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The State of Jammu & Kashmir enjoys a special status under Article – 370 of Indian Constitution.

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The State of Jammu & Kashmir enjoys a special status under Article – 370 of Indian Constitution.अध्ययन नोट्स

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1.1 जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा: अनुच्छेद 370 का परिचय

व्याख्या

1.1 जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा: अनुच्छेद 370 का परिचय

इस अनुभाग में जम्मू और कश्मीर राज्य को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष दर्जे का परिचय दिया गया है। अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जिसके तहत जम्मू और कश्मीर को अन्य राज्यों की तुलना में विशेष अधिकार और स्वायत्तता प्राप्त थी। यह अनुच्छेद 1949 में संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया था, और इसके अनुसार जम्मू और कश्मीर राज्य को अपनी संविधान सभा बनाने और राज्य के लिए अलग संविधान तैयार करने का अधिकार मिला। इसके अलावा, भारतीय संसद की शक्तियाँ इस राज्य पर सीमित थीं; केवल रक्षा, विदेशी मामले और संचार से संबंधित विषयों पर ही संसद कानून बना सकती थी। अन्य विषयों पर संसद के कानून लागू करने के लिए राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे, जैसे कि बाहरी राज्यों के नागरिकों को राज्य में संपत्ति खरीदने या सरकारी नौकरियों में आवेदन करने की अनुमति नहीं थी।

  • अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था।
  • राज्य को अपनी संविधान सभा बनाने का अधिकार था।
  • भारतीय संसद की शक्तियाँ सीमित थीं।
  • राज्य के नागरिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे।
  • अन्य राज्यों के नागरिकों को संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं थी।
  • राज्य के लिए अलग संविधान लागू था।
  • 📌 अनुच्छेद 370: भारतीय संविधान का वह अनुच्छेद जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता था।
  • 📌 संविधान सभा: राज्य की अपनी संविधान बनाने वाली संस्था।

1.2 अनुच्छेद 370 का ऐतिहासिक विकास

व्याख्या

1.2 अनुच्छेद 370 का ऐतिहासिक विकास

इस अनुभाग में अनुच्छेद 370 के ऐतिहासिक विकास की चर्चा की गई है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद जम्मू और कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के लिए शर्तें रखीं। विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर के बाद राज्य को विशेष स्वायत्तता देने का निर्णय लिया गया। संविधान सभा में शेख अब्दुल्ला और गोपालस्वामी आयंगर ने अनुच्छेद 370 का प्रारूप प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक विशिष्टता को बनाए रखना था। अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को अपनी संविधान सभा बनाने और भारतीय संविधान के केवल कुछ प्रावधानों को लागू करने की अनुमति दी गई।

  • 1947 में महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
  • राज्य को स्वायत्तता देने के लिए अनुच्छेद 370 का प्रारूप तैयार हुआ।
  • शेख अब्दुल्ला और गोपालस्वामी आयंगर ने संविधान सभा में प्रस्ताव रखा।
  • राज्य की विशिष्टता को बनाए रखने का उद्देश्य था।
  • केवल रक्षा, विदेशी मामले और संचार पर संसद के कानून लागू थे।
  • राज्य की संविधान सभा ने भारतीय संविधान के प्रावधानों का चयन किया।
  • 📌 विलय पत्र: वह दस्तावेज जिसके तहत जम्मू और कश्मीर भारत में शामिल हुआ।
  • 📌 स्वायत्तता: राज्य को अपने मामलों में स्वतंत्रता।

1.3 अनुच्छेद 370 के कानूनी प्रावधान

अवधारणा

1.3 अनुच्छेद 370 के कानूनी प्रावधान

इस अनुभाग में अनुच्छेद 370 के कानूनी प्रावधानों की विस्तार से चर्चा की गई है। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर राज्य को भारतीय संविधान के केवल कुछ प्रावधानों को लागू करने की अनुमति थी। संसद के कानून राज्य पर तभी लागू होते थे जब राज्य सरकार सहमत हो

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