It Has No Retrospective Effect: The law of the contract enacted as on 1 sep.1872, and applies
It Has No Retrospective Effect: The law of the contract enacted as on 1 sep.1872, and applies — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
5.1 प्रस्तावना
व्याख्या5.1 प्रस्तावना
इस अनुभाग में भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसकी आवश्यकता को विस्तार से समझाया गया है। 19वीं शताब्दी के दौरान व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण एक समान और स्पष्ट संविदा कानून की आवश्यकता महसूस की गई। अंग्रेजी शासन के दौरान विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग नियम लागू थे, जिससे व्यापार में असुविधा होती थी। इसी समस्या के समाधान हेतु भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 को 1 सितम्बर 1872 से लागू किया गया। यह अधिनियम भारत में सभी संविदाओं पर लागू होता है, जब तक कि कोई विशेष कानून न हो। इस अधिनियम का उद्देश्य सभी नागरिकों को संविदा संबंधी अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना है।
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872, 1 सितम्बर 1872 से लागू हुआ।
- इस अधिनियम का उद्देश्य व्यापारिक लेन-देन में स्पष्टता लाना है।
- यह अधिनियम पूरे भारत में लागू होता है, सिवाय जम्मू-कश्मीर के (NCERT अनुसार)।
- अधिनियम से पहले विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग संविदा नियम थे।
- यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है।
- 📌 संविदा (Contract): दो या दो से अधिक पक्षों के बीच किया गया वैधानिक समझौता।
- 📌 अधिनियम (Act): संसद द्वारा पारित कोई विधिक प्रावधान।
5.2 अधिनियम की प्रवृत्ति
अवधारणा5.2 अधिनियम की प्रवृत्ति
इस अनुभाग में भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की प्रवृत्ति (nature) को स्पष्ट किया गया है। यह अधिनियम एक व्यापक कानून है, जो सभी प्रकार की संविदाओं पर लागू होता है, जब तक कि कोई विशेष अपवाद न हो। अधिनियम के अनुसार, संविदा का निर्माण, निष्पादन, उल्लंघन और प्रवर्तन (enforcement) के नियम निर्धारित किए गए हैं। यह अधिनियम न्यायालयों को संविदा विवादों में निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। अधिनियम की प्रवृत्ति लचीली है, जिससे समय के साथ इसमें संशोधन किए जा सकते हैं।
- अधिनियम सभी प्रकार की संविदाओं पर लागू होता है।
- संविदा के निर्माण, निष्पादन और उल्लंघन के नियम स्पष्ट हैं।
- न्यायालयों के लिए यह मार्गदर्शक ग्रंथ है।
- अधिनियम में समय-समय पर संशोधन संभव हैं।
- विशेष मामलों में अन्य कानूनों की प्राथमिकता हो सकती है।
- 📌 प्रवृत्ति (Nature): किसी कानून की मूल विशेषता।
- 📌 संशोधन (Amendment): किसी कानून में किया गया परिवर्तन।
5.3 अधिनियम का क्षेत्रीय विस्तार
व्याख्या5.3 अधिनियम का क्षेत्रीय विस्तार
यह अनुभाग स्पष्ट करता है कि भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 का क्षेत्रीय विस्तार क्या है। अधिनियम भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होता है, सिवाय उन क्षेत्रों के जहाँ कोई विशेष अपवाद है। अधिनियम के लागू होने का अर्थ है कि भारत में रह
SLM - Legal Aspects of Business (Hindi) के सभी 20 अध्याय
Legal Aspects of Business · Vardhman Mahaveer Open University
5 और अध्याय — सभी देखें →