NCERTCh 9निःशुल्क

Chapter 9

🎓 Class 6📖 Malhar📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 8अध्याय 9 / 13Chapter 10

Chapter 9अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

मैया मैं नहिं माखन खायो

व्याख्या

मैया मैं नहिं माखन खायो

यह कविता सूरदास द्वारा रचित है, जिसमें बालक श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा से मासूमियत से कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कविता में श्रीकृष्ण बताते हैं कि सुबह होते ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था। वे चार पहर तक बंसीवट के नीचे भटकते रहे और शाम को घर लौटे। श्रीकृष्ण अपने छोटे-छोटे हाथों का हवाला देते हुए कहते हैं कि वे छीके (लकड़ी की एक वस्तु) तक भी नहीं पहुँच सकते। वे बताते हैं कि ग्वाल-बाल (गाय चराने वाले बच्चे) उनसे बैर रखते हैं और मक्खन उनके मुख पर लपेट दिया गया है। यशोदा को श्रीकृष्ण की मासूमियत पर विश्वास होता है और वे उन्हें हँसते हुए गले लगा लेती हैं। यह कविता बालपन की सच्चाई, माँ-बेटे के प्रेम और मासूमियत को दर्शाती है। साथ ही इसमें ब्रज की संस्कृति, समय मापन (पहर), और ग्रामीण जीवन के कुछ पहलुओं का भी उल्लेख है। कविता की भाषा सरल और भावपूर्ण है, जो बच्चों के लिए समझने में आसान है।

  • कविता में श्रीकृष्ण अपनी मासूमियत से माखन न खाने की बात कहते हैं।
  • भोर होते ही श्रीकृष्ण को गायों के पीछे मधुबन भेजा गया।
  • वे चार पहर बंसीवट के नीचे भटकते रहे और शाम को घर लौटे।
  • श्रीकृष्ण अपने छोटे हाथों का हवाला देते हैं कि वे छीके तक नहीं पहुँच सकते।
  • ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और मक्खन उनके मुख पर लपेट दिया गया।
  • यशोदा श्रीकृष्ण की मासूमियत पर विश्वास कर उन्हें गले लगाती हैं।
  • 📌 माखन: मक्खन, दूध से बनी एक खाद्य वस्तु।
  • 📌 भोर: सुबह का समय।
  • 📌 मधुबन: मथुरा के पास यमुना के किनारे का वन क्षेत्र।

कवि से परिचय

व्याख्या

कवि से परिचय

इस खंड में कवि सूरदास का परिचय दिया गया है। सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। वे ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध कवि थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर वर्णन अपनी रचनाओं में किया। सूरदास ने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन और ब्रज के अन्य क्षेत्रों में बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में हैं और आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। उनकी कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी चित्रण मिलता है। सूरदास दृष्टिबाधित थे, पर उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचना की कला अद्भुत थी। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई।

  • सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ।
  • वे ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध कवि थे।
  • उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में हैं।
  • सूरदास ने श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर वर्णन किया।
  • वे दृष्टिबाधित थे लेकिन उनकी कल्पना शक्ति अत्यंत प्रबल थी।
  • उनकी कविताएँ आज भी देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं।
  • 📌 ब्रजभाषा: ब्रज क्षेत्र की स्थानीय भाषा जिसमें सूरदास की कविताएँ हैं।
  • 📌 दृष्टिबाधित: दृष्टि से विकलांग व्यक्ति।
  • 📌 बाल-लीला: बाल्यकाल की लीलाएँ, विशेषकर भगवान श्रीकृष्ण की।

पाठ से - मेरी समझ से

व्याख्या

पाठ से - मेरी समझ से

इस खंड में कविता के आधार पर प्रश्न दिए गए हैं जिनका उत्तर छात्र स्वयं या समूह में चर्चा करके देते हैं। प्रश्नों में श्रीकृष्ण के कथन, उनके कार्य और भावनाओं को समझने के लिए विकल्प दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, श्रीकृष्ण ने माखन न खाने का तर्क क्या दिया,

अभ्यास प्रश्नChapter 9

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं। (क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। - परे - छोटो - बिधि - भोरी - कछु - लै - नहिं (ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए— | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | | --- | --- | | 1. उपज | 1. मुसकाई, हँसी | | 2. जानि | 2. उपजना, उत्पन्न होना | | 3. जायो | 3. जानकर, समझकर | | 4. जिय | 4. विश्वास किया, सच माना | | 5. पठायो | 5. बाँह, हाथ, भुजा | | 6. पतियायो | 6. प्रकार, भाँति, रीति | | 7. बहियन | 7. मन, जी | | 8. बिधि | 8. जन्मा | | 9. बिहँसि | 9. मला, लगाया, पोता | | 10. भटक्यो | 10. इधर-उधर घूमा या भटका | | 11. लपटायो | 11. भेज दिया |

उत्तर:

(क) शब्दों के बोलचाल के रूप: - परे → परे - छोटो → छोटा - बिधि → विधि - भोरी → भोली - कछु → कुछ - लै → ले - नहिं → नहीं (ख) मिलान: 1. उपज → 2. उपजना, उत्पन्न होना 2. जानि → 3. जानकर, समझकर 3. जायो → 4. विश्वास किया, सच माना 4. जिय → 8. जन्मा 5. पठायो → 11. भेज दिया 6. पतियायो → 6. प्रकार, भाँति, रीति 7. बहियन → 5. बाँह, हाथ, भुजा 8. बिधि → 7. मन, जी 9. बिहँसि → 1. मुसकाई, हँसी 10. भटक्यो → 10. इधर-उधर घूमा या भटका 11. लपटायो → 9. मला, लगाया, पोता

व्याख्या:

पहले भाग में दिए गए शब्दों के बोलचाल के रूप लिखे गए हैं। दूसरे भाग में शब्दों को उनके सही अर्थों से जोड़ा गया है। प्रत्येक शब्द का अर्थ उसके भाव के अनुसार मिलाया गया है।

EasyNCERT
Q2.वर्ण-परिवर्तन “तू माता मन की अति भोरी” ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:

इस पद में वर्ण-परिवर्तन के उदाहरण हैं: - भोरी (भोली) - अन्य पदों में भी ‘ल’ और ‘र’ के बीच परिवर्तन होता है जैसे ‘माखन’ और ‘माखर’ (कल्पना स्वरूप), ‘पाछे’ और ‘पीछे’ आदि। छात्रों को अपने लेखन पुस्तिका में ऐसे शब्दों को लिखना चाहिए जो बोलचाल में ‘ल’ और ‘र’ के स्थान पर एक-दूसरे के रूप में उपयोग होते हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न वर्ण-परिवर्तन की समझ बढ़ाने के लिए है। ‘ल’ और ‘र’ के बीच परिवर्तन से शब्दों के उच्चारण और अर्थ में बदलाव आता है। इस अभ्यास से भाषा की विविधता और स्थानीय बोलियों की समझ होती है।

MediumNCERT
Q3.पंक्ति से पंक्ति नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए— | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | | --- | --- | | 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? | | 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। | | 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। | | 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। | | 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। | | 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |

उत्तर:

सही मिलान इस प्रकार है: 1 → 4 2 → 5 3 → 1 4 → 6 5 → 3 6 → 2 व्याख्या: - पंक्ति 1 का भाव है कि सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। - पंक्ति 2 का भाव है कि चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। - पंक्ति 3 का भाव है कि मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? - पंक्ति 4 का भाव है कि ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। - पंक्ति 5 का भाव है कि माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। - पंक्ति 6 का भाव है कि तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।

व्याख्या:

प्रत्येक पंक्ति के भावार्थ को समझकर सही जोड़ी बनानी है। यह अभ्यास पाठ के अर्थ को समझने में मदद करता है।

MediumNCERT
Q4.“मैया मैं नहिं माखन खायो” यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।

उत्तर:

यह प्रश्न विद्यार्थियों से उनके व्यक्तिगत अनुभव साझा करने के लिए है। वे अपने जीवन की ऐसी घटना लिख सकते हैं जब उन्हें किसी गलत आरोप से बचाव करना पड़ा हो। उन्होंने अपने तर्क, प्रमाण या समझाइश के माध्यम से अपनी बात सिद्ध की होगी।

व्याख्या:

यह प्रश्न संवाद कौशल और आत्म-अभिव्यक्ति को बढ़ावा देता है। इससे विद्यार्थी अपनी सोच और तर्क प्रस्तुत करना सीखते हैं।

EasyNCERT
Q5.नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर:

यह प्रश्न चित्रों के नाम पहचानने और लिखने का है। विद्यार्थी अपने घर में इन वस्तुओं के स्थानीय नाम लिखेंगे। उदाहरण के लिए: - मटका - छलनी - चक्की - हांडी - लोटा - कड़ाही - मूसल - थाली - कलछी यदि किसी वस्तु का नाम ज्ञात न हो तो शिक्षक या परिवार से पूछकर नाम लिख सकते हैं।

व्याख्या:

यह अभ्यास घरेलू वस्तुओं की पहचान और स्थानीय भाषा में उनके नाम सीखने के लिए है। इससे भाषा और संस्कृति की समझ बढ़ती है।

EasyNCERT
Q6.नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।

उत्तर:

दूध से घी बनाने की प्रक्रिया: 1. दूध को मथना या फेंटना जिससे मक्खन निकले। 2. मक्खन को इकट्ठा करना। 3. मक्खन को गर्म करके घी बनाना। 4. घी को छानकर ठंडा करना। यह प्रक्रिया पारंपरिक रूप से घरों में की जाती है। विद्यार्थी अपने अनुभव या जानकारी के अनुसार विस्तार से लिख सकते हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न दूध से घी बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया को समझने और लिखने के लिए है। चित्रों की सहायता से विद्यार्थी प्रक्रिया को क्रमबद्ध कर सकते हैं।

MediumNCERT
Q7.“चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।” (क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि) (ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे? (ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे? (घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?

उत्तर:

(क) समय बताने के लिए अन्य शब्द: - कल - ऋतु - वर्ष - अब - पखवाड़ा - दशक - वेला - अवधि (ख) श्रीकृष्ण चार पहर (लगभग 12 घंटे) गाय चराते थे। (ग) यदि वे शाम 6 बजे लौटे और चार पहर गाय चराए, तो वे सुबह 6 बजे घर से निकले होंगे। (घ) दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग 6 बजे सुबह होता है। क्योंकि दोपहर (दूसरा पहर) लगभग 12 बजे होता है, तो पहला पहर 6 बजे से शुरू होता है।

व्याख्या:

यह प्रश्न समय मापन की समझ और गणना के लिए है। पहर को 3 घंटे माना जाता है, चार पहर = 12 घंटे। शाम 6 बजे लौटने पर सुबह 6 बजे निकलना सही होगा।

MediumNCERT
Q8.(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए— - आपकी - आपके किसी परिजन की - आपके शिक्षक की - आपके मित्र की (ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे—

उत्तर:

(क) उदाहरण: - मेरी विशेष क्षमता: मैं अच्छी तरह सुन सकता हूँ और ध्यान से समझता हूँ। - मेरे परिजन की विशेष क्षमता: मेरी माँ अच्छी खाना बनाती हैं। - मेरे शिक्षक की विशेष क्षमता: वे बहुत अच्छे समझाने वाले हैं। - मेरे मित्र की विशेष क्षमता: वह खेल में बहुत तेज है। (ख) सहायता के उदाहरण: - जो सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है, मैं उसे समझाने में मदद करूंगा। - जो देख नहीं सकता, मैं उसे पढ़ाई में सहायता करूंगा। - जो जल्दी-जल्दी बोलता है, मैं उसे धीरे बोलने का अभ्यास कराऊंगा। - जो अटक-अटक कर बोलता है, मैं उसे प्रोत्साहित करूंगा और अभ्यास में मदद करूंगा। - जो चलने में कठिनाई है, मैं उसके लिए सहायक बनूंगा और उसे प्रोत्साहित करूंगा। - जो सुनने में कठिनाई है, मैं उसे लिखित में समझाने की कोशिश करूंगा।

व्याख्या:

यह प्रश्न विद्यार्थियों को अपनी और दूसरों की विशेषताओं को पहचानने तथा सहानुभूति और सहायता की भावना विकसित करने के लिए है।

MediumNCERT