में हों।

व्याख्या:

त्रिकोण असमीकरण ज्यामिति और सदिशों के गुणों पर आधारित है। समता तब होती है जब सदिश समान दिशा में हों।

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Q7.3.7 दिया है $a + b + c + d = 0$, नीचे दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है : (a) $a, b, c$ तथा $d$ में से प्रत्येक शून्य सदिश है, (b) $(a + c)$ का परिमाण $(b + d)$ के परिमाण के बराबर है, (c) $a$ का परिमाण $b, c$ तथा $d$ के परिमाणों के योग से कभी भी अधिक नहीं हो सकता, (d) यदि $a$ तथा $d$ संरेखीय नहीं हैं तो $b + c$ अवश्य ही $a$ तथा $d$ के समतल में होगा, और यह $a$ तथा $d$ के अनुदिश होगा यदि वे संरेखीय हैं ।
A.A) (a) सही है
B.B) (b) सही है
C.C) (c) सही है
D.D) (d) सही है

उत्तर:

सही उत्तर: (b) $(a + c)$ का परिमाण $(b + d)$ के परिमाण के बराबर है। कारण: $a + b + c + d = 0$ से $a + c = -(b + d)$ होता है, अतः उनका परिमाण समान होगा।

व्याख्या:

सदिशों के योग के गुणों के अनुसार, यदि चार सदिशों का योग शून्य है, तो दो सदिशों के योग का परिमाण शेष दो सदिशों के योग के परिमाण के बराबर होगा।

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Q8.3.8 तीन लड़कियाँ 200 m त्रिज्या वाली वृत्तीय बर्फीली सतह पर स्केटिंग कर रही हैं। वे सतह के किनारे के बिंदु P से स्केटिंग शुरू करती हैं तथा P के व्यासीय विपरीत बिंदु Q पर विभिन्न पथों से होकर पहुँचती हैं जैसा कि चित्र 3.19 में दिखाया गया है। प्रत्येक लड़की के विस्थापन सदिश का परिमाण कितना है ? किस लड़की के लिए यह वास्तव में स्केट किए गए पथ की लंबाई के बराबर है ।

उत्तर:

विस्थापन सदिश का परिमाण सभी के लिए PQ की दूरी के बराबर होगा, जो कि व्यास के बराबर है। त्रिज्या r = 200 m है, अतः व्यास = 2 × 200 = 400 m। इसलिए प्रत्येक लड़की का विस्थापन सदिश का परिमाण 400 m होगा। स्केट किए गए पथ की लंबाई केवल उस लड़की के लिए विस्थापन के बराबर होगी जिसने सीधे रेखा PQ पर स्केट किया है। अन्य लड़कियों के लिए पथ लंबा होगा।

व्याख्या:

विस्थापन सदिश शुरू और अंत बिंदु के बीच की सीधी दूरी होती है, जबकि पथ-लंबाई उस रास्ते की कुल लंबाई होती है।

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