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English Common Law :It is the foundation on which the super structure of the of the Indian

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Legal Aspects of Business (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट

English Common Law :It is the foundation on which the super structure of the of the Indianअध्ययन नोट्स

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परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में अंग्रेज़ी कॉमन लॉ (English Common Law) की मूलभूत अवधारणा और इसकी भारतीय विधिक प्रणाली में भूमिका को समझाया गया है। कॉमन लॉ वह विधिक प्रणाली है, जो इंग्लैंड में विकसित हुई और बाद में ब्रिटिश उपनिवेशों में लागू की गई। भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज़ी कॉमन लॉ को अपनाया गया, जिससे भारतीय विधिक व्यवस्था की नींव पड़ी। कॉमन लॉ मुख्यतः न्यायालयों के निर्णयों (precedents) पर आधारित होती है, न कि केवल लिखित क़ानूनों (statutes) पर। इसका मुख्य उद्देश्य न्याय, समानता और व्यावहारिकता को बढ़ावा देना है। अंग्रेज़ी कॉमन लॉ ने भारतीय विधिक प्रणाली को अनुशासन, तर्क और न्यायिक स्वतंत्रता प्रदान की। इस प्रणाली के अंतर्गत न्यायाधीशों द्वारा दिए गए निर्णय भविष्य के मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन जाते हैं। इस प्रकार, भारतीय विधिक प्रणाली में अंग्रेज़ी कॉमन लॉ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमारे क़ानूनों की संरचना, व्याख्या और अनुप्रयोग को प्रभावित करती है।

  • अंग्रेज़ी कॉमन लॉ इंग्लैंड में विकसित विधिक प्रणाली है।
  • यह न्यायालयों के निर्णयों (precedents) पर आधारित होती है।
  • भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान इसे अपनाया गया।
  • इसने भारतीय विधिक प्रणाली की नींव रखी।
  • कॉमन लॉ न्याय, समानता और व्यावहारिकता को बढ़ावा देती है।
  • न्यायाधीशों के निर्णय भविष्य के मामलों के लिए मार्गदर्शक होते हैं।
  • 📌 कॉमन लॉ: न्यायालयों के निर्णयों पर आधारित विधिक प्रणाली।
  • 📌 प्रेसिडेंट (Precedent): पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णय, जो भविष्य के मामलों के लिए मार्गदर्शक होते हैं।

अंग्रेज़ी कॉमन लॉ की विशेषताएँ

अवधारणा

अंग्रेज़ी कॉमन लॉ की विशेषताएँ

इस अनुभाग में अंग्रेज़ी कॉमन लॉ की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन किया गया है। कॉमन लॉ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह न्यायालयों के निर्णयों पर आधारित होती है, न कि केवल लिखित क़ानूनों पर। इसके अंतर्गत न्यायाधीशों द्वारा दिए गए निर्णयों को 'प्रेसिडेंट' कहा जाता है, जो समान प्रकृति के मामलों में बाध्यकारी होते हैं। दूसरी विशेषता इसकी लचीलापन (flexibility) है, जिससे समय के साथ सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार इसमें परिवर्तन संभव है। तीसरी विशेषता यह है कि इसमें न्याय, समानता और व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी जाती है। चौथी विशेषता यह है कि इसमें न्यायाधीशों की भूमिका निर्णायक होती है, क्योंकि वे न केवल क़ानून की व्याख्या करते हैं, बल्कि नए सिद्धांत भी स्थापित करते हैं। पाँचवीं विशेषता यह है कि कॉमन लॉ में केस लॉ (case law) का महत्व अत्यधिक है।

  • न्यायालयों के निर्णयों पर आधारित विधिक प्रणाली।
  • प्रेसिडेंट्स का पालन अनिवार्य।
  • लचीली और समय के अनुसार परिवर्तनीय।
  • न्याय, समानता और व्यावहारिकता को प्राथमिकता।
  • न्यायाधीशों की निर्णायक भूमिका।
  • केस लॉ का उच्च महत्व।
  • 📌 लचीलापन (Flexibility): समय के अनुसार क़ानून में परिवर्तन की क्षमता।
  • 📌 केस लॉ: न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णयों का संकलन।

अंग्रेज़ी कॉमन लॉ का विकास

व्याख्या

अंग्रेज़ी कॉमन लॉ का विकास

इस अनुभाग में अंग्रेज़ी कॉमन लॉ के ऐतिहासिक विकास को विस्तार से समझाया गया है। कॉमन लॉ का उद्भव इंग्लैंड के मध्यकालीन काल में हुआ, जब राजा के न्यायालयों ने एक समान विधिक प्रणाली विकसित की। प्रारंभ में, स्थानीय प्रथाओं और परंपराओं के अनुसार निर्णय दिए

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