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Customs and Usage: The customary in a trade govern the merchants of that trade while dealing

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Legal Aspects of Business (Hindi)📖 8 नोट्स⏱️ ~12 मिनट

Customs and Usage: The customary in a trade govern the merchants of that trade while dealingअध्ययन नोट्स

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4.1 प्रस्तावना

व्याख्या

4.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में व्यापार में प्रचलित रीति-रिवाजों (Customs and Usage) की भूमिका और महत्व का परिचय दिया गया है। व्यापारिक लेन-देन में अक्सर लिखित अनुबंध या स्पष्ट नियम नहीं होते, ऐसे में व्यापार की परंपराएँ, रीति-रिवाज और प्रचलित व्यवहार ही व्यापारियों के बीच व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। ये रीति-रिवाज व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकते हैं और समय के साथ विकसित होते हैं। व्यापारिक कानून भी इन प्रथाओं को मान्यता देता है, जिससे व्यापारिक स्थिरता और विश्वास बना रहता है। इस खंड में बताया गया है कि कैसे प्रचलित रीति-रिवाज व्यापारिक अनुबंधों की व्याख्या में सहायक होते हैं और न्यायालय भी इन्हें महत्व देते हैं।

  • व्यापार में रीति-रिवाजों का ऐतिहासिक महत्व है।
  • अनुबंधों की व्याख्या में प्रचलित प्रथाएँ सहायक होती हैं।
  • न्यायालय भी व्यापारिक रीति-रिवाजों को मान्यता देते हैं।
  • रीति-रिवाजों के बिना व्यापार में अस्थिरता आ सकती है।
  • प्रचलित प्रथाएँ समय के साथ बदलती रहती हैं।
  • 📌 रीति-रिवाज (Custom): व्यापार में प्रचलित परंपरागत व्यवहार।
  • 📌 प्रचलन (Usage): किसी व्यापार में सामान्यतः अपनाया गया व्यवहार।

4.2 व्यापार में रीति-रिवाज और प्रचलन की परिभाषा

परिभाषा

4.2 व्यापार में रीति-रिवाज और प्रचलन की परिभाषा

इस खंड में व्यापारिक रीति-रिवाज (Custom) और प्रचलन (Usage) की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। रीति-रिवाज वह व्यवहार है जिसे व्यापार में लंबे समय से लगातार अपनाया जाता है और जिसे व्यापार के सदस्य अनिवार्य मानते हैं। प्रचलन वह व्यवहार है जो किसी विशेष व्यापार या स्थान में सामान्यतः अपनाया जाता है, परंतु वह अनिवार्य नहीं होता। दोनों ही व्यापारिक अनुबंधों की व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। न्यायालय भी इनकी मान्यता को स्वीकार करते हैं, बशर्ते ये रीति-रिवाज न्यायसंगत और स्पष्ट हों।

  • रीति-रिवाज लंबे समय से चले आ रहे व्यवहार हैं।
  • प्रचलन सामान्यतः अपनाए गए व्यवहार होते हैं।
  • दोनों अनुबंध की व्याख्या में सहायक हैं।
  • न्यायालय इन्हें तभी मान्यता देते हैं जब वे स्पष्ट और न्यायसंगत हों।
  • 📌 अनुबंध (Contract): दो पक्षों के बीच कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता।
  • 📌 न्यायालय (Court): न्याय प्रदान करने वाली संस्था।

4.3 व्यापारिक रीति-रिवाजों की कानूनी मान्यता

अवधारणा

4.3 व्यापारिक रीति-रिवाजों की कानूनी मान्यता

इस अनुभाग में बताया गया है कि किस प्रकार व्यापारिक रीति-रिवाजों को भारतीय कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 13 और अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 1 के अनुसार, यदि किसी अनुबंध में कोई बात स्पष्ट नहीं है, तो वहाँ के प्र

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