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Testing Fundamentals 107 - 112

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Software Engineering (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट

Testing Fundamentals 107 - 112अध्ययन नोट्स

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11.1 परीक्षण का परिचय

व्याख्या

11.1 परीक्षण का परिचय

इस अनुभाग में सॉफ़्टवेयर परीक्षण की मूलभूत अवधारणा का परिचय दिया गया है। परीक्षण (Testing) सॉफ़्टवेयर विकास जीवन चक्र (SDLC) का एक अनिवार्य चरण है, जिसका मुख्य उद्देश्य विकसित सॉफ़्टवेयर में त्रुटियों (Errors) या दोषों (Defects) की पहचान करना है। परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सॉफ़्टवेयर उत्पाद उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है। परीक्षण के बिना, सॉफ़्टवेयर में गंभीर त्रुटियाँ रह सकती हैं, जिससे उपयोगकर्ता को हानि पहुँच सकती है या सिस्टम विफल हो सकता है। परीक्षण प्रक्रिया में सॉफ़्टवेयर के विभिन्न भागों की जाँच की जाती है, जैसे कि कोड, फंक्शनलिटी, परफॉर्मेंस, सुरक्षा आदि। परीक्षण के दौरान, सॉफ़्टवेयर को विभिन्न इनपुट्स के साथ चलाया जाता है और देखा जाता है कि आउटपुट अपेक्षित परिणामों के अनुरूप है या नहीं। परीक्षण का उद्देश्य केवल दोषों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम भी है। परीक्षण के माध्यम से सॉफ़्टवेयर की विश्वसनीयता, गुणवत्ता और प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है।

  • सॉफ़्टवेयर परीक्षण का मुख्य उद्देश्य दोषों की पहचान करना है।
  • परीक्षण सॉफ़्टवेयर की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है।
  • परीक्षण के बिना, सॉफ़्टवेयर में गंभीर त्रुटियाँ रह सकती हैं।
  • परीक्षण प्रक्रिया में कोड, फंक्शनलिटी, परफॉर्मेंस आदि की जाँच होती है।
  • परीक्षण उपयोगकर्ता आवश्यकताओं की पूर्ति की पुष्टि करता है।
  • 📌 परीक्षण (Testing): सॉफ़्टवेयर में दोषों की पहचान करने की प्रक्रिया।
  • 📌 त्रुटि (Error): कोड या लॉजिक में हुई गलती।
  • 📌 दोष (Defect): सॉफ़्टवेयर में पाया गया कोई भी कमी।

11.2 परीक्षण के प्रकार

अवधारणा

11.2 परीक्षण के प्रकार

इस अनुभाग में सॉफ़्टवेयर परीक्षण के विभिन्न प्रकारों का विस्तार से वर्णन किया गया है। परीक्षण के प्रकारों को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा गया है: मैन्युअल परीक्षण (Manual Testing) और स्वचालित परीक्षण (Automated Testing)। मैन्युअल परीक्षण में परीक्षक स्वयं सॉफ़्टवेयर को चलाकर परीक्षण करता है, जबकि स्वचालित परीक्षण में परीक्षण स्क्रिप्ट्स या टूल्स का उपयोग किया जाता है। परीक्षण के स्तर के आधार पर भी विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे यूनिट परीक्षण (Unit Testing), इंटीग्रेशन परीक्षण (Integration Testing), सिस्टम परीक्षण (System Testing), और स्वीकृति परीक्षण (Acceptance Testing)। प्रत्येक प्रकार का उद्देश्य और प्रक्रिया भिन्न होती है। उदाहरण के लिए, यूनिट परीक्षण में कोड की सबसे छोटी इकाई की जाँच होती है, जबकि सिस्टम परीक्षण में पूरे सॉफ़्टवेयर की कार्यक्षमता की जाँच होती है।

  • परीक्षण दो प्रकार के होते हैं: मैन्युअल और स्वचालित।
  • यूनिट परीक्षण कोड की सबसे छोटी इकाई की जाँच करता है।
  • इंटीग्रेशन परीक्षण विभिन्न मॉड्यूल्स के एकीकरण की जाँच करता है।
  • सिस्टम परीक्षण पूरे सॉफ़्टवेयर की कार्यक्षमता की जाँच करता है।
  • स्वीकृति परीक्षण उपयोगकर्ता आवश्यकताओं की पूर्ति की पुष्टि करता है।
  • 📌 मैन्युअल परीक्षण: परीक्षक द्वारा हाथ से किया गया परीक्षण।
  • 📌 स्वचालित परीक्षण: परीक्षण टूल्स या स्क्रिप्ट्स द्वारा किया गया परीक्षण।
  • 📌 यूनिट परीक्षण: कोड की सबसे छोटी इकाई की जाँच।

11.3 परीक्षण विधियाँ

अवधारणा

11.3 परीक्षण विधियाँ

इस अनुभाग में सॉफ़्टवेयर परीक्षण की प्रमुख विधियों का वर्णन किया गया है। मुख्यतः दो विधियाँ होती हैं: ब्लैक बॉक्स परीक्षण (Black Box Testing) और वाइट बॉक्स परीक्षण (White Box Testing)। ब्लैक बॉक्स परीक्षण में परीक्षक कोड के आंतरिक संरचना को देखे बिना